Market View: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और रुपये की कमजोरी ने भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। निफ्टी 24,100 के नीचे फिसल गया, जबकि बैंक निफ्टी में 750 अंकों तक की गिरावट देखने को मिली। ऐसे माहौल में CNBC-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल का कहना है कि ट्रेडर्स को जल्दबाजी से बचते हुए IT और फार्मा सेक्टर पर फोकस करना चाहिए। वहीं निवेशकों के लिए गिरावट को अवसर के रूप में देखने की सलाह दी गई है।
बाजार पर क्यों बढ़ा दबाव?
ग्लोबल मार्केट में पश्चिम एशिया के तनाव और ब्रेंट क्रूड के 85 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर हुआ और 22 मई के बाद पहली बार एक डॉलर की कीमत 96 रुपये के पार पहुंच गई।
इसका सीधा असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर देखने को मिला। BPCL, IOC और HPCL के शेयरों में 2 से 3 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं दूसरी ओर रियल्टी, सरकारी बैंक, ऑटो और डिफेंस सेक्टर में तेज बिकवाली देखने को मिली। NBFC, कैपिटल गुड्स और मिडकैप शेयरों में भी दबाव रहा, जबकि फार्मा और मेटल सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।
अनुज सिंघल की राय: घबराएं नहीं, रणनीति से करें ट्रेड
अनुज सिंघल के मुताबिक मौजूदा बाजार में सबसे बड़ी जरूरत धैर्य और सही जोखिम प्रबंधन की है।
उनका कहना है कि:
- बिना हेजिंग के ओवरनाइट पोजिशन लेने से बचें।
- जल्दबाजी में किसी भी ट्रेड में एंट्री न करें।
- बाजार में रिकवरी की संभावना बनी हुई है, लेकिन बैंक निफ्टी का व्यवहार बेहद अहम रहेगा।
- यदि रिकवरी आती है तो सबसे पहले IT सेक्टर में मजबूती देखने को मिल सकती है।
उनके अनुसार आज का सबसे महत्वपूर्ण जोन 23,900 से 23,950 रहेगा।
क्यों IT और फार्मा पर है एक्सपर्ट का भरोसा?
पिछले एक सप्ताह से IT सेक्टर पर सकारात्मक नजरिया बना हुआ है। HCL Tech के नतीजों के बाद भी सेक्टर में मजबूती बनी हुई है।
अनुज सिंघल का मानना है कि:
- IT सेक्टर बाजार से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
- फार्मा शेयरों में भी डिफेंसिव खरीदारी जारी रह सकती है।
- यदि बाजार में गैपडाउन के बाद रिकवरी आती है तो IT सबसे पहले तेजी दिखा सकता है।
बैंक निफ्टी पर रहें विशेष नजर
बैंकिंग शेयर इस समय बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
विशेष रूप से HDFC Bank और ICICI Bank पिछले कुछ सत्रों से मजबूती दिखा रहे हैं। विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली कम होने के संकेत भी बैंकिंग शेयरों के लिए सकारात्मक माने जा रहे हैं।
बैंक निफ्टी के अहम स्तर
- पहला सपोर्ट: 57,700–57,800 (10 DEMA)
- मजबूत सपोर्ट: 57,200–57,300 (20 DEMA)
- पहला रेजिस्टेंस: 58,100–58,200
- बड़ा रेजिस्टेंस: 58,500–58,600
निफ्टी के लिए महत्वपूर्ण लेवल
एक्सपर्ट के मुताबिक फिलहाल निफ्टी 23,800 से 24,300 की रेंज में कारोबार कर सकता है।
सपोर्ट
- 23,950–24,000
- 23,800–23,850 (सबसे मजबूत सपोर्ट)
रेजिस्टेंस
- 24,150–24,200
- 24,250–24,350
जब तक निफ्टी 24,300 के ऊपर नहीं निकलता, तब तक बड़ी तेजी की संभावना सीमित रहेगी। वहीं 23,800 का स्तर टूटने पर बिकवाली और तेज हो सकती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ा विवाद
बाजार की कमजोरी के पीछे पश्चिम एशिया की घटनाएं भी बड़ी वजह हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुला रहेगा और अमेरिका इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। साथ ही उन्होंने कार्गो शिपमेंट पर 20 फीसदी टोल लगाने की बात कही।
इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा हमेशा से ईरान करता आया है और यदि कोई सुरक्षा देगा तो उसे उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
इस बयानबाजी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिल रहा है।
ट्रेडर्स के लिए आज की रणनीति
मौजूदा बाजार में ट्रेडर्स को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
- IT और फार्मा सेक्टर पर फोकस रखें।
- पहले से ट्रेड तय करने की बजाय बाजार की चाल देखकर निर्णय लें।
- गैपडाउन टिकने पर शॉर्ट ट्रेड की तैयारी रखें।
- रिकवरी आने पर कॉन्ट्रा लॉन्ग के अवसर तलाशें।
- बिना हेजिंग के ओवरनाइट पोजिशन लेने से बचें।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
अनुज सिंघल का मानना है कि लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने की जरूरत नहीं है।
गिरावट के दौरान अच्छी गुणवत्ता वाले शेयरों में धीरे-धीरे निवेश बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से इंडिगो, एशियन पेंट्स और पिडिलाइट जैसे मजबूत बिजनेस वाले शेयरों में SIP जारी रखने की सलाह दी।
इसके अलावा अच्छे बैंकिंग, ऑटो, NBFC और रियल एस्टेट कंपनियों में भी गिरावट पर चरणबद्ध निवेश किया जा सकता है। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में केवल चुनिंदा कंपनियों पर ध्यान देना बेहतर रहेगा।
अर्निंग्स सीजन रहेगा सबसे बड़ा ट्रिगर
आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल नतीजों पर नहीं बल्कि कंपनियों की ग्रोथ गाइडेंस और मैनेजमेंट कमेंट्री पर भी नजर रखनी चाहिए। जिन कंपनियों की भविष्य की कमाई का अनुमान मजबूत रहेगा, उनमें बाजार कमजोरी के बावजूद निवेश के अवसर मिल सकते हैं।
डिस्क्लेमर
NewsJagran.in पर प्रकाशित बाजार संबंधी विश्लेषण और राय विभिन्न मार्केट एक्सपर्ट्स के निजी विचार हैं। वेबसाइट या प्रबंधन इनके लिए उत्तरदायी नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। कोई भी निवेश या ट्रेडिंग निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


