नई दिल्ली, 17 जुलाई: उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने एयरलाइन कंपनी स्पाइसजेट लिमिटेड के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने फ्लाइट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर कथित तौर पर ‘डार्क पैटर्न’ (Dark Pattern) का इस्तेमाल करने के आरोप में कंपनी पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। जांच में पाया गया कि एयरलाइन ग्राहकों को उनकी स्पष्ट सहमति के बिना अपने स्पाइसक्लब लॉयल्टी प्रोग्राम में स्वतः शामिल कर रही थी और प्रमोशनल मैसेज भेजने की सहमति भी पहले से चयनित (Pre-selected) विकल्पों के जरिए ले रही थी।
क्या है पूरा मामला?
सीसीपीए की चीफ कमिश्नर निधि खरे और कमिश्नर अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश जारी किया। जांच के दौरान यह सामने आया कि स्पाइसजेट के ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म का इंटरफेस इस तरह डिजाइन किया गया था कि उपभोक्ताओं की स्वतंत्र पसंद प्रभावित हो रही थी।
प्राधिकरण के अनुसार, बुकिंग प्रक्रिया के दौरान प्री-टिक्ड (Pre-ticked) चेकबॉक्स पहले से चयनित रहते थे, जिसके कारण ग्राहक अनजाने में ही स्पाइसक्लब लॉयल्टी प्रोग्राम का हिस्सा बन जाते थे।
प्रमोशनल मैसेज की सहमति भी पहले से तय
जांच में यह भी सामने आया कि ग्राहकों को एसएमएस, व्हाट्सऐप और ईमेल के माध्यम से प्रचार संबंधी संदेश भेजने की सहमति भी पहले से चयनित विकल्पों के जरिए ली जा रही थी। यानी ग्राहक यदि अलग से उस विकल्प को नहीं हटाता, तो यह मान लिया जाता था कि उसने प्रचार संदेश प्राप्त करने की अनुमति दे दी है।
सीसीपीए ने माना कि इस तरह की प्रक्रिया उपभोक्ता की स्पष्ट और स्वतंत्र सहमति के सिद्धांत के खिलाफ है।
नोटिस के बाद भी जारी रही प्रक्रिया
प्राधिकरण ने अपने आदेश में कहा कि नोटिस जारी होने के बाद भी स्पाइसजेट ने पुरानी व्यवस्था पूरी तरह समाप्त नहीं की। इसके बजाय कंपनी ने एक नया प्री-टिक्ड चेकबॉक्स जोड़ दिया, जिसके जरिए भविष्य में एसएमएस, व्हाट्सऐप और ईमेल से प्रमोशनल संदेश भेजने की सहमति पहले से दर्ज रहती थी।
सीसीपीए के मुताबिक, यह पहले वाली प्रक्रिया का ही दूसरा रूप था और इससे उपभोक्ताओं की स्वतंत्र पसंद प्रभावित होती रही।
स्पाइसजेट ने दी तकनीकी त्रुटि की दलील
सुनवाई के दौरान स्पाइसजेट ने इस पूरी घटना को तकनीकी त्रुटि (Technical Error) का परिणाम बताया। इसके बाद सीसीपीए ने कंपनी को लिखित आश्वासन देने का निर्देश दिया कि आवश्यक सुधार लागू कर दिए गए हैं और भविष्य में भी ऐसी व्यवस्था दोबारा नहीं अपनाई जाएगी।
उपभोक्ताओं की स्वतंत्र पसंद पर असर
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार, डार्क पैटर्न जैसी तकनीकें उपभोक्ताओं की स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को प्रभावित करती हैं। इससे ग्राहक पूरी जानकारी के आधार पर फैसला नहीं ले पाते और निष्पक्ष एवं पारदर्शी उपभोक्ता व्यवहार के सिद्धांतों का उल्लंघन होता है।
सीसीपीए ने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, 2019 के तहत अनुचित व्यापारिक प्रथा (Unfair Trade Practice), अनुचित अनुबंध (Unfair Contract) और भ्रामक प्रस्तुतीकरण (Misleading Representation) की श्रेणी में आती हैं।
डार्क पैटर्न क्या होता है?
डार्क पैटर्न ऐसे डिजिटल डिजाइन या यूजर इंटरफेस होते हैं जिन्हें इस तरह तैयार किया जाता है कि उपयोगकर्ता अनजाने में कोई ऐसा विकल्प चुन ले, जिसे वह सामान्य परिस्थितियों में नहीं चुनता। उदाहरण के तौर पर—
- पहले से टिक किए गए चेकबॉक्स
- सदस्यता स्वतः सक्रिय करना
- प्रमोशनल संदेशों की सहमति पहले से दर्ज होना
- सदस्यता रद्द करने की प्रक्रिया को जानबूझकर जटिल बनाना
सरकार और नियामक संस्थाएं पिछले कुछ वर्षों से ई-कॉमर्स, ट्रैवल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ऐसे डार्क पैटर्न के खिलाफ सख्त रुख अपना रही हैं।


