India Semiconductor Mission 2.0: भारत सरकार जल्द ही इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0 लॉन्च कर सकती है। सूत्रों के अनुसार, मिशन से जुड़े सभी प्रमुख मुद्दे सुलझ चुके हैं और अब इसे जल्द ही केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिलने की संभावना है। करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण का पूरा इकोसिस्टम विकसित करना, आयात पर निर्भरता घटाना और देश को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है।
Highlights
- ISM 2.0 की अनुमानित लागत ₹1.25 लाख करोड़
- चिप मैन्युफैक्चरिंग, डिजाइन और स्किल डेवलपमेंट पर रहेगा फोकस
- गैस, इंगॉट्स और अन्य रॉ मैटेरियल के घरेलू उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
- मिशन की अवधि 5 साल से बढ़ाकर 12 साल किए जाने की तैयारी
- 2030 तक घरेलू चिप मांग का 75% भारत में ही पूरा करने का लक्ष्य
- कैबिनेट मंजूरी के बाद जल्द हो सकता है मिशन का रोलआउट
ISM 2.0 को जल्द मिल सकती है कैबिनेट की मंजूरी
भारत सरकार सेमीकंडक्टर सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए India Semiconductor Mission 2.0 को अंतिम रूप देने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक, मिशन के बजट और नीतिगत पहलुओं पर सहमति बन चुकी है और अब इसे जल्द ही कैबिनेट के सामने मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।
यह मिशन भारत को केवल चिप असेंबली तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि पूरे सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।
₹1.25 लाख करोड़ की योजना में किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस?
ISM 2.0 का कुल आकार लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये बताया जा रहा है। इस मिशन में केवल चिप फैक्ट्री लगाने पर ही नहीं, बल्कि पूरे इकोसिस्टम के विकास पर जोर दिया जाएगा।
मुख्य फोकस क्षेत्रों में शामिल हैं:
- सेमीकंडक्टर चिप मैन्युफैक्चरिंग
- चिप डिजाइन और रिसर्च
- स्किल डेवलपमेंट और प्रशिक्षित मानव संसाधन
- गैस, इंगॉट्स और अन्य रॉ मैटेरियल का घरेलू उत्पादन
- सप्लाई चेन को मजबूत बनाना
- एडवांस पैकेजिंग और टेस्टिंग सुविधाओं का विस्तार
सरकार का मानना है कि मजबूत सप्लाई चेन के बिना सेमीकंडक्टर उद्योग आत्मनिर्भर नहीं बन सकता।
क्यों जरूरी है पूरा सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम?
सेमीकंडक्टर उद्योग केवल चिप बनाने तक सीमित नहीं होता। इसके लिए सिलिकॉन इंगॉट्स, विशेष गैसें, केमिकल्स, वेफर, पैकेजिंग, टेस्टिंग और हाई-टेक मशीनरी की जरूरत होती है।
इसी वजह से ISM 2.0 में इन सभी सहायक उद्योगों को विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि भारत विदेशी आपूर्ति पर कम निर्भर रहे और घरेलू उद्योग को मजबूती मिले।
ISM 1.0 से क्या मिला अनुभव?
सरकार ने पहले चरण यानी ISM 1.0 के तहत लगभग 70,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन पैकेज शुरू किया था।
इस मिशन के तहत:
- लगभग 12 परियोजनाओं को मंजूरी मिली।
- इनमें से 3 परियोजनाओं ने उत्पादन शुरू कर दिया है।
- कई अन्य प्रोजेक्ट निर्माण और स्थापना के चरण में हैं।
सरकार अब ISM 1.0 के अनुभवों के आधार पर दूसरे चरण को और अधिक व्यापक बनाने जा रही है।
मिशन की अवधि बढ़ाकर 12 साल करने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, ISM 2.0 की समय सीमा को 5 वर्ष से बढ़ाकर 12 वर्ष किया जा सकता है।
लंबी अवधि मिलने से कंपनियों को बड़े निवेश, अत्याधुनिक तकनीक लाने और उत्पादन क्षमता विकसित करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा। इससे वैश्विक कंपनियों का भरोसा भी बढ़ने की उम्मीद है।
2030 तक घरेलू मांग का 75% भारत में पूरा करने का लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक भारत अपनी घरेलू सेमीकंडक्टर मांग का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा देश में ही तैयार करे।
यदि यह लक्ष्य हासिल होता है तो:
- चिप आयात पर निर्भरता कम होगी।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण क्षेत्र को मजबूती मिलेगी।
- भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन में बड़ी भूमिका निभा सकेगा।
इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की बढ़ती मांग से मिलेगा बड़ा फायदा
भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रॉनिक्स बाजारों में शामिल हो चुका है।
वर्तमान में:
- देश में 65 करोड़ से अधिक स्मार्टफोन यूजर्स हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का वार्षिक उत्पादन 12 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
- AI आधारित सिस्टम, डेटा सेंटर, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है।
- इन सभी क्षेत्रों में अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर चिप्स की आवश्यकता होती है।
ऐसे में घरेलू स्तर पर चिप निर्माण क्षमता बढ़ाना भारत की तकनीकी और आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
नई कंपनियों के लिए खुलेंगे अवसर
ISM 2.0 के लागू होने के बाद कई नई भारतीय और विदेशी कंपनियां भारत में निवेश कर सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इस मिशन से:
- हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा।
- लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हो सकते हैं।
- इंजीनियरिंग और डिजाइन सेक्टर में नए अवसर बनेंगे।
- भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के लिए आकर्षक निवेश गंतव्य बन सकता है।
निष्कर्ष
India Semiconductor Mission 2.0 भारत के तकनीकी और औद्योगिक विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। लगभग ₹1.25 लाख करोड़ की इस योजना के जरिए सरकार केवल चिप फैक्ट्रियां स्थापित नहीं करना चाहती, बल्कि पूरे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने की रणनीति पर काम कर रही है। यदि मिशन तय लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ता है, तो 2030 तक भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी मजबूत पहचान बनाने के साथ-साथ आयात पर निर्भरता भी काफी हद तक कम कर सकता है।
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