Ather Energy News: भारतीय इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर इंडस्ट्री की सबसे प्रेरणादायक सफलता की कहानियों में अब Ather Energy का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। मई 2025 में शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने वाली यह कंपनी आज करीब ₹50,000 करोड़ के मार्केट कैप तक पहुंच चुकी है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि कंपनी ने अपने शुरुआती पांच वर्षों तक एक भी स्कूटर की बिक्री नहीं की, लेकिन रिसर्च, टेक्नोलॉजी और लॉन्ग-टर्म विजन पर भरोसा बनाए रखा। आज Ather देश की तीसरी सबसे बड़ी इलेक्ट्रिक दोपहिया निर्माता कंपनी है और टीवीएस व बजाज जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ मजबूत प्रतिस्पर्धा कर रही है।
जब भारतीय ऑटो इंडस्ट्री को EV में भविष्य नहीं दिखता था
करीब 13 साल पहले भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर माहौल बिल्कुल अलग था। उस समय अधिकतर ऑटो कंपनियों का मानना था कि इलेक्ट्रिक स्कूटर का निर्माण आर्थिक रूप से व्यवहारिक नहीं है। अलग-अलग सप्लायर्स से पार्ट्स खरीदकर स्कूटर तैयार करने की लागत लगभग ₹5 लाख तक पहुंच जाती थी।
ऐसे दौर में आईआईटी मद्रास से इंजीनियरिंग करने वाले तरुण मेहता और स्वप्निल जैन ने इस चुनौती को अवसर के रूप में देखा। दोनों का मानना था कि यदि बैटरी, मोटर और इलेक्ट्रॉनिक्स को सही तरीके से डिजाइन और इंटीग्रेट किया जाए तो इलेक्ट्रिक वाहन आम लोगों की पहुंच में लाए जा सकते हैं।
Tesla के फाइनेंशियल्स से मिली सबसे बड़ी सीख
दिलचस्प बात यह है कि तरुण मेहता टेस्ला की कारों से ज्यादा उसके फाइनेंशियल मॉडल और निवेशकों की रिसर्च रिपोर्ट्स का अध्ययन करते थे।
उन्होंने पाया कि लिथियम-आयन सेल, मोटर और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स की वास्तविक लागत उतनी अधिक नहीं थी, जितनी बाजार में दिखाई देती थी। असली समस्या बड़े पैमाने पर उत्पादन और इंटीग्रेशन की थी। इसी समझ ने उन्हें विश्वास दिलाया कि यदि शुरुआत से अपनी तकनीक विकसित की जाए तो भविष्य में लागत काफी कम हो सकती है।
यही सोच आगे चलकर Ather Energy के बिजनेस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत बनी।
IIT मद्रास की लैब से शुरू हुआ सफर
तरुण मेहता और स्वप्निल जैन की मुलाकात आईआईटी मद्रास में इंजीनियरिंग डिजाइन की पढ़ाई के दौरान हुई। दोनों ने कई रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर साथ काम किया।
ग्रेजुएशन के बाद दोनों ने कुछ समय नौकरी की, लेकिन जल्द ही इस्तीफा देकर बैटरी पैक डेवलपमेंट पर फोकस करना शुरू कर दिया। उनका मानना था कि भारतीय इलेक्ट्रिक वाहनों की सबसे बड़ी कमजोरी बैटरी टेक्नोलॉजी है।
साल 2012 के अंत में दोनों फिर आईआईटी मद्रास लौटे। वे हॉस्टल में रहते थे और दिन-रात लैब में काम करते थे। महज छह से सात महीनों में उन्होंने अपना पहला बैटरी पैक और इलेक्ट्रिक स्कूटर का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया।
इसके बाद वर्ष 2013 में Ather Energy को IIT-M Research Park में आधिकारिक रूप से इनक्यूबेट किया गया। अगले वर्ष कंपनी को टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड और आईआईटी के पूर्व छात्र की ओर से करीब ₹45 लाख की शुरुआती फंडिंग मिली।
दो फैसलों ने बदल दी कंपनी की किस्मत
अक्टूबर 2013 में कंपनी ने दो ऐसे रणनीतिक फैसले लिए, जिन्होंने आगे चलकर Ather की पहचान तय कर दी।
पहला फैसला था कि कंपनी ऐसा इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाएगी जिसे आम लोग रोजमर्रा के उपयोग के लिए खरीदना चाहें। उस समय बाजार में उपलब्ध अधिकांश ई-स्कूटर कम स्पीड वाले होते थे और उन्हें मुख्य रूप से बुजुर्गों या बिना लाइसेंस वाले युवाओं के लिए डिजाइन किया जाता था।
