Core Sector Growth June 2026: भारत की अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जून 2026 में देश के नौ प्रमुख कोर (बुनियादी) उद्योगों का उत्पादन 5% बढ़ा, जो पिछले पांच महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। इस तेज़ वृद्धि के पीछे सीमेंट, बिजली और लौह अयस्क (Iron Ore) का शानदार प्रदर्शन रहा। वहीं सरकार ने इस बार 2022-23 को नया बेस ईयर मानते हुए आंकड़े जारी किए हैं और पहली बार लौह अयस्क को भी कोर सेक्टर इंडेक्स में शामिल किया गया है।
जून में 5% बढ़ा कोर सेक्टर का उत्पादन
सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 में कोर सेक्टर का उत्पादन 5 प्रतिशत बढ़ा। इससे पहले मई 2026 में यह वृद्धि 3.2% और जून 2025 में केवल 1.1% रही थी। यानी इस बार ग्रोथ में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों में तेजी और निर्माण क्षेत्र की मजबूत मांग ने इस प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाई है।
इन सेक्टरों ने दिखाई सबसे मजबूत बढ़त
जून महीने में सबसे अधिक योगदान देने वाले सेक्टरों में सीमेंट, बिजली और लौह अयस्क शामिल रहे।
- सीमेंट उत्पादन: 9.8% की वृद्धि
- बिजली उत्पादन: 9.8% की वृद्धि
- लौह अयस्क (Iron Ore): 43.9% की शानदार बढ़ोतरी
लौह अयस्क को पहली बार नई सीरीज में शामिल किया गया है, जिससे कुल कोर उद्योगों की संख्या आठ से बढ़कर नौ हो गई है।
किन सेक्टरों में रही गिरावट?
जहां कुछ क्षेत्रों ने मजबूत प्रदर्शन किया, वहीं कुछ महत्वपूर्ण सेक्टरों में उत्पादन घटा।
इनमें शामिल हैं:
- कच्चा तेल (Crude Oil)
- प्राकृतिक गैस (Natural Gas)
- रिफाइनरी उत्पाद (Refinery Products)
- उर्वरक (Fertilizers)
इन क्षेत्रों में गिरावट के बावजूद अन्य सेक्टरों की मजबूती के कारण कुल उत्पादन वृद्धि सकारात्मक रही।
अप्रैल-जून तिमाही में भी बेहतर प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कोर सेक्टर का कुल उत्पादन 3.6% बढ़ा।
तुलना करें तो पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की समान अवधि में यह वृद्धि केवल 1% थी। इससे साफ है कि चालू वित्त वर्ष की शुरुआत अपेक्षाकृत बेहतर रही है।
सरकार ने बदली इंडेक्स की गणना
सरकार ने इस बार 2011-12 की जगह 2022-23 को नया बेस ईयर बनाया है। इसके साथ ही इंडेक्स की गणना में कई अहम बदलाव किए गए हैं।
मुख्य बदलाव इस प्रकार हैं:
- लौह अयस्क (Iron Ore) को पहली बार कोर सेक्टर में शामिल किया गया।
- स्टील इंडेक्स अब नेट प्रोडक्शन की बजाय ग्रॉस प्रोडक्शन के आधार पर तैयार होगा, ताकि यह इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) के अनुरूप रहे।
- कोयला इंडेक्स में अब केवल रॉ कोल (Raw Coal) शामिल किया जाएगा, जिससे धुले हुए कोयले और मिड्लिंग्स की डबल काउंटिंग खत्म होगी।
नए वेटेज में बिजली सबसे अहम सेक्टर
नई 2022-23 IIP सीरीज के अनुसार, कोर सेक्टर इंडेक्स में सबसे अधिक वेटेज बिजली को दिया गया है। इसके बाद रिफाइनरी उत्पाद और स्टील का स्थान आता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 2011-12 बेस ईयर वाली पुरानी सीरीज अब पूरी तरह बंद कर दी गई है। जुलाई 2026 के कोर सेक्टर के आंकड़े 20 अगस्त 2026 को जारी किए जाएंगे।
अर्थव्यवस्था के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं कोर सेक्टर?
कोर सेक्टर देश की औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों की दिशा तय करने वाले प्रमुख संकेतक माने जाते हैं। इन उद्योगों का प्रदर्शन इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) और आर्थिक विकास दर पर सीधा असर डालता है।
यदि सीमेंट, बिजली, स्टील और खनन जैसे क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ता है, तो यह इंफ्रास्ट्रक्चर, निर्माण और मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में मजबूती का संकेत माना जाता है। जून के आंकड़े बताते हैं कि देश में आर्थिक गतिविधियां गति पकड़ रही हैं, हालांकि ऊर्जा क्षेत्र के कुछ हिस्सों में कमजोरी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।


