Bank Nifty Trend: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार 14 जुलाई को बैंकिंग सेक्टर पर दबाव देखने को मिला। बैंक निफ्टी इंडेक्स में 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और इसके साथ ही लगातार तीन कारोबारी दिनों से जारी तेजी का सिलसिला थम गया। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई, जिसका असर बैंकिंग शेयरों पर देखने को मिला।
बैंक निफ्टी में गिरावट के दौरान केनरा बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक के शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी रही। वहीं स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), फेडरल बैंक और कई अन्य वित्तीय शेयर भी लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात भारतीय बैंकिंग शेयरों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
Bank Nifty में गिरावट की बड़ी वजह क्या रही?
14 जुलाई को ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड कुछ समय के लिए 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जो 17 जून के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया जा रहा है।
कच्चे तेल की कीमतों में यह तेजी अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों और शिपिंग प्रतिबंधों को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे वैश्विक बाजारों में जोखिम बढ़ गया है।
तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर पड़ता है। इससे:
- महंगाई बढ़ने का दबाव बन सकता है।
- रुपये पर कमजोरी का असर पड़ सकता है।
- बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी हो सकती है।
- बैंकों की ट्रेजरी आय प्रभावित हो सकती है।
इन्हीं चिंताओं के चलते बैंकिंग शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।
Canara Bank, Kotak Bank और AU Small Finance Bank में सबसे ज्यादा गिरावट
बैंक निफ्टी की गिरावट में कुछ प्रमुख बैंकिंग शेयरों ने सबसे ज्यादा योगदान दिया।
- केनरा बैंक के शेयरों में करीब 2% की गिरावट आई।
- कोटक महिंद्रा बैंक लगभग 1.6% तक कमजोर हुआ।
- AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में करीब 1.3% की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा:
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
- फेडरल बैंक
- श्रीराम फाइनेंस
- बजाज फाइनेंस
- बजाज फिनसर्व
जैसे वित्तीय शेयरों में भी 1-2% तक दबाव देखने को मिला।
दोपहर करीब 1:25 बजे बैंक निफ्टी करीब 1.15% की गिरावट के साथ 57,475 के आसपास कारोबार कर रहा था।
Bank Nifty Technical Outlook: आगे क्या हो सकता है?
मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार बैंक निफ्टी पिछले कुछ हफ्तों से एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। अब इंडेक्स के लिए कुछ अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल महत्वपूर्ण हो गए हैं।
58,700 का स्तर बनेगा बड़ी चुनौती
बजाज ब्रोकिंग रिसर्च के अनुसार बैंक निफ्टी के लिए ऊपर की तरफ 58,700 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है।
अगर इंडेक्स इस स्तर के ऊपर मजबूती के साथ बंद होता है तो:
- मौजूदा कंसोलिडेशन खत्म हो सकता है।
- नई तेजी की शुरुआत हो सकती है।
- बैंक निफ्टी 59,300 और फिर 60,000 के स्तर की ओर बढ़ सकता है।
हालांकि अगर बैंक निफ्टी 58,700 के ऊपर जाने में सफल नहीं होता है तो बाजार में मौजूदा दायरे वाली चाल जारी रह सकती है।
57,400-57,500 पर मजबूत सपोर्ट
नीचे की तरफ बैंक निफ्टी के लिए 57,400-57,500 का क्षेत्र महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन माना जा रहा है।
यह स्तर इसलिए अहम है क्योंकि:
- यह हालिया गैप-अप जोन के करीब है।
- सोमवार के निचले स्तर के आसपास है।
- यहां खरीदारों की सक्रियता बढ़ सकती है।
अगर यह सपोर्ट टूटता है तो अगला बड़ा सपोर्ट 56,500 के आसपास देखा जा सकता है।
इस स्तर पर:
- 20 हफ्ते का EMA
- 50 हफ्ते का EMA
- पिछले सप्ताह का लो
एक साथ मौजूद हैं, जिससे यह मजबूत डिमांड जोन बन जाता है।
LKP Securities की राय: सपोर्ट के ऊपर खरीदारी की रणनीति
LKP Securities के टेक्निकल एनालिस्ट वत्सल भुवा के अनुसार बैंक निफ्टी के लिए फिलहाल 57,500 तत्काल सपोर्ट है।
वहीं अगला महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन 57,200 पर मौजूद है।
ऊपर की तरफ:
- 58,500 मुख्य रेजिस्टेंस है।
- इसके ऊपर ब्रेकआउट आने पर बैंकिंग शेयरों में नई तेजी देखने को मिल सकती है।
उनका कहना है कि जब तक बैंक निफ्टी अपने सपोर्ट लेवल के ऊपर बना रहता है, ट्रेडर्स गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं।
VK विजयकुमार की चेतावनी: बाजार पर बढ़ सकता है दबाव
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार का कहना है कि भारतीय बाजार के सामने कुछ पुरानी चुनौतियां फिर से उभर रही हैं।
उनके अनुसार अमेरिका-ईरान तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें 84-85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई हैं। अगर तेल की कीमतों में तेजी आगे भी जारी रहती है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि:
- भुगतान संतुलन (Balance of Payment) पर दबाव बढ़ सकता है।
- रुपये में कमजोरी आ सकती है।
- विदेशी निवेश प्रभावित हो सकता है।
इसके अलावा अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड का बढ़कर 4.61% तक पहुंचना भी चिंता का विषय है।
ज्यादा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिकी बाजारों की ओर आकर्षित हो सकते हैं।
निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए?
मौजूदा बाजार माहौल में निवेशकों को इन संकेतों पर नजर रखनी होगी:
1. कच्चे तेल की कीमतें
अगर क्रूड ऑयल लगातार महंगा होता है तो भारत की महंगाई और चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है।
2. रुपये की चाल
डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी विदेशी निवेश और कंपनियों की लागत को प्रभावित कर सकती है।
3. ग्लोबल मार्केट संकेत
अमेरिका-ईरान तनाव और अमेरिकी ब्याज दरों से बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है।
4. बैंकिंग शेयरों के नतीजे
आने वाले तिमाही नतीजे बैंकिंग सेक्टर की मजबूती को तय करेंगे।
Bank Nifty Outlook: फिलहाल सावधानी जरूरी
बैंक निफ्टी में तीन दिनों की तेजी के बाद आई गिरावट ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। हालांकि इंडेक्स अभी भी महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के ऊपर बना हुआ है।
अगर बैंक निफ्टी 57,500 के ऊपर टिकता है तो तेजी की संभावना बनी रह सकती है। वहीं 58,500-58,700 के ऊपर ब्रेकआउट आने पर बाजार में नई रैली देखने को मिल सकती है।
दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक तनाव में बढ़ोतरी बाजार के लिए जोखिम बनी हुई है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय बाजार के संकेतों पर नजर रखनी चाहिए।
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