Crude Oil Price: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब ग्लोबल कमोडिटी मार्केट पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच फिर बढ़े टकराव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अनिश्चितता के कारण सोमवार 13 जुलाई को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 4% से ज्यादा बढ़कर $79 प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जबकि अमेरिकी क्रूड WTI भी $74 प्रति बैरल के ऊपर कारोबार करता नजर आया।
तेल बाजार में यह तेजी इस आशंका के कारण आई है कि अगर हॉर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस की सप्लाई होती है।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी बाजार की चिंता
रिपोर्ट्स के मुताबिक, साइप्रस के एक कमर्शियल जहाज पर हुए हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। अमेरिका ने ईरान से जुड़े कई ठिकानों पर कार्रवाई की, जिसके बाद ईरान की ओर से भी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आईं।
इस घटनाक्रम के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बंद करने का ऐलान किया। हालांकि, अमेरिका ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता अभी भी खुला है और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही जारी है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि हॉर्मुज स्ट्रेट उन सभी जहाजों के लिए खुला है जो अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत यात्रा करना चाहते हैं।
ब्रेंट क्रूड और WTI में जोरदार तेजी
तेल बाजार में सोमवार को ब्रेंट क्रूड के सितंबर एक्सपायरी कॉन्ट्रैक्ट में 4% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई और कीमतें $79 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गईं। इससे पहले पिछले सप्ताह भी ब्रेंट क्रूड में करीब 5.5% की बढ़त देखने को मिली थी।
वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत भी $74 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई।
इसके अलावा यूरोपीय नेचुरल गैस फ्यूचर्स में भी तेजी देखने को मिली। बाजार में निवेशक अब पश्चिम एशिया की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि किसी भी बड़े सैन्य घटनाक्रम का सीधा असर ऊर्जा कीमतों पर पड़ सकता है।
क्या हॉर्मुज स्ट्रेट बंद है?
हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह वास्तव में बंद हुआ है या नहीं।
ईरान ने इसे “अगली सूचना तक” बंद रखने की बात कही है, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि वह समुद्री रास्ते की सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए तैयार है।
हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह की रुकावट से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
तेल आपूर्ति पर बढ़ा दबाव
इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने भी पहले चेतावनी दी थी कि पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव तेल बाजार के संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
हालिया घटनाओं से तेल कंपनियों और देशों द्वारा बनाए जा रहे रणनीतिक भंडार पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अगर हॉर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित होती है तो वैश्विक स्तर पर सप्लाई की चिंता बढ़ सकती है।
जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर (JMIC) के अनुसार, रविवार को हॉर्मुज स्ट्रेट में सामान्य दिनों की तुलना में बहुत कम समुद्री गतिविधि देखने को मिली। हालांकि, संगठन ने यह भी कहा कि ओमान के जरिए वैकल्पिक दक्षिणी मार्ग उपलब्ध है।
ईरान ने बातचीत को लेकर रखी नई शर्तें
ईरान की संसद के स्पीकर और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघेर ग़ालिबफ ने कहा है कि अब “एकतरफा समझौतों” का दौर खत्म हो चुका है।
उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू होने से पहले वॉशिंगटन को हॉर्मुज स्ट्रेट से जुड़े पुराने वादों और ईरान के तेल निर्यात को सामान्य करने जैसे मुद्दों पर ध्यान देना होगा।
इस बयान के बाद बाजार में यह चिंता और बढ़ गई है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जल्द खत्म नहीं होगा।
भारत पर क्या होगा असर?
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर पड़ सकता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से कच्चा तेल खरीदकर पूरा करता है।
अगर ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है तो इसका असर:
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है।
- महंगाई के दबाव को बढ़ा सकता है।
- कंपनियों की लागत बढ़ा सकता है।
- रुपये पर भी दबाव डाल सकता है।
हालांकि, सरकार और तेल कंपनियां कीमतों में बदलाव से पहले वैश्विक बाजार की स्थिति, डॉलर-रुपया विनिमय दर और अन्य कारकों को ध्यान में रखती हैं।
आगे कैसी रह सकती है तेल की कीमतें?
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल की दिशा पूरी तरह अमेरिका-ईरान तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर निर्भर करेगी।
अगर समुद्री रास्ते सामान्य रहते हैं और तनाव कम होता है तो कीमतों में कुछ गिरावट आ सकती है। लेकिन अगर संघर्ष बढ़ता है या तेल सप्लाई प्रभावित होती है तो ब्रेंट क्रूड $80 प्रति बैरल के ऊपर भी जा सकता है।
फिलहाल ग्लोबल एनर्जी मार्केट की नजर पश्चिम एशिया की हर गतिविधि पर बनी हुई है।
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