Bedroll in Train: भारतीय रेलवे के एसी कोचों में यात्रियों को मिलने वाले कंबल, चादर, तकिये और तौलिये की चोरी रोकने के लिए अब तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। रेलवे ने बेडरोल मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के लिए कई स्तरों पर योजना तैयार की है। इसमें CCTV कैमरे, QR कोड टैगिंग और मोबाइल ऐप के जरिए निगरानी जैसे उपाय शामिल हैं।
रेलवे के अनुसार, एसी डिब्बों से लगातार गायब हो रहे लिनेन आइटम्स (Bedroll Items) से न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि इससे यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी असर पड़ता है। अब रेल मंत्रालय इस समस्या को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।
करोड़ों रुपये के बेडरोल हो चुके हैं गायब
ट्रेनों में बेडरोल चोरी का मामला सामने आने के बाद रेलवे ने इसे गंभीरता से लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच देशभर की ट्रेनों से करीब 1.27 करोड़ बेडरोल आइटम्स गायब हुए हैं। इनमें कंबल, चादर, तकिए और तौलिये शामिल हैं।
इन सामानों की अनुमानित कीमत करीब 104.51 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इतनी बड़ी संख्या में सामान गायब होने के बाद रेलवे ने इसकी रोकथाम के लिए नया एक्शन प्लान तैयार किया है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मांगा एक्शन प्लान
बेडरोल चोरी के मामले पर रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने अधिकारियों से रिपोर्ट और समाधान मांगा है।
हाल ही में रेलवे की “52 Reforms in 52 Weeks” पहल के दौरान जब इस मुद्दे पर सवाल पूछा गया तो रेल मंत्री ने अधिकारियों को इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।
रेलवे अब सिर्फ शिकायतों पर निर्भर रहने के बजाय तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है।
Coach Mitra App से होगी बेडरोल की निगरानी
रेलवे ने बेडरोल की ट्रैकिंग के लिए Coach Mitra मोबाइल ऐप का इस्तेमाल शुरू किया है। शुरुआत में इसका उपयोग कुछ रेलवे डिवीजनों में किया जा रहा है।
इस ऐप की मदद से एसी कोच में बेडरोल के वितरण और वापसी का रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से रखा जा रहा है।
इससे रेलवे को पता चल सकेगा:
- किस यात्री को कौन सा बेडरोल दिया गया।
- किस यात्री ने सामान वापस नहीं किया।
- कितने बेडरोल गायब हुए।
- किस कोच में सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।
इस डिजिटल रिकॉर्ड से चोरी की पहचान करना आसान होगा और जिम्मेदारी तय की जा सकेगी।
QR कोड से हर चादर और कंबल की होगी पहचान
रेलवे अब लिनेन आइटम्स पर QR कोड लगाने के प्रस्ताव पर भी विचार कर रहा है।
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद हर कंबल, चादर और तौलिये की एक अलग डिजिटल पहचान होगी।
QR कोड स्कैन करने पर रेलवे यह जानकारी हासिल कर सकेगा:
- बेडरोल कब खरीदा गया।
- इसकी इस्तेमाल अवधि कितनी है।
- इसे किस लॉन्ड्री में धोया गया।
- किस स्टोरेज डिपो से ट्रेन तक पहुंचा।
- किस कोच में यात्रियों को दिया गया।
इससे बेडरोल की पूरी लाइफ साइकल ट्रैक की जा सकेगी और चोरी या गड़बड़ी की स्थिति में जिम्मेदार व्यक्ति तक पहुंचना आसान होगा।
AI वाले CCTV कैमरों से होगी निगरानी
रेलवे के कई डिवीजन अब ट्रेनों और कोचों में CCTV कैमरे लगाने की दिशा में काम कर रहे हैं।
उत्तर रेलवे के अंबाला डिवीजन ने चोरी रोकने के लिए एसी कोचों में CCTV निगरानी बढ़ाने की योजना बनाई है। इन कैमरों में AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।
AI कैमरे यह पहचानने में मदद कर सकते हैं कि:
- कोई यात्री बेडरोल का गलत इस्तेमाल तो नहीं कर रहा।
- कोई व्यक्ति चादर या कंबल बैग में रखकर तो नहीं ले जा रहा।
- किसी कोच में असामान्य गतिविधि तो नहीं हो रही।
इससे रेलवे को चोरी रोकने के साथ-साथ यात्रियों को बेहतर सुविधा देने में मदद मिलेगी।
बीकानेर डिवीजन में सबसे ज्यादा चोरी
रिपोर्ट्स के अनुसार, बेडरोल चोरी की घटनाएं कुछ रेलवे डिवीजनों में ज्यादा सामने आई हैं। इनमें बीकानेर डिवीजन का नाम भी सामने आया है।
यही वजह है कि वहां बेडरोल वितरण और वापसी की प्रक्रिया को डिजिटल निगरानी से जोड़ा जा रहा है।
रेलवे का लक्ष्य है कि आने वाले समय में हर एसी कोच में बेडरोल की पूरी ट्रैकिंग व्यवस्था लागू की जाए।
यात्रियों पर भी पड़ेगी जिम्मेदारी
रेलवे की इस नई व्यवस्था से यात्रियों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। अब बेडरोल का रिकॉर्ड डिजिटल होने के कारण सामान वापस नहीं करने वाले यात्रियों की पहचान आसान हो सकती है।
रेलवे लगातार यात्रियों से अपील करता रहा है कि ट्रेन में मिलने वाली सुविधाओं का इस्तेमाल करें, लेकिन उन्हें अपने साथ न ले जाएं। क्योंकि ये सामान रेलवे की संपत्ति होते हैं और इनका खर्च आखिरकार व्यवस्था पर ही पड़ता है।
निष्कर्ष: तकनीक से बदलेगा रेलवे का बेडरोल सिस्टम
कंबल, चादर और तौलियों की चोरी रोकने के लिए रेलवे अब पारंपरिक तरीकों के बजाय डिजिटल निगरानी व्यवस्था अपना रहा है।
Coach Mitra App, QR Code Tracking और AI Enabled CCTV कैमरों की मदद से रेलवे बेडरोल की चोरी कम करने और यात्रियों को बेहतर सुविधा देने की कोशिश कर रहा है। आने वाले समय में रेलवे के एसी कोचों में बेडरोल मैनेजमेंट पूरी तरह तकनीक आधारित हो सकता है।


