वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। निफ्टी 24,300 के पार पहुंचा जबकि सेंसेक्स 78,200 के ऊपर गया। जानिए इस तेजी की बड़ी वजह।
Share Market Rise: दुनिया के बाजार लाल, लेकिन भारत में बुल्स का दबदबा
नई दिल्ली: वैश्विक शेयर बाजारों में शुक्रवार (17 जुलाई) को भारी बिकवाली के बीच भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती का शानदार प्रदर्शन किया। जापान, ताइवान, चीन और यूरोप के प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते रहे, लेकिन घरेलू निवेशकों की मजबूत खरीदारी और कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों के दम पर भारतीय बाजार में जोरदार रैली देखने को मिली।
कारोबार के दौरान Nifty 50 24,300 के स्तर को पार करते हुए 24,367.30 तक पहुंच गया, जबकि BSE Sensex भी 78,282.55 के इंट्राडे हाई तक चढ़ गया। यह तेजी ऐसे समय आई जब वैश्विक बाजारों में निवेशकों की धारणा कमजोर बनी हुई थी।
शुरुआती कारोबार से ही दिखी मजबूती
शुक्रवार को बाजार की शुरुआत सकारात्मक रही।
- निफ्टी 50 24,127.60 पर खुला।
- सेंसेक्स 77,370.77 के स्तर पर खुला।
- शुरुआती कारोबार के बाद दोनों प्रमुख सूचकांकों में लगातार खरीदारी देखने को मिली।
दोपहर तक बैंकिंग, आईटी और एफएमसीजी शेयरों में मजबूत खरीदारी के कारण बाजार ऊंचे स्तरों पर पहुंच गया।
आखिर क्यों चढ़ा भारतीय शेयर बाजार?

भारतीय बाजार की तेजी के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण रहे।
1. आईटी शेयरों में शानदार खरीदारी
आईटी कंपनियों के तिमाही नतीजों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
- Tech Mahindra के शेयर करीब 4.5% तक उछले।
- TCS में लगभग 3% की तेजी दर्ज की गई।
- मजबूत आय और बेहतर आउटलुक के चलते पूरे आईटी सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली।
2. बैंकिंग सेक्टर ने दिया बड़ा सहारा
प्राइवेट बैंकिंग शेयरों में जोरदार खरीदारी रही।
विशेष रूप से:
- कोटक महिंद्रा बैंक
- एचडीएफसी बैंक
- अन्य बड़े निजी बैंक
इन शेयरों की मजबूती ने निफ्टी और सेंसेक्स दोनों को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
3. बेहतर तिमाही नतीजों से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
जून तिमाही (Q1) के नतीजे बाजार की उम्मीद से बेहतर रहे हैं।
निवेशक अब मान रहे हैं कि:
- कॉर्पोरेट आय में सुधार जारी है।
- आईटी कंपनियों का मार्जिन बेहतर हो रहा है।
- बैंकिंग सेक्टर की एसेट क्वालिटी मजबूत बनी हुई है।
इसी वजह से विदेशी बाजारों की कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर सीमित रहा।
4. रुपया भी हुआ मजबूत
भारतीय रुपये में भी मजबूती देखने को मिली।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 96.573 के उच्च स्तर तक पहुंच गया।
LKP Securities के कमोडिटी एवं करेंसी रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी के अनुसार,
“बाजार की अगली दिशा कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों (FII) के निवेश और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी। तकनीकी रूप से 96.00 रुपये के आसपास मजबूत रेजिस्टेंस है और फिलहाल 96.00 से 96.60 के बीच कारोबार रहने की संभावना है।”
वैश्विक बाजारों में क्यों मची बिकवाली?

जहां भारत में तेजी रही, वहीं दुनिया के कई बड़े बाजार दबाव में रहे।
मुख्य वजहें:
- जापान का Nikkei Index 5% से अधिक गिरा।
- ताइवान का Weighted Index लगभग 6% टूटा।
- हांगकांग का Hang Seng 2% से ज्यादा फिसला।
- चीन का Shanghai Composite भी 2% से अधिक गिरावट में रहा।
- यूरोपीय बाजारों में भी टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।
कच्चे तेल और जियोपॉलिटिकल तनाव बना चिंता का कारण
ईरान-अमेरिका तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है।
महंगे कच्चे तेल का असर:
- महंगाई बढ़ने का खतरा
- आयात बिल में बढ़ोतरी
- वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में कमी
इसी वजह से अधिकांश विदेशी बाजार दबाव में रहे।
आज निफ्टी के प्रमुख गेनर्स
शुक्रवार को निफ्टी 50 में सबसे ज्यादा तेजी दिखाने वाले शेयरों में शामिल रहे:
- Tech Mahindra
- TCS
- Jio Financial Services
- Kotak Mahindra Bank
- Hindustan Unilever
इन कंपनियों में मजबूत खरीदारी ने पूरे बाजार को सहारा दिया।
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
विश्लेषकों के अनुसार आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर इन कारकों पर रहेगी—
- Q1 रिजल्ट सीजन
- विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का निवेश
- कच्चे तेल की कीमतें
- डॉलर-रुपया विनिमय दर
- अमेरिका और मध्य-पूर्व से जुड़े भू-राजनीतिक घटनाक्रम
- वैश्विक टेक सेक्टर का प्रदर्शन
यदि इन मोर्चों पर स्थिति अनुकूल रहती है तो भारतीय बाजार अपनी मजबूती बनाए रख सकता है।
डिस्क्लेमर
यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


