नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित IPO से पहले निवेशकों के लिए एक अहम संकेत सामने आया है। जहां अनलिस्टेड मार्केट में NSE के शेयर करीब ₹2,085 पर कारोबार कर रहे हैं, वहीं घरेलू ब्रोकरेज दौलत कैपिटल मार्केट्स ने इस शेयर पर ‘Sell’ (बिकवाली) की रेटिंग देते हुए ₹1,550 का टारगेट प्राइस तय किया है। यह मौजूदा अनलिस्टेड मार्केट प्राइस से करीब 26% कम है।
ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी के परिचालन प्रदर्शन में कमजोरी, ट्रेडिंग वॉल्यूम में गिरावट और आय के प्रमुख स्रोतों पर दबाव के कारण मौजूदा वैल्यूएशन काफी महंगा नजर आ रहा है।
Highlights
- दौलत कैपिटल ने NSE पर ‘Sell’ रेटिंग दी।
- टारगेट प्राइस ₹1,550, जो अनलिस्टेड मार्केट भाव से करीब 26% कम है।
- गिरते ट्रेडिंग वॉल्यूम और ऑपरेटिंग इनकम पर जताई चिंता।
- IPO से पहले किसी ब्रोकरेज द्वारा कवरेज शुरू करना माना जा रहा है दुर्लभ कदम।
IPO से पहले क्यों चर्चा में है NSE?
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज लंबे समय से अपने IPO की तैयारी कर रहा है। निवेशकों के बीच इसकी लिस्टिंग का काफी इंतजार है क्योंकि यह भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। आमतौर पर किसी कंपनी के IPO आने से पहले ब्रोकरेज हाउस विस्तृत कवरेज शुरू नहीं करते, लेकिन इस बार दौलत कैपिटल ने IPO से पहले ही अपनी रिपोर्ट जारी कर निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
ब्रोकरेज का कहना है कि NSE का इक्विटी डेरिवेटिव्स कारोबार पिछले कुछ समय से दबाव में है। ट्रेडिंग वॉल्यूम घटने से मार्केट शेयर और भविष्य की ग्रोथ पर असर पड़ सकता है।
₹2,085 के मुकाबले सिर्फ ₹1,550 का टारगेट
दौलत कैपिटल ने NSE के लिए ₹1,550 का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह अनलिस्टेड मार्केट में चल रहे लगभग ₹2,085 के भाव से करीब 26 फीसदी कम है।
ब्रोकरेज के अनुसार मौजूदा कीमत पर NSE का वैल्यूएशन भविष्य की संभावित ग्रोथ की तुलना में काफी ऊंचा दिखाई देता है। यदि कारोबार की गति कमजोर रहती है तो इतने ऊंचे वैल्यूएशन को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।
परिचालन आय में भी आई गिरावट
सेबी के पास दाखिल रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में NSE की कुल परिचालन आय ₹16,601.30 करोड़ रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह ₹17,140.67 करोड़ थी। यानी सालाना आधार पर इसमें 3% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
यह गिरावट इस बात का संकेत है कि कंपनी के मुख्य बिजनेस से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ा है।
ट्रांजैक्शन चार्जेज भी हुए कम
NSE की कमाई का सबसे बड़ा स्रोत ट्रांजैक्शन चार्जेज हैं। लेकिन इस मद से होने वाली आय भी घटी है।
- FY25: ₹13,635.76 करोड़
- FY26: ₹13,057.01 करोड़
यानी इस आय में करीब 4% की सालाना गिरावट दर्ज की गई। ब्रोकरेज का मानना है कि यदि ट्रेडिंग गतिविधियां कमजोर रहती हैं तो आने वाले समय में कंपनी की कमाई पर और दबाव बन सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
NSE का IPO भारतीय पूंजी बाजार के सबसे चर्चित सार्वजनिक निर्गमों में से एक माना जा रहा है। हालांकि, अनलिस्टेड मार्केट में ऊंचे प्रीमियम पर शेयर खरीदने वाले निवेशकों के लिए यह रिपोर्ट एक चेतावनी हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अनलिस्टेड मार्केट के भाव देखकर निवेश का फैसला नहीं करना चाहिए। कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन, कारोबार की वृद्धि और जोखिमों का भी सावधानी से आकलन करना जरूरी है। IPO के प्राइस बैंड और वैल्यूएशन सामने आने के बाद ही निवेश का अंतिम निर्णय लेना अधिक उचित होगा।
निष्कर्ष
NSE का IPO निवेशकों के लिए बड़ा अवसर हो सकता है, लेकिन दौलत कैपिटल की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि मौजूदा अनलिस्टेड वैल्यूएशन पर सावधानी बरतना जरूरी है। गिरते ट्रेडिंग वॉल्यूम, ऑपरेटिंग इनकम में कमी और ऊंचे वैल्यूएशन जैसी चुनौतियां निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण फैक्टर साबित हो सकती हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार और IPO में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या सेबी-पंजीकृत निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।
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