India-UK FTA: भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement-FTA) आज से लागू हो गया है। इस समझौते को भारतीय निर्यातकों (Exporters) के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। खासकर टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोडक्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और फार्मा सेक्टर को इससे बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को ब्रिटेन के 949 अरब डॉलर के आयात बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और चीन तथा बांग्लादेश जैसे देशों को कड़ी चुनौती देने का मौका देगा।
Highlights
- भारत-यूके FTA आज से आधिकारिक तौर पर लागू।
- दोनों देशों के बीच व्यापार को 60 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य।
- यूके के 949 अरब डॉलर के इंपोर्ट मार्केट में भारत की हिस्सेदारी अभी 2% से भी कम।
- टेक्सटाइल, फार्मा, फूड, लेदर और इंजीनियरिंग सेक्टर को सबसे बड़ा फायदा।
- स्कॉच व्हिस्की और ब्रिटिश कारें भारत में धीरे-धीरे सस्ती होंगी।
- भारतीय प्रोफेशनल्स और सर्विस सेक्टर के लिए नए अवसर खुलेंगे।
भारत और ब्रिटेन के व्यापारिक रिश्तों में नया अध्याय
भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद आखिरकार Free Trade Agreement (FTA) लागू हो गया है। वर्तमान में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 60 अरब डॉलर का है। सरकार का लक्ष्य इसे अगले 3 से 4 वर्षों में 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है।
कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल के अनुसार, यह समझौता भारतीय कंपनियों को ब्रिटेन के विशाल आयात बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा और निर्यात में तेज बढ़ोतरी की संभावना पैदा करेगा।
ब्रिटेन के $949 अरब के बाजार में भारत के लिए सुनहरा मौका
ब्रिटेन हर साल लगभग 949 अरब डॉलर का आयात करता है, लेकिन इसमें भारत की हिस्सेदारी अभी 2 प्रतिशत से भी कम है। FTA लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क (Import Duty) में भारी कमी आएगी, जिससे भारतीय सामान ब्रिटेन में अधिक किफायती और प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
अब तक जिन क्षेत्रों में चीन, बांग्लादेश और अन्य एशियाई देशों का दबदबा था, वहां भारतीय कंपनियां अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश करेंगी।
किन सेक्टरों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा?
FTA के तहत ब्रिटेन ने 117 उत्पादों को छोड़कर लगभग सभी भारतीय उत्पादों पर जीरो टैरिफ की व्यवस्था लागू की है। इससे कई उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा।
1. टेक्सटाइल और गारमेंट
भारत का टेक्सटाइल उद्योग लंबे समय से ब्रिटिश बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा था। अब जीरो ड्यूटी मिलने से भारतीय कपड़ों की कीमत प्रतिस्पर्धी होगी और निर्यात बढ़ने की संभावना है।
2. लेदर और फुटवियर
चमड़े के उत्पाद और फुटवियर बनाने वाली भारतीय कंपनियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। इससे इस उद्योग में रोजगार बढ़ने की उम्मीद है।
3. फूड प्रोडक्ट्स
भारतीय मसाले, प्रोसेस्ड फूड, चाय, कॉफी और अन्य खाद्य उत्पादों की ब्रिटेन में मांग बढ़ सकती है क्योंकि आयात शुल्क कम होगा।
4. इंजीनियरिंग गुड्स
मशीनरी, ऑटो कंपोनेंट्स और इंजीनियरिंग उत्पाद बनाने वाली कंपनियों के लिए भी ब्रिटिश बाजार के दरवाजे और अधिक खुल जाएंगे।
5. फार्मा सेक्टर
भारत दुनिया के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में शामिल है। FTA से भारतीय दवा कंपनियों को ब्रिटेन में निर्यात बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
भारत भी हजारों उत्पादों पर घटाएगा ड्यूटी
इस समझौते के तहत भारत ने भी 12,000 से अधिक उत्पादों में से करीब 89.5% उत्पादों पर आयात शुल्क घटाने या समाप्त करने पर सहमति दी है।
- 64% से अधिक उत्पादों को तुरंत ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी।
- बाकी उत्पादों पर चरणबद्ध तरीके से शुल्क कम किया जाएगा।
- करीब 536 उत्पादों पर धीरे-धीरे टैरिफ में कटौती होगी।
हालांकि डेयरी, अनाज और कुछ संवेदनशील कृषि उत्पादों को इस समझौते से बाहर रखा गया है ताकि घरेलू किसानों के हित सुरक्षित रह सकें।
इलेक्ट्रिक वाहनों को फिलहाल मिली छूट
सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को शुरुआती पांच वर्षों तक इस समझौते से बाहर रखा है। इसका उद्देश्य घरेलू ईवी उद्योग को प्रतिस्पर्धा के लिए पर्याप्त समय देना है।
भारतीय आईटी और सर्विस सेक्टर के लिए भी खुलेंगे नए रास्ते
FTA का लाभ केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। डिजिटल सेवाओं और प्रोफेशनल सर्विसेज के लिए भी कई नए अवसर खुलेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत में Global Capability Centres (GCCs) की संख्या तेजी से बढ़ सकती है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में अपने टेक्नोलॉजी और बैक-ऑफिस ऑपरेशन स्थापित करने में रुचि दिखा रही हैं।
स्कॉच व्हिस्की और ब्रिटिश कारें होंगी सस्ती
FTA का फायदा भारतीय उपभोक्ताओं को भी मिलेगा।
- स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क 150% से घटाकर पहले 75% किया जाएगा।
- अगले 10 वर्षों में यह शुल्क घटकर 40% रह जाएगा।
- ब्रिटिश कारों पर लगने वाला 110% टैरिफ चरणबद्ध तरीके से घटाकर 10% तक लाया जाएगा।
- हालांकि यह छूट निर्धारित कोटा प्रणाली के तहत ही मिलेगी।
भारतीय प्रोफेशनल्स को मिलेगा बड़ा फायदा
इस समझौते में Double Contribution Convention भी शामिल है। इसके तहत भारत से ब्रिटेन भेजे गए कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को पांच वर्षों तक ब्रिटेन के सोशल सिक्योरिटी सिस्टम में दोहरा योगदान नहीं देना होगा।
अभी भारतीय कर्मचारियों और कंपनियों को नेशनल इंश्योरेंस के तहत वेतन का लगभग 23% योगदान देना पड़ता है।
सरकार के अनुसार इस व्यवस्था से:
- हर साल लगभग 600 मिलियन डॉलर की बचत होगी।
- 75,000 से अधिक भारतीय कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
- 900 से ज्यादा कंपनियों को राहत मिलेगी।
चीन और बांग्लादेश के लिए बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
ब्रिटेन के बाजार में अब तक चीन और बांग्लादेश का मजबूत दबदबा रहा है, विशेषकर टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में। FTA लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों पर शुल्क कम होने से भारतीय कंपनियां कीमत और गुणवत्ता दोनों के आधार पर बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकेंगी।
यदि भारतीय उद्योग इस अवसर का सही उपयोग करते हैं, तो आने वाले वर्षों में ब्रिटेन में भारत की निर्यात हिस्सेदारी में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
निष्कर्ष
भारत-यूके FTA केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं बल्कि दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। इससे भारतीय निर्यातकों, आईटी कंपनियों, प्रोफेशनल्स और उपभोक्ताओं सभी को अलग-अलग स्तर पर फायदा मिलने की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो भारत वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।


