Ceat Share Price: टायर निर्माता कंपनी सीएट (CEAT) के शेयरों में 17 जुलाई को भारी बिकवाली देखने को मिली। कंपनी के जून 2026 तिमाही (Q1 FY27) के कमजोर नतीजों के बाद निवेशकों ने शेयर से दूरी बनाई, जिससे कारोबार के दौरान यह 9% से अधिक टूट गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी आई, लेकिन दोपहर 11:45 बजे तक भी शेयर करीब 7.65% की गिरावट के साथ 3,535 रुपये पर कारोबार कर रहा था। कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर करीब 96% घटकर सिर्फ 4 करोड़ रुपये रह गया, जबकि एक साल पहले इसी तिमाही में यह 112 करोड़ रुपये था।
96% गिरा कंपनी का नेट प्रॉफिट
सीएट ने जून तिमाही के लिए बेहद कमजोर मुनाफा दर्ज किया। कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट प्रॉफिट 112 करोड़ रुपये से घटकर केवल 4 करोड़ रुपये रह गया। यानी कंपनी के मुनाफे में 96.4% की बड़ी गिरावट आई।
हालांकि कारोबार के मोर्चे पर तस्वीर पूरी तरह नकारात्मक नहीं रही। कंपनी की ऑपरेशंस से आय (Revenue from Operations) सालाना आधार पर 22.4% बढ़कर 4,318 करोड़ रुपये पहुंच गई। इसका मतलब है कि बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी हुई, लेकिन बढ़ती लागत ने कमाई पर बड़ा असर डाला।
EBITDA और मार्जिन भी हुए कमजोर
कंपनी का ऑपरेटिंग प्रदर्शन भी दबाव में रहा।
- EBITDA: 365 करोड़ रुपये (सालाना आधार पर 5.7% की गिरावट)
- EBITDA Margin: 11% से घटकर 8.5%
मार्जिन में आई इस गिरावट ने साफ संकेत दिया कि लागत बढ़ने से कंपनी की लाभप्रदता प्रभावित हुई है।
आखिर क्यों टूटा मुनाफा?
सीएट के मुताबिक, जून तिमाही में सबसे बड़ा दबाव रॉ मैटेरियल की बढ़ती कीमतों से आया। प्राकृतिक रबर और अन्य कच्चे माल की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च काफी बढ़ गया।
इसके अलावा कंपनी ने पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भू-राजनीतिक तनाव को भी कारोबार पर असर डालने वाला प्रमुख कारण बताया। इन परिस्थितियों के कारण बिक्री बढ़ने के बावजूद कंपनी उस बढ़त को मुनाफे में बदलने में सफल नहीं रही।
1,205 करोड़ रुपये के निवेश को मिली मंजूरी
कमजोर तिमाही नतीजों के बावजूद कंपनी ने अपने दीर्घकालिक विस्तार की योजना जारी रखी है।
सीएट के बोर्ड ने नागपुर स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की क्षमता बढ़ाने के लिए 1,205 करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश (Capex) को मंजूरी दी है।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद प्लांट की उत्पादन क्षमता बढ़कर करीब 53,000 टायर प्रतिदिन हो जाएगी। कंपनी का मानना है कि भविष्य में बढ़ती मांग को देखते हुए यह निवेश लंबी अवधि में लाभदायक साबित होगा।
दूसरी टायर कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव
सीएट के कमजोर नतीजों का असर पूरे टायर सेक्टर में देखने को मिला। कारोबार के दौरान कई प्रमुख कंपनियों के शेयर लाल निशान में रहे।
- बालकृष्ण इंडस्ट्रीज का शेयर करीब 1.21% फिसला।
- अपोलो टायर्स में लगभग 0.68% की गिरावट रही।
- जेके टायर का शेयर करीब 4% तक टूट गया।
- टीवीएस श्रीचक्र के शेयर में 1.38% की कमजोरी दर्ज की गई।
- गुडईयर इंडिया के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली।
इससे साफ है कि निवेशकों ने पूरे टायर सेक्टर में फिलहाल सतर्क रुख अपनाया।
बाजार में रही मजबूती, लेकिन CEAT रहा दबाव में
दिलचस्प बात यह रही कि जिस दिन सीएट के शेयरों में भारी गिरावट आई, उसी दिन भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।
दोपहर 12 बजे के आसपास:
- निफ्टी 50: लगभग 194 अंक (0.81%) की तेजी के साथ 24,266 पर।
- सेंसेक्स: करीब 799 अंक (1%) उछलकर 77,989 पर।
- बैंक निफ्टी: लगभग 0.90% की बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा।
हालांकि मिडकैप इंडेक्स पर कुछ दबाव बना रहा।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
सीएट के तिमाही नतीजे बताते हैं कि केवल बिक्री बढ़ना पर्याप्त नहीं है। यदि कच्चे माल की लागत तेजी से बढ़ती है, तो उसका सीधा असर कंपनी की लाभप्रदता पर पड़ता है। फिलहाल निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाली तिमाहियों में रॉ मैटेरियल की कीमतें सामान्य होती हैं या नहीं और कंपनी अपने मार्जिन में कितनी तेजी से सुधार कर पाती है।
लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कंपनी का 1,205 करोड़ रुपये का विस्तार निवेश सकारात्मक संकेत माना जा सकता है, लेकिन निकट अवधि में लागत का दबाव और कमजोर मार्जिन शेयर के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।
अस्वीकरण: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश का कोई भी निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


