नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने कहा है कि देश में आर्थिक और सामाजिक विकास से जुड़ी नीतियों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) विभिन्न सर्वेक्षणों और प्रमुख आर्थिक सूचकांकों के आधार पर साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण कर रहा है। सरकार का कहना है कि मंत्रालय द्वारा जारी किए जाने वाले आंकड़े नागरिकों के जीवन स्तर, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों का वास्तविक आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने बताया कि मंत्रालय देश के प्रमुख आर्थिक संकेतकों जैसे सकल घरेलू उत्पाद (GDP), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) का नियमित संकलन और प्रकाशन करता है।
घरेलू सर्वेक्षणों से मिलते हैं अहम आंकड़े
मंत्री ने कहा कि मंत्रालय केवल आर्थिक आंकड़े ही नहीं बल्कि श्रम बल, सामाजिक उपभोग, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े नियमित घरेलू सर्वेक्षण भी कराता है। इन सर्वेक्षणों से प्राप्त आधिकारिक आंकड़े सरकार को नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का वास्तविक चित्र उपलब्ध कराते हैं।
उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के आधार पर सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यक्रमों को बेहतर तरीके से तैयार कर सकती है।
नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं सर्वेक्षण
राव इंद्रजीत सिंह के अनुसार, मंत्रालय द्वारा किए जाने वाले सर्वेक्षण सामाजिक और आर्थिक विकास के विभिन्न आयामों पर ठोस साक्ष्य उपलब्ध कराते हैं। यही आंकड़े सरकार को यह समझने में मदद करते हैं कि किस क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता है और किन योजनाओं का लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण से सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ती है और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होता है।
SDG संकेतकों की निगरानी भी मंत्रालय की जिम्मेदारी
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सतत विकास लक्ष्य (SDGs) के लिए राष्ट्रीय संकेतक ढांचा (National Indicator Framework) की निगरानी करने वाला नोडल मंत्रालय भी सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ही है।
इस ढांचे में शामिल प्रमुख संकेतकों में शामिल हैं:
- स्वास्थ्य
- शिक्षा
- लैंगिक समानता
- पर्यावरणीय स्थिरता
- नागरिकों का समग्र कल्याण
- सामाजिक विकास से जुड़े अन्य संकेतक
उन्होंने कहा कि इन सभी संकेतकों के माध्यम से देश में विकास की वास्तविक प्रगति का आकलन किया जाता है।
सेवा उत्पादन सूचकांक की रूपरेखा हुई तैयार
मंत्रालय ने हाल ही में जानकारी दी थी कि भारत के पहले सेवा उत्पादन सूचकांक (Services Production Index) की रूपरेखा को अंतिम रूप दे दिया गया है। इसे देश के तेजी से बढ़ते सेवा क्षेत्र का अधिक सटीक आकलन करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की भूमिका लगातार मजबूत हुई है। वर्तमान में देश के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 53 प्रतिशत है। यह क्षेत्र रोजगार सृजन, निवेश आकर्षित करने और निर्यात बढ़ाने में भी अहम योगदान दे रहा है।
GST डेटा से मजबूत हुई सांख्यिकीय प्रणाली
मंत्रालय के मुताबिक, वस्तु एवं सेवा कर (GST) के लागू होने के बाद भारत की सांख्यिकीय प्रणाली पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। जीएसटी नेटवर्क के माध्यम से लाखों कारोबारियों द्वारा हर महीने दर्ज की जाने वाली बाहरी आपूर्ति (Outward Supplies) की जानकारी उपलब्ध होती है।
इन आंकड़ों की मदद से सरकार आर्थिक गतिविधियों का अधिक सटीक विश्लेषण कर पाती है, जिससे नीति निर्माण और आर्थिक आकलन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
सरकार का फोकस डेटा आधारित निर्णयों पर
सरकार का कहना है कि विश्वसनीय सांख्यिकीय आंकड़े और नियमित सर्वेक्षण देश के आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। जीडीपी, सीपीआई, आईआईपी, श्रम बल सर्वेक्षण और एसडीजी संकेतकों जैसे आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर सरकार ऐसी नीतियां तैयार कर रही है, जिनका उद्देश्य नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार और समावेशी विकास को गति देना है।