दूसरा फैसला और भी साहसिक था। कंपनी ने स्कूटर में 7 इंच की टचस्क्रीन, इंटरनेट कनेक्टिविटी, सिम कार्ड और फुल सॉफ्टवेयर इकोसिस्टम देने का निर्णय लिया। उस समय दुनिया के किसी भी दोपहिया वाहन में इस तरह की तकनीक नहीं थी।
भारत जैसी धूल, बारिश और गर्मी वाली परिस्थितियों में ऐसी तकनीक को सफल बनाना बेहद चुनौतीपूर्ण और महंगा था, लेकिन यही फैसला Ather की सबसे बड़ी पहचान बन गया।
पांच साल तक नहीं बेचा एक भी स्कूटर
Ather Energy ने अपना पहला कमर्शियल स्कूटर 2018 में लॉन्च किया। यानी कंपनी की स्थापना के बाद शुरुआती पांच वर्षों तक उसकी बिक्री शून्य रही।
इस दौरान कंपनी लगातार रिसर्च, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और टेस्टिंग में लगी रही। टीम में बड़ी संख्या ऐसे युवा इंजीनियरों की थी जिन्होंने कॉलेज के दौरान रेस कारें बनाई थीं। उनके लिए आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहन विकसित करना सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि जुनून था।
कई निवेशकों ने कंपनी को सलाह दी कि वह अपनी तकनीक विकसित करने के बजाय किसी लोकप्रिय स्कूटर, जैसे Honda Activa, को इलेक्ट्रिक मोटर लगाकर बेचना शुरू कर दे। कुछ लोगों का मानना था कि भारत में हाई-टेक इलेक्ट्रिक स्कूटर का कोई बाजार नहीं है।
लेकिन संस्थापकों ने आसान रास्ता चुनने के बजाय अपने मूल विजन पर भरोसा बनाए रखा।
तेजी से बढ़ी बिक्री
कई वर्षों की तैयारी के बाद Ather की बिक्री में लगातार तेज़ी देखने को मिली।
- 2022: 54,769 यूनिट्स
- 2023: 1,11,812 यूनिट्स
- 2024: 1,36,513 यूनिट्स
- 2025: 2,14,985 यूनिट्स (57% की वृद्धि)
साल 2026 की पहली छमाही में ही कंपनी ने 1,69,020 वाहनों का रजिस्ट्रेशन दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 91% अधिक रहा।
जून 2026 तक Ather ग्राहकों को 7 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन डिलीवर कर चुकी थी। इनमें से आखिरी 2 लाख यूनिट्स केवल आठ महीनों में बेची गईं।
वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की कुल बिक्री 2,62,942 यूनिट्स रही, जो सालाना आधार पर 69% की बढ़ोतरी दर्शाती है।
बाजार में लगातार मजबूत हो रही हिस्सेदारी
Ather Energy ने वित्त वर्ष 2026 में भारतीय इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में 18.6% मार्केट शेयर हासिल किया।
कंपनी के लिए अक्टूबर 2025 सबसे मजबूत महीना रहा, जब उसने 26,713 यूनिट्स की बिक्री दर्ज की और बाजार हिस्सेदारी 19.6% तक पहुंच गई। इसी दौरान कंपनी ने बिक्री के मामले में Ola Electric को भी पीछे छोड़ दिया था।
Ather Rizta बनी सबसे बड़ी गेमचेंजर
कंपनी की सबसे सफल स्कूटर Ather Rizta साबित हुई, जिसे अप्रैल 2024 में लॉन्च किया गया था।
इस स्कूटर ने लॉन्च के केवल 11 महीनों में 1 लाख यूनिट्स की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया। दिसंबर 2025 तक इसकी बिक्री 2 लाख और अप्रैल 2026 तक 3 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई।
आज कंपनी की कुल मासिक बिक्री में Ather Rizta की हिस्सेदारी लगभग 76% है, जिससे यह Ather के ग्रोथ इंजन के रूप में उभरी है।
Ather Energy की सफलता से क्या सीख मिलती है?
Ather Energy की कहानी बताती है कि किसी भी तकनीकी कंपनी के लिए शुरुआती वर्षों की बिक्री से ज्यादा महत्वपूर्ण उसका विजन, रिसर्च और उत्पाद विकास होता है। पांच वर्षों तक बिना किसी कमर्शियल सेल्स के काम करने के बावजूद कंपनी ने अपने मूल सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। Tesla के बिजनेस मॉडल से मिली सीख, स्वदेशी तकनीक पर भरोसा और लगातार नवाचार ने Ather को आज भारत की सबसे सफल इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों में शामिल कर दिया है। यही कारण है कि सब्सिडी में कटौती और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बावजूद कंपनी लगातार अपनी बाजार हिस्सेदारी और ब्रांड वैल्यू दोनों को मजबूत करती जा रही है।


