Russia-India Trade: भारत और रूस के बीच आर्थिक रिश्ते नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। इसी दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रूस का प्रतिष्ठित इंटरनेशनल इंडस्ट्रियल ट्रेड फेयर INNOPROM पहली बार भारत में आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन 9 से 11 सितंबर तक होगा और इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, औद्योगिक सहयोग और निवेश को नई गति देना है। ब्रिक्स समिट से पहले होने वाला यह कार्यक्रम भारत-रूस आर्थिक साझेदारी को और मजबूत करने का अहम मंच माना जा रहा है।
पहली बार भारत में होगा रूस का INNOPROM ट्रेड फेयर
रूस का INNOPROM International Industrial Trade Fair दुनिया के प्रमुख औद्योगिक आयोजनों में गिना जाता है। अब इसका भारतीय संस्करण पहली बार आयोजित किया जा रहा है। इस मेले में भारत और रूस की सरकारी एजेंसियों के अलावा बड़ी औद्योगिक कंपनियां, निवेशक और नीति निर्माता हिस्सा लेंगे।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच नई साझेदारियां विकसित करना, संयुक्त निवेश परियोजनाओं को बढ़ावा देना और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना है।
इन सेक्टरों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस
INNOPROM इंडिया में कई रणनीतिक क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें शामिल हैं:
- फार्मास्यूटिकल्स
- मैकेनिकल इंजीनियरिंग
- केमिकल इंडस्ट्री
- क्रिटिकल मिनरल्स
- मेटलर्जी
- एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग
- ग्रीन एनर्जी
- इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन
- फूड प्रोसेसिंग
- स्किल्ड वर्कफोर्स एक्सचेंज
विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों के उद्योगों को नई तकनीक, निवेश और बाजार तक पहुंच मिलेगी।
रूस के उप प्रधानमंत्री भी हो सकते हैं शामिल
जानकारी के अनुसार, रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंतुरोव इस आयोजन में हिस्सा ले सकते हैं। वह भारत-रूस आर्थिक सहयोग से जुड़े मामलों की निगरानी करते हैं।
यह आयोजन दिसंबर 2025 में नई दिल्ली में आयोजित भारत-रूस बिजनेस फोरम के दौरान लिए गए फैसलों को आगे बढ़ाने का भी माध्यम बनेगा। दोनों देश द्विपक्षीय निवेश संरक्षण संधि (Bilateral Investment Protection Agreement) पर भी काम कर रहे हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हो सकता है।
बायोकेमिकल इंडस्ट्री में भी बढ़ेगा सहयोग
रूस में आयोजित हालिया INNOPROM प्रदर्शनी के दौरान भारत के राजदूत विनय कुमार ने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की जा रही है।
उन्होंने जिन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी, उनमें शामिल हैं:
- ग्रीन एनर्जी
- क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स
- सूचना प्रौद्योगिकी (IT)
- फूड प्रोसेसिंग
- एग्रो-इंडस्ट्रियल सेक्टर
- इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन
इसके अलावा भारत और रूस बायोकेमिकल इंडस्ट्री के लिए संयुक्त रणनीति तैयार करने पर भी विचार कर रहे हैं।
₹6.72 लाख करोड़ के व्यापार का लक्ष्य
भारत और रूस के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। पिछले तीन महीनों के व्यापारिक रुझानों के आधार पर दोनों देशों को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 में द्विपक्षीय व्यापार 70 अरब डॉलर (करीब ₹6.72 लाख करोड़) तक पहुंच सकता है।
इसके साथ ही दोनों देशों ने 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है।
नॉन-टैरिफ बाधाएं हटाने पर भी जोर
भारत और रूस केवल व्यापार बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि व्यापार में आने वाली गैर-शुल्क (Non-Tariff) बाधाओं को कम करने पर भी काम कर रहे हैं।
खास तौर पर कृषि और खाद्य उत्पादों के निर्यात को आसान बनाने के लिए नियमों को सरल बनाने पर चर्चा चल रही है। इससे दोनों देशों के निर्यातकों को बड़ा फायदा मिल सकता है।
FTA पर भी तेज हुई बातचीत
भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत भी आगे बढ़ रही है।
बताया गया है कि हाल ही में मॉस्को में दूसरे दौर की वार्ता पूरी हुई, जिसमें व्यापार और निवेश को आसान बनाने के कई मुद्दों पर चर्चा हुई।
यदि यह समझौता होता है तो भारत को रूस समेत यूरेशियन बाजारों तक बेहतर पहुंच मिल सकती है, जबकि रूस को भारतीय बाजार में व्यापार बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
संयुक्त परियोजनाओं पर बनी सहमति
हाल ही में मॉस्को में भारत-रूस जॉइंट वर्किंग ग्रुप की बैठक भी आयोजित हुई। इसमें दोनों देशों ने निजी कंपनियों को निवेश के लिए प्रोत्साहित करने और कई नई संयुक्त परियोजनाएं शुरू करने पर सहमति जताई।
इन परियोजनाओं का फोकस रहेगा:
- एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग
- ग्रीन हाइड्रोजन
- एनर्जी स्टोरेज
- माइनिंग
- मेटलर्जी
- क्रिटिकल मिनरल्स
- उभरती हुई तकनीकें
भारत के लिए क्यों अहम है यह आयोजन?
भारत तेजी से वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में रूस के साथ औद्योगिक सहयोग बढ़ने से निवेश, तकनीक और सप्लाई चेन मजबूत हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि INNOPROM इंडिया न केवल दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई गति देगा, बल्कि भारतीय उद्योगों को रूसी तकनीक, ऊर्जा और खनिज संसाधनों तक बेहतर पहुंच भी दिला सकता है। यदि 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य हासिल होता है, तो यह भारत-रूस आर्थिक साझेदारी के इतिहास का सबसे बड़ा अध्याय साबित हो सकता है।


