नई दिल्ली: देश में E20 फ्यूल (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर बहस और विरोध के बीच केंद्र सरकार ने इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोल-डीजल के आयात पर निर्भरता कम करने और बायोफ्यूल मिशन को गति देने के लिए सरकार ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) के साथ मिलकर इथेनॉल उत्पादन हेतु बड़े पैमाने पर कच्चे माल की व्यवस्था की है। इसके तहत वर्ष 2026-27 के लिए 72 लाख टन चावल और 55 लाख टन टूटे (ब्रोकन) चावल डिस्टिलरियों को उपलब्ध कराए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि इससे न केवल इथेनॉल उत्पादन में तेजी आएगी बल्कि ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और किसानों व डिस्टिलरी उद्योग को भी फायदा मिलेगा।
Highlights
- इथेनॉल उत्पादन के लिए 72 लाख टन चावल रिजर्व।
- 55 लाख टन टूटे चावल की ई-नीलामी को मंजूरी।
- ₹2,390 प्रति क्विंटल की दर से मिलेगा FCI का चावल।
- पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की तैयारी तेज।
- बायोफ्यूल के जरिए तेल आयात पर निर्भरता घटाने की रणनीति।
इथेनॉल उत्पादन के लिए FCI से मिलेगा बड़ा सपोर्ट
खाद्य मंत्रालय ने सप्लाई वर्ष 2026-27 के लिए भारतीय खाद्य निगम (FCI) के सरकारी भंडार से 72 लाख टन चावल इथेनॉल उत्पादन के लिए आरक्षित कर दिया है। यह पिछले वर्ष 2025-26 में आवंटित 52 लाख टन से करीब 20 लाख टन अधिक है।
इसके अलावा, 55 लाख टन ब्रोकन राइस (टूटे चावल) को भी खुली ई-नीलामी के जरिए बेचने की मंजूरी दी गई है। इससे डिस्टिलरियों को पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध होगा और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
कितनी कीमत पर मिलेगा चावल?
खाद्य मंत्रालय ने 16 जुलाई को FCI को भेजे निर्देश में कहा है कि इथेनॉल सप्लाई वर्ष (ESY) 2026-27 के दौरान डिस्टिलरियों को ₹2,390 प्रति क्विंटल की दर से चावल उपलब्ध कराया जाएगा।
वहीं, चावल मिलिंग ट्रांसफॉर्मेशन (RMT) योजना के तहत तैयार हुए टूटे चावल को भी ई-नीलामी के माध्यम से बेचा जाएगा। सरकार ने पहले RMT चावल का आधार आरक्षित मूल्य ₹2,000 प्रति क्विंटल तय किया था, जबकि आगे इसकी कीमत प्रत्येक तिमाही में समिति द्वारा तय की जाएगी।
डिस्टिलरी उद्योग को होगा बड़ा फायदा
सरकार के इस फैसले से डिस्टिलरी उद्योग की लागत और उत्पादन दोनों पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।
- FCI के चावल से बने इथेनॉल को ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ₹58.50 प्रति लीटर की दर से खरीदेंगी।
- वहीं, टूटे चावल से तैयार इथेनॉल के लिए खरीद मूल्य ₹64 प्रति लीटर निर्धारित किया गया है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ई-नीलामी में बिकने वाले टूटे चावल का उपयोग बड़े पैमाने पर इथेनॉल उत्पादन में होता है, तो डिस्टिलरियों की लाभप्रदता और उत्पादन क्षमता दोनों में सुधार होगा।
E20 से आगे की तैयारी में जुटी सरकार
फिलहाल देश में पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य लागू किया जा रहा है, लेकिन सरकार भविष्य में इससे अधिक मिश्रण की संभावनाओं पर भी अध्ययन और परीक्षण कर रही है।
ऐसे में इथेनॉल की मांग लगातार बढ़ने की संभावना है। यदि मानसून कमजोर रहने से गन्ने या मक्के का उत्पादन प्रभावित होता है, तो सरकारी भंडार में मौजूद चावल इथेनॉल उत्पादन को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकता है।
हर साल कितने इथेनॉल की जरूरत?
देश में वर्तमान में लगभग 2,000 करोड़ लीटर वार्षिक इथेनॉल उत्पादन क्षमता मौजूद है। जबकि पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए तेल विपणन कंपनियों को हर वर्ष लगभग 1,050 से 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल की आवश्यकता होती है।
इसी बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार पहले से कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने की रणनीति पर काम कर रही है।
राज्यों को भी जारी किए गए निर्देश
केंद्र सरकार ने राज्य सरकारों की एजेंसियों को भी चावल आवंटन का फैसला किया है।
- जुलाई से अक्टूबर के बीच 16 लाख टन चावल ₹2,320 प्रति क्विंटल की दर से उपलब्ध कराया जाएगा।
- नवंबर 2026 से जून 2027 के दौरान 32 लाख टन चावल ₹2,390 प्रति क्विंटल की दर से दिया जाएगा।
हालांकि, सरकार ने फिलहाल NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार जैसी सहकारी संस्थाओं को ‘भारत’ ब्रांड के तहत खुदरा बिक्री के लिए चावल आवंटन स्थगित रखा है। सरकार का कहना है कि इसकी मात्रा और समय की जानकारी बाद में जारी की जाएगी।
सरकार की रणनीति क्या है?
सरकार का उद्देश्य केवल इथेनॉल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि देश के ऊर्जा आयात बिल को कम करना, किसानों को वैकल्पिक बाजार उपलब्ध कराना और बायोफ्यूल सेक्टर को मजबूत बनाना भी है। FCI के अतिरिक्त चावल का उपयोग कर सरकार एक तरफ भंडारण का दबाव कम करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को लगातार गति देना चाहती है। आने वाले वर्षों में यदि इथेनॉल मिश्रण का स्तर बढ़ाया जाता है, तो इस तरह की तैयारियां देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं.


