भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अरबपति उद्योगपति अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता ने बड़ा लक्ष्य दोहराया है। कंपनी ने प्रतिदिन 5 लाख बैरल ऑयल इक्विवेलेंट (BOEPD) तेल और गैस उत्पादन हासिल करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। कंपनी का कहना है कि उन्नत तकनीक और नए हाइड्रोकार्बन संसाधनों के दोहन के जरिए भारत की आयात पर निर्भरता कम करने में यह लक्ष्य अहम भूमिका निभाएगा।
Highlights
- वेदांता ने 5 लाख बैरल प्रतिदिन तेल-गैस उत्पादन का लक्ष्य दोहराया
- आयात पर निर्भरता घटाकर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की तैयारी
- एडवांस्ड टेक्नोलॉजी से घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधनों का होगा दोहन
- अनिल अग्रवाल बोले- ऊर्जा आत्मनिर्भरता भारत की रणनीतिक जरूरत
ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा दांव
वेदांता ने 11 जुलाई को कहा कि उसका लक्ष्य प्रतिदिन 5,00,000 बैरल ऑयल इक्विवेलेंट (BOEPD) उत्पादन तक पहुंचना है। कंपनी का मानना है कि इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और विदेशी तेल-गैस पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
भारत फिलहाल अपनी कुल तेल और गैस जरूरतों का करीब 90 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन में बाधा का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
देश में मौजूद हैं विशाल हाइड्रोकार्बन संसाधन
वेदांता के अनुसार भारत में करीब 300 अरब बैरल ऑयल इक्विवेलेंट हाइड्रोकार्बन संसाधनों की क्षमता मौजूद है। कंपनी की ऑयल एंड गैस इकाई केयर्न एडवांस्ड एक्सप्लोरेशन और एन्हांस्ड ऑयल रिकवरी (EOR) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर इन संसाधनों का बेहतर दोहन करना चाहती है।
कंपनी का कहना है कि नई तकनीकों के जरिए उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ नए क्षेत्रों की खोज भी तेज की जाएगी।
अनिल अग्रवाल बोले- ऊर्जा आत्मनिर्भरता अब जरूरत
वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल ने कहा कि भारत के लिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना केवल एक विकल्प नहीं बल्कि रणनीतिक और आर्थिक आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि देश में उत्पादित तेल और गैस का हर अतिरिक्त बैरल आयात बिल कम करता है, अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत बनाता है। उनके मुताबिक भारत के पास प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ विश्वस्तरीय तकनीकी प्रतिभा और उद्यमिता की भी कोई कमी नहीं है।
खोज की अपार संभावनाएं
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के कई संभावित सेडिमेंट्री बेसिन अभी भी पूरी तरह एक्सप्लोर नहीं किए गए हैं। ऐसे में नए तेल और गैस भंडार मिलने की अच्छी संभावनाएं बनी हुई हैं।
सरकार भी नेशनल डीपवॉटर एक्सप्लोरेशन मिशन (समुद्र मंथन) के तहत गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में पहले प्रतिबंधित रहे कई ब्लॉकों को खोल चुकी है। अनुमान है कि इस पहल से इस दशक के अंत तक ऊर्जा क्षेत्र में 500 अरब डॉलर तक के निवेश के अवसर पैदा हो सकते हैं।
कई राज्यों में फैला है वेदांता का नेटवर्क
वेदांता ऑयल एंड गैस के पास राजस्थान, गुजरात, असम और आंध्र प्रदेश में करीब 47,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले 44 ऑनशोर और ऑफशोर ब्लॉक हैं। इनमें पारंपरिक और गैर-पारंपरिक दोनों प्रकार के हाइड्रोकार्बन संसाधन शामिल हैं।
कंपनी का कहना है कि भारत को लंबे समय तक ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार, उद्योग, उद्यमियों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच लगातार सहयोग जरूरी होगा।
भारत के लिए क्यों अहम है यह लक्ष्य?
यदि वेदांता अपने 5 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन के लक्ष्य को हासिल करती है, तो इससे देश का घरेलू तेल-गैस उत्पादन बढ़ेगा, आयात बिल में कमी आ सकती है और वैश्विक ऊर्जा बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का असर भी सीमित किया जा सकेगा। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।


