India-US Trade Deal: मशहूर अर्थशास्त्री और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के पूर्व एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर सुरजीत भल्ला का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाला व्यापार एवं निवेश समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। उनका कहना है कि यह केवल एक ट्रेड डील नहीं, बल्कि निवेश, उद्योग, रोजगार और आर्थिक विकास को नई गति देने वाला व्यापक समझौता है। वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का भारत की आर्थिक वृद्धि पर अब तक कोई बड़ा नकारात्मक असर देखने को नहीं मिला है।
भारत-अमेरिका डील से मिलेगी ग्रोथ को नई ताकत
मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में सुरजीत भल्ला ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार यह केवल आयात-निर्यात तक सीमित समझौता नहीं होगा, बल्कि निवेश, तकनीकी सहयोग, सप्लाई चेन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी मजबूती देगा।
उन्होंने कहा कि यदि यह समझौता व्यापक रूप में लागू होता है तो इससे भारत में विदेशी निवेश बढ़ेगा, निर्यात को नई गति मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसका सीधा असर देश की आर्थिक विकास दर पर दिखाई देगा।
पश्चिम एशिया संकट का भारत की ग्रोथ पर सीमित असर
सुरजीत भल्ला ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि दुनिया की अर्थव्यवस्था पहले की तुलना में काफी बदल चुकी है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन कर रही है, जबकि यूरोप भी अपनी विकास दर बनाए रखने में सफल रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका और यूरोप जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इस संकट के बावजूद मजबूत बनी हुई हैं और भारत की ग्रोथ पर भी इसका बड़ा असर नहीं पड़ा है, तो इसका मतलब है कि पश्चिम एशिया का संघर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए फिलहाल गंभीर खतरा नहीं बना है।
घरेलू खपत भारत की सबसे बड़ी ताकत
भल्ला के अनुसार भारत की आर्थिक मजबूती का सबसे बड़ा आधार घरेलू खपत (Domestic Consumption) है। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता खर्च का योगदान काफी अधिक है, जिससे वैश्विक संकटों का असर अपेक्षाकृत कम महसूस होता है।
उनका कहना है कि विकसित देशों की तुलना में भारत जैसे विकासशील देशों में निवेश की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है, लेकिन घरेलू मांग लगातार मजबूत रहने से अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलती है।
तेल की कीमतों का असर पहले जितना नहीं
उन्होंने कहा कि पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई और आर्थिक विकास पर देखने को मिलता था। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
भल्ला के मुताबिक दुनिया के कई देशों ने ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोत विकसित किए हैं और सरकारें सप्लाई चेन को बेहतर बनाने में सफल रही हैं। यही वजह है कि तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर पहले जितना गंभीर नहीं रह गया है।
निवेश और व्यापार समझौते होंगे भविष्य की ग्रोथ के इंजन
पूर्व IMF अधिकारी का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि को तेज करने के लिए वैश्विक निवेश, मजबूत व्यापार समझौते और घरेलू मांग तीन प्रमुख स्तंभ होंगे। यदि भारत अमेरिका सहित प्रमुख देशों के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाता है तो इससे मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात और रोजगार में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में बनी हुई है। मजबूत घरेलू मांग, बढ़ता निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च और संभावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता आने वाले समय में आर्थिक विकास को नई दिशा दे सकते हैं।


