नई दिल्ली: भारत के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात को नई मजबूती मिली है। कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की मदद से उत्तराखंड से पहली बार फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज का निर्यात शुरू हो गया है। इसकी पहली खेप मध्य पूर्व के देश इराक के लिए रवाना की गई है। केंद्र सरकार का मानना है कि यह पहल उत्तराखंड के कृषि आधारित उद्योगों और भारत के मूल्यवर्धित खाद्य उत्पादों के निर्यात को नई गति देगी।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को जारी बयान में बताया कि उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर से 24 मीट्रिक टन (एमटी) फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज की पहली खेप इराक भेजी गई है। इस निर्यात को वीरुन ग्लोबल ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड ने अंजाम दिया, जबकि एपीडा ने निर्यात प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
उत्तराखंड के कृषि निर्यात के लिए बड़ी उपलब्धि
सरकार के अनुसार यह निर्यात केवल एक कारोबारी सौदा नहीं, बल्कि उत्तराखंड से मूल्यवर्धित कृषि उत्पादों के वैश्विक बाजार में प्रवेश की दिशा में एक अहम कदम है। इससे राज्य के किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और निर्यातकों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुणवत्ता और आपूर्ति की निरंतरता बनी रहती है तो आने वाले समय में इराक समेत मध्य पूर्व के अन्य देशों से भी बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं।
निर्यातक ने जताया भरोसा
निर्यातक कंपनी ने विश्वास जताया है कि उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के कारण भविष्य में बार-बार ऑर्डर प्राप्त होंगे। इससे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ दीर्घकालिक व्यापारिक संबंध स्थापित होंगे और कंपनी के साथ-साथ उत्तराखंड के अन्य खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए भी निर्यात के नए अवसर खुलेंगे।
अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों में एपीडा का सहयोग
एपीडा ने बताया कि उसने निर्यातकों को वैश्विक बाजार तक पहुंच बनाने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों और प्रदर्शनियों में भाग लेने में सहायता प्रदान की है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- सियाल (SIAL)
- गल्फूड (Gulfood)
- इंडसफूड (IndusFood)
- वर्ल्ड फूड इंडिया (World Food India)
इन आयोजनों के माध्यम से भारतीय निर्यातकों को विदेशी खरीदारों से सीधे संपर्क स्थापित करने और नए बाजारों तक पहुंचने में मदद मिली है।
प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों के निर्यात में भारत की बढ़ती ताकत
भारत लगातार वैश्विक स्तर पर प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों के प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। वर्ष 2025-26 के दौरान:
- प्रसंस्कृत सब्जियों का कुल निर्यात 932.25 मिलियन डॉलर रहा।
- कुल 7,26,874.70 मीट्रिक टन प्रसंस्कृत सब्जियों का निर्यात किया गया।
- मूल्यवर्धित आलू उत्पादों का निर्यात 2,77,108.51 मीट्रिक टन रहा।
- इन आलू उत्पादों का कुल निर्यात मूल्य 289.40 मिलियन डॉलर दर्ज किया गया।
- प्रसंस्कृत फल और सब्जियों का योगदान एपीडा के कुल निर्धारित निर्यात में लगभग 10 प्रतिशत रहा।
ये आंकड़े बताते हैं कि वैश्विक बाजार में भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
लॉजिस्टिक्स लागत अब भी बड़ी चुनौती
एपीडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा कि उत्तराखंड जैसे भू-आबद्ध (Landlocked) राज्यों के लिए परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने बताया कि एपीडा, उत्तराखंड सरकार के साथ मिलकर राज्य कृषि निर्यात नीति के निर्माण और प्रभावी क्रियान्वयन पर काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि परिवहन सहायता जैसी योजनाओं के जरिए निर्यात लागत कम करने और राज्य के उत्पादों को अधिक अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
किसानों और खाद्य उद्योग को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों का निर्यात बढ़ने से:
- आलू उत्पादकों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी।
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का विस्तार होगा।
- उत्तराखंड में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- भारत के कृषि निर्यात में विविधता आएगी।
- विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि होगी।
यदि इस तरह के निर्यात लगातार बढ़ते रहे तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के महत्वपूर्ण निर्यातक राज्यों में शामिल हो सकता है।


