Bitcoin Price Today: दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन (Bitcoin) एक बार फिर दबाव में है। सोमवार को इसकी कीमत करीब 1.63% गिरकर 63,500 डॉलर के आसपास पहुंच गई। पिछले कुछ महीनों से जारी गिरावट के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। खास बात यह है कि पिछले एक साल में बिटकॉइन लगभग 45.44% टूट चुका है, जबकि छह महीनों में इसमें करीब 30.05% की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि, लंबी अवधि में देखें तो पिछले पांच वर्षों में बिटकॉइन ने करीब 87.77% का रिटर्न दिया है, लेकिन हालिया कमजोरी ने निवेशकों की रणनीति बदल दी है।
क्रिप्टो एक्सपर्ट्स का मानना है कि फिलहाल वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, अमेरिका-ईरान तनाव, महंगे कच्चे तेल और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती आशंकाओं के कारण बिटकॉइन पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में नए निवेशकों को जल्दबाजी से बचने की सलाह दी जा रही है।
क्यों गिर रहा है Bitcoin?
सोमवार को क्रिप्टो बाजार में बिकवाली का माहौल देखने को मिला। बिटकॉइन के साथ-साथ अन्य प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी भी लाल निशान में कारोबार करती दिखीं। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई वैश्विक और तकनीकी कारण हैं।
बिटकॉइन में गिरावट की 5 सबसे बड़ी वजह
1. अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से निवेशकों में डर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। ऐसे माहौल में निवेशक जोखिम वाली एसेट्स से दूरी बनाकर सोना, डॉलर और सरकारी बॉन्ड जैसी सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। इसका सीधा असर बिटकॉइन की कीमत पर पड़ा है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी
तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। महंगा तेल महंगाई बढ़ने का संकेत देता है। यदि महंगाई बढ़ती है तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकते हैं, जिससे क्रिप्टो जैसे जोखिम वाले निवेश प्रभावित होते हैं।
3. फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर चिंता
बाजार को उम्मीद थी कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व जल्द ब्याज दरों में कटौती करेगा, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए ऐसी संभावना कमजोर होती दिख रही है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि साल के अंत तक दरों में और बढ़ोतरी भी हो सकती है। ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर बिटकॉइन जैसे हाई-रिस्क एसेट्स के लिए नकारात्मक मानी जाती हैं।
4. तकनीकी स्तर पार नहीं कर पाया बिटकॉइन
बिटकॉइन ने 65,200 से 65,500 डॉलर के महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस लेवल को पार करने की कोशिश की, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली। इसके बाद ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे कीमत तेजी से नीचे आ गई। तकनीकी चार्ट भी फिलहाल कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं।
5. खरीदारी के बावजूद मुनाफावसूली जारी
हालांकि स्पॉट बिटकॉइन ETF में लगातार निवेश आ रहा है, लेकिन कीमत बढ़ते ही कई निवेशक मुनाफा बुक कर रहे हैं। यही कारण है कि संस्थागत खरीदारी के बावजूद बाजार में तेजी टिक नहीं पा रही है।
पिछले एक साल का प्रदर्शन
बिटकॉइन का हालिया प्रदर्शन निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
| अवधि | रिटर्न |
|---|---|
| पिछले 6 महीने | -30.05% |
| पिछले 1 साल | -45.44% |
| पिछले 5 साल | +87.77% |
हालांकि लंबी अवधि के निवेशकों को अभी भी अच्छा रिटर्न मिला है, लेकिन अल्पकालिक निवेशकों को भारी नुकसान झेलना पड़ा है।
बिटकॉइन के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
Delta Exchange की रिसर्च एनालिस्ट रिया सहगल के अनुसार, बिटकॉइन फिलहाल महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा है।
- रेजिस्टेंस: 65,200–65,500 डॉलर
- पहला सपोर्ट: 63,000 डॉलर
- अगला सपोर्ट: 62,300–61,800 डॉलर
उनका कहना है कि यदि बिटकॉइन 63,000 डॉलर के नीचे फिसलता है तो गिरावट और तेज हो सकती है। वहीं आगे की दिशा कच्चे तेल की कीमत, अमेरिका-ईरान तनाव, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कॉर्पोरेट नतीजों पर निर्भर करेगी।
क्या बिकवाली का दौर खत्म होने वाला है?
Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत का कहना है कि गिरावट के बीच कुछ सकारात्मक संकेत भी दिखाई दे रहे हैं।
Glassnode के ऑन-चेन डेटा के मुताबिक, लंबे समय से बिटकॉइन होल्ड करने वाले निवेशकों की बिकवाली अब कम होने लगी है। इसका मतलब यह हो सकता है कि घबराहट में होने वाली बड़ी बिकवाली अपने अंतिम चरण में है।
उन्होंने बताया कि पिछले दो दिनों में स्पॉट बिटकॉइन ETF में करीब 290 मिलियन डॉलर का शुद्ध निवेश आया है, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला है। हालांकि, बिटकॉइन अभी भी अपने 50-महीने के मूविंग एवरेज (करीब 65,900 डॉलर) से नीचे कारोबार कर रहा है, जो कमजोरी का संकेत माना जाता है।
निवेशकों के लिए क्या सलाह?
Pi42 के को-फाउंडर और CEO अविनाश शेखर का कहना है कि ETF में लगातार निवेश यह दिखाता है कि बड़े निवेशकों का भरोसा अभी खत्म नहीं हुआ है। उनके अनुसार बाजार फिलहाल हेल्दी कंसोलिडेशन के दौर में है और आगे की तेजी से पहले यह सामान्य प्रक्रिया हो सकती है।
वहीं Giottus के CEO विक्रम सुब्बुराज का कहना है कि छोटी अवधि की तेजी देखकर जल्दबाजी में खरीदारी करना सही रणनीति नहीं होगी। उनका मानना है कि जब तक बिटकॉइन 65,000 डॉलर के ऊपर मजबूती से टिक नहीं जाता और ETF में लगातार मजबूत निवेश नहीं दिखता, तब तक SIP या चरणबद्ध निवेश करना और अधिक जोखिम से बचना बेहतर रहेगा।
निष्कर्ष
बिटकॉइन फिलहाल कई वैश्विक और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव, महंगा कच्चा तेल, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और तकनीकी कमजोरी के कारण बाजार में दबाव बना हुआ है। हालांकि, ETF निवेश और ऑन-चेन डेटा कुछ सकारात्मक संकेत दे रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों की राय है कि निवेशक जल्दबाजी में बड़े दांव लगाने के बजाय बाजार की दिशा स्पष्ट होने का इंतजार करें और चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाएं।
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