भारत का एयरोस्पेस और विमानन क्षेत्र तेजी से नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। केंद्रीय नागर विमानन मंत्री राममोहन नायडू ने कहा है कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत देश की विमान निर्माण क्षमता लगातार मजबूत हो रही है। आने वाले वर्षों में भारतीय नागरिकों को भारत में बने नागरिक विमानों में यात्रा करने का अवसर मिलेगा, जो देश के विमानन इतिहास में एक बड़ा बदलाव होगा।
‘मेड इन इंडिया’ विमान निर्माण की ओर मजबूत कदम
केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर भारत में निर्मित पहले एयरबस C-295 सैन्य परिवहन विमान का वीडियो साझा करते हुए इसे एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
उन्होंने हाल ही में गुजरात के वडोदरा स्थित टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) की अत्याधुनिक विनिर्माण इकाई का दौरा किया, जहां C-295 विमानों का निर्माण किया जा रहा है।
राममोहन नायडू ने कहा कि यह संयंत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया विजन का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत जल्द ही ऐसे दौर में प्रवेश करेगा, जब देश में बने नागरिक विमान भारतीय यात्रियों को सेवाएं देंगे।
एयरबस और टाटा की साझेदारी से बन रहा C-295
C-295 विमान का निर्माण एयरबस और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड की साझेदारी में किया जा रहा है। यह पहला सैन्य विमान है, जिसका निर्माण भारत में निजी क्षेत्र द्वारा ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत किया जा रहा है।
यह परियोजना वर्ष 2021 में भारत सरकार और एयरबस के बीच हुए 2.6 अरब डॉलर के समझौते का हिस्सा है। इस समझौते के तहत भारतीय वायुसेना के लिए कुल 56 C-295 सैन्य परिवहन विमान खरीदे जा रहे हैं।
56 विमानों की योजना
- 16 विमान स्पेन से पूरी तरह तैयार अवस्था में भारत भेजे जा रहे हैं।
- शेष 40 विमानों की असेंबली गुजरात के वडोदरा स्थित संयंत्र में की जा रही है।
- इससे भारत में विमान निर्माण तकनीक, सप्लाई चेन और कुशल मानव संसाधन का तेजी से विकास होगा।
मई में निकला पहला विमान, जून में सफल परीक्षण उड़ान
भारत में असेंबल किया गया पहला C-295 विमान मई 2026 में अंतिम असेंबली लाइन से बाहर आया था। इसके बाद 10 जून को इस विमान ने अपनी पहली सफल परीक्षण उड़ान पूरी की।
भारतीय वायुसेना ने इस उपलब्धि को भारत की रक्षा और एयरोस्पेस आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया और परियोजना से जुड़े सभी इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और कर्मचारियों को बधाई दी।
धोलेरा में बनेगा MRO हब
रिपोर्टों के अनुसार, गुजरात के आगामी धोलेरा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर C-295 विमानों के लिए मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल (MRO) सुविधा विकसित की जाएगी।
इससे मिलने वाले प्रमुख लाभ:
- विमान रखरखाव की लागत में कमी
- घरेलू एयरोस्पेस उद्योग को मजबूती
- रोजगार के नए अवसर
- भारत को वैश्विक MRO हब बनाने में मदद
- रक्षा और नागरिक विमानन दोनों क्षेत्रों को लाभ
भारत के विमानन उद्योग के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?
विशेषज्ञों का मानना है कि C-295 परियोजना केवल एक रक्षा विमान निर्माण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भारत में भविष्य के नागरिक विमान निर्माण की मजबूत नींव भी तैयार कर रही है। विमान निर्माण, डिजाइन, इंजीनियरिंग और सप्लाई चेन में विकसित होने वाली विशेषज्ञता आने वाले समय में स्वदेशी नागरिक विमानों के निर्माण का रास्ता आसान करेगी।
यदि यह योजना तय समय पर आगे बढ़ती है, तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो सकता है, जहां बड़े पैमाने पर विमान निर्माण की क्षमता मौजूद है।
निष्कर्ष
भारत का एयरोस्पेस सेक्टर तेजी से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। C-295 विमान परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ अभियान की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है। केंद्रीय मंत्री राममोहन नायडू का कहना है कि देश अब उस भविष्य की ओर बढ़ रहा है, जहां भारतीय नागरिक ‘मेड इन इंडिया’ विमानों में गर्व के साथ यात्रा करेंगे। यदि यह विजन सफल होता है, तो भारत वैश्विक विमान निर्माण उद्योग में भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकता है।


