Raghuram Rajan New Role: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन को अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व में एक अहम नई जिम्मेदारी मिली है। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने केंद्रीय बैंक की कार्यप्रणाली की समीक्षा और भविष्य की नीतियों को मजबूत बनाने के लिए पांच नई टास्क फोर्स का गठन किया है। इन टास्क फोर्स में दुनिया के कई प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों, शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। खास बात यह है कि इनमें कई भारतीय मूल के विशेषज्ञ भी शामिल हैं, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
फेडरल रिजर्व ने क्यों बनाई नई टास्क फोर्स?
फेडरल रिजर्व अपनी कम्युनिकेशन रणनीति, बैलेंस शीट, डेटा विश्लेषण, उत्पादकता (Productivity) और महंगाई फ्रेमवर्क की समीक्षा करना चाहता है। इसके लिए पांच अलग-अलग टास्क फोर्स बनाई गई हैं, जिनका उद्देश्य यह तय करना है कि भविष्य में फेड किस तरह अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से मौद्रिक नीति (Monetary Policy) लागू कर सके।
इन टास्क फोर्स की सिफारिशें वर्ष के अंत तक तैयार होंगी, हालांकि इन्हें लागू करने से पहले फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की मंजूरी जरूरी होगी।
रघुराम राजन को मिली बैलेंस शीट टास्क फोर्स की जिम्मेदारी
पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन को फेड की बैलेंस शीट टास्क फोर्स का सह-नेतृत्व सौंपा गया है। यह समूह फेड की विशाल बैलेंस शीट और बॉन्ड खरीद कार्यक्रम (Bond Purchase Program) की समीक्षा करेगा।
राजन लंबे समय से इस बात के पक्षधर रहे हैं कि केंद्रीय बैंकों की बैलेंस शीट जरूरत से ज्यादा बड़ी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पहले भी बड़े पैमाने पर बॉन्ड खरीद से जुड़े जोखिमों और उससे बाहर निकलने की चुनौतियों पर विस्तार से लिखा है।
2005 की चेतावनी हुई थी सही साबित
रघुराम राजन ने वर्ष 2005 में अमेरिका के प्रतिष्ठित जैक्सन होल सम्मेलन में वैश्विक वित्तीय प्रणाली में बढ़ते जोखिमों को लेकर चेतावनी दी थी। उस समय कई विशेषज्ञों ने उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया, लेकिन 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद उनकी भविष्यवाणी सही साबित हुई और उनकी प्रतिष्ठा दुनिया के शीर्ष अर्थशास्त्रियों में शामिल हो गई।
डेटा सिस्टम सुधारने की जिम्मेदारी
फेड की डेटा सोर्स टास्क फोर्स अर्थव्यवस्था का आकलन करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले डेटा को अधिक आधुनिक और वास्तविक समय (Real-Time) के अनुरूप बनाने पर काम करेगी।
इस समूह में कई बड़े नाम शामिल हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
- हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री राज चेट्टी
- पूर्व वॉलमार्ट CEO डग मैकमिलन
- यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के प्रोफेसर केविन मर्फी
राज चेट्टी सरकारी और निजी दोनों प्रकार के बड़े डेटा का उपयोग करके आर्थिक असमानता और सामाजिक गतिशीलता पर किए गए अपने शोध के लिए विश्वभर में जाने जाते हैं।
कम्युनिकेशन टास्क फोर्स में वैश्विक विशेषज्ञ
फेड अपनी नीति संबंधी घोषणाओं को अधिक सरल और स्पष्ट बनाने के लिए भी काम करेगा। इसके लिए बनाई गई कम्युनिकेशन टास्क फोर्स में शामिल हैं—
- बैंक ऑफ इंग्लैंड के पूर्व गवर्नर मर्विन किंग
- ब्राजील के पूर्व केंद्रीय बैंक गवर्नर आर्मिनियो फ्रागा
- पूर्व न्यूयॉर्क फेड अधिकारी पीटर फिशर
इन विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंकों की नीतियां जितनी स्पष्ट होंगी, बाजार में अनिश्चितता उतनी कम होगी।
AI और उत्पादकता पर भी होगा फोकस
फेड ने पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आर्थिक प्रभावों का अध्ययन करने के लिए अलग टास्क फोर्स बनाई है।
इसमें शामिल हैं—
- वेंचर कैपिटलिस्ट मार्क आंद्रेसेन
- माइक्रोसॉफ्ट गेमिंग एवं Xbox की CEO आशा शर्मा
- स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री चार्ल्स जोन्स
यह समूह अध्ययन करेगा कि AI भविष्य में रोजगार, उत्पादकता और आर्थिक विकास को किस तरह प्रभावित करेगा।
महंगाई फ्रेमवर्क की होगी समीक्षा
महंगाई को नियंत्रित करने के लिए फेड जिस फ्रेमवर्क का उपयोग करता है, उसकी समीक्षा करने वाली टीम में शामिल हैं—
- हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ग्रेग मैनकिव
- नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री थॉमस सार्जेंट
- बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स (BIS) के पूर्व सलाहकार विलियम व्हाइट
यह समूह मौद्रिक नीति, ब्याज दरों और महंगाई के बीच संबंधों का दोबारा मूल्यांकन करेगा।
विशेषज्ञों ने बताया मजबूत पैनल
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर साइमन बोमेकर के अनुसार, इन टास्क फोर्स में दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित नीति विशेषज्ञ, शिक्षाविद और निजी क्षेत्र के अनुभवी लोग शामिल किए गए हैं। इससे फेड की नीतियों को अधिक भरोसेमंद और व्यावहारिक बनाने में मदद मिलेगी।
भारत के लिए क्यों है यह बड़ी खबर?
रघुराम राजन सहित कई भारतीय मूल के विशेषज्ञों का फेडरल रिजर्व जैसी दुनिया की सबसे प्रभावशाली वित्तीय संस्था में अहम भूमिका निभाना भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे वैश्विक आर्थिक नीति निर्माण में भारतीय विशेषज्ञों की बढ़ती स्वीकार्यता और प्रभाव का संकेत मिलता है। साथ ही, भविष्य की वैश्विक वित्तीय नीतियों पर इन विशेषज्ञों की सोच का असर देखने को मिल सकता है।
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