Gautam Adani US Case Update: उद्योगपति गौतम अदाणी के खिलाफ अमेरिका में चल रहे कथित रिश्वत और धोखाधड़ी मामले में नया मोड़ आ गया है। अमेरिकी संघीय अदालत में दायर दस्तावेजों से पता चला है कि आपराधिक मुकदमा वापस लेने का निर्णय स्थानीय अभियोजक ने नहीं, बल्कि अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के वरिष्ठ अधिकारी ने लिया था। अब अदालत इस पूरी प्रक्रिया की वैधता की समीक्षा कर रही है, जिससे मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
अमेरिका में अदाणी केस पर क्या है नया अपडेट?
भारत के उद्योगपति गौतम अदाणी के खिलाफ अमेरिका में दर्ज आपराधिक मामले को वापस लेने की प्रक्रिया को लेकर नया खुलासा हुआ है। ब्रुकलिन के शीर्ष संघीय अभियोजक (यूएस अटॉर्नी) जोसेफ नोसेला जूनियर ने अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गराउफिस को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि मुकदमा वापस लेने का फैसला उनका व्यक्तिगत निर्णय नहीं था।
उन्होंने अदालत को बताया कि यह फैसला अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) के वरिष्ठ अधिकारी ट्रेंट मैककॉट्टर ने लिया था। हालांकि नोसेला ने यह भी कहा कि उनके पास ऐसा कोई कारण नहीं है जिससे यह माना जाए कि DOJ द्वारा दिए गए कारण वास्तविक नहीं थे, लेकिन उन्होंने यह भी नहीं कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से इस फैसले से सहमत थे।
अदालत ने क्यों मांगा था जवाब?
जज निकोलस गराउफिस ने अभियोजक से यह स्पष्ट करने को कहा था कि क्या वे न्याय विभाग के तर्कों से सहमत हैं और क्या मुकदमा वापस लेने के पीछे कोई अन्य कारण भी था।
इसके जवाब में नोसेला ने कहा कि वह इस निर्णय के “निर्णयकर्ता” नहीं थे और अंतिम फैसला DOJ के वरिष्ठ स्तर पर लिया गया था। इसी वजह से अदालत अब यह जांच रही है कि मुकदमा वापस लेने की पूरी प्रक्रिया कानूनी रूप से उचित थी या नहीं।
DOJ ने केस वापस लेने के पीछे क्या वजह बताई?
4 जुलाई को DOJ के वरिष्ठ अधिकारी ट्रेंट मैककॉट्टर ने अदालत को भेजे अपने पत्र में कहा था कि यह मामला मुख्य रूप से भारत से जुड़ा हुआ है।
उनके अनुसार:
- कथित घटनाएं भारत में हुईं।
- अधिकांश संबंधित पक्ष भारतीय हैं।
- ऐसे मामलों में अमेरिका को “दुनिया की पुलिस” की भूमिका नहीं निभानी चाहिए।
- उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल के दौरान यह मामला अगले प्रशासन के लिए छोड़ दिया गया था।
इन्हीं तर्कों के आधार पर DOJ ने आपराधिक मुकदमा वापस लेने का फैसला लिया।
गौतम अदाणी पर क्या हैं आरोप?
अमेरिकी अधिकारियों का आरोप था कि अदाणी ग्रीन एनर्जी से जुड़ी एक बड़ी सौर ऊर्जा परियोजना हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को लगभग 26.5 करोड़ डॉलर (265 मिलियन डॉलर) की कथित रिश्वत देने की साजिश रची गई थी।
हालांकि अदाणी समूह ने शुरुआत से ही इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज किया है और किसी भी तरह की रिश्वत या धोखाधड़ी से इनकार किया है।
अदालत में अदाणी के हलफनामे में क्या कहा गया?
मामले की सुनवाई के दौरान गौतम अदाणी ने अदालत में दायर अपने हलफनामे में स्वीकार किया कि उन्होंने इस वर्ष अमेरिका में 10 अरब डॉलर के संभावित निवेश का प्रस्ताव रखा था।
हलफनामे के अनुसार:
- उनके वकील रॉबर्ट जिउफ्रा ने सुझाव दिया था कि यदि DOJ या SEC चाहे तो यह निवेश किसी संभावित समझौते का हिस्सा बन सकता है।
- अदाणी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने मुकदमा खत्म कराने के लिए किसी भी प्रकार की कोई डील या समझौता नहीं किया।
सरकारी अभियोजक ने निवेश के बदले समझौते की बात को किया खारिज
जोसेफ नोसेला ने अदालत को बताया कि उन्होंने किसी भी प्रकार के निवेश के बदले आपराधिक मुकदमे के निपटारे के विचार को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया था।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) का सिविल मामला अलग प्रक्रिया के तहत चलता है और उसका आपराधिक मुकदमे से सीधा संबंध नहीं है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल अमेरिकी जिला अदालत इस बात की समीक्षा कर रही है कि:
- क्या आपराधिक मुकदमा वापस लेने की प्रक्रिया कानून के अनुरूप अपनाई गई?
- DOJ द्वारा दिए गए कारण पर्याप्त और वैध थे या नहीं?
- क्या पूरी प्रक्रिया में किसी प्रकार की प्रक्रियागत त्रुटि हुई?
अदालत की अगली सुनवाई और उसके फैसले पर अमेरिका और भारत दोनों में निवेशकों तथा कारोबारी जगत की नजरें टिकी हुई हैं।
निष्कर्ष
गौतम अदाणी से जुड़े अमेरिकी मामले में सामने आए नए खुलासे ने कानूनी बहस को नया आयाम दे दिया है। अब विवाद केवल आरोपों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह भी सवाल उठ रहा है कि आपराधिक मुकदमा वापस लेने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के अनुरूप थी या नहीं। अदालत की आगामी सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


