Harsh Goenka Viral Post: आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने जापान की एक दिलचस्प परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां फल और सब्जियों के पैकेट पर उन्हें उगाने वाले किसान की तस्वीर लगाई जाती है। उनका मानना है कि भारत में भी इस तरह की पहल किसानों और ग्राहकों के बीच भरोसा बढ़ाने का काम कर सकती है। हालांकि, सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने इस दावे पर सवाल भी उठाए हैं।
हर्ष गोयनका ने शेयर की जापान की अनोखी परंपरा
देश के जाने-माने उद्योगपति और आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अक्सर प्रेरणादायक और विचारोत्तेजक पोस्ट साझा करते रहते हैं। इस बार उन्होंने जापान की एक ऐसी परंपरा का जिक्र किया, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
गोयनका के अनुसार, जापान में कई जगहों पर फल और सब्जियों के पैकेट या डिब्बों पर उन्हें उगाने वाले किसान की तस्वीर भी लगाई जाती है। उनका कहना है कि इससे ग्राहक सिर्फ उत्पाद नहीं खरीदते, बल्कि उसके पीछे मेहनत करने वाले किसान से भी जुड़ाव महसूस करते हैं।
पोस्ट में क्या लिखा?
हर्ष गोयनका ने अपनी पोस्ट में लिखा,
“जापान में फल और सब्जियों के डिब्बों पर उन्हें उगाने वाले किसान की तस्वीर शामिल होती है। यह साधारण सा आइडिया एक पर्सनल टच जोड़ता है, जिससे खरीदार अपने भोजन के पीछे छिपे असली लोगों को देख पाते हैं। इससे ग्राहकों के बीच भरोसा और जुड़ाव पैदा होता है। हमारे देश के लिए भी यह एक बेहतरीन आइडिया है जिसे अपनाया जाना चाहिए।”
उनका मानना है कि इस तरह की पहल किसानों को पहचान देने के साथ-साथ उपभोक्ताओं का भरोसा भी मजबूत कर सकती है।
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
गोयनका की पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग राय रखी।
- कई यूजर्स ने कहा कि भारत में भी किसानों को पहचान देने के लिए ऐसा मॉडल अपनाया जाना चाहिए।
- कुछ लोगों ने इसे भारतीय कृषि व्यवस्था के लिए सकारात्मक कदम बताया।
- वहीं कुछ यूजर्स ने इस दावे पर सवाल उठाए और कहा कि उन्हें जापान में ऐसा देखने को नहीं मिला।
एक यूजर ने लिखा कि भारत में कई नेता टैक्स संबंधी कारणों से खुद को किसान बताते हैं, इसलिए ऐसी व्यवस्था लागू करना आसान नहीं होगा।
जापान गईं यूजर ने उठाए सवाल
‘चित्रलेखा’ नाम की एक यूजर ने गोयनका की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि वह पिछले साल जापान गई थीं और वहां कई सुपरमार्केट में खरीदारी भी की, लेकिन उन्हें कहीं भी फल या सब्जियों पर किसानों की तस्वीरें नहीं दिखीं।
उनका कहना था कि सोशल मीडिया पर जापान से जुड़ी कई दिलचस्प बातें दिखाई जाती हैं, लेकिन वास्तविक अनुभव हमेशा वैसा नहीं होता।
क्या भारत में लागू हो सकता है ऐसा मॉडल?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों की पहचान, खेती की जानकारी, उत्पादन का स्थान और गुणवत्ता संबंधी विवरण पैकेजिंग पर उपलब्ध कराया जाए, तो इससे ट्रेसेबिलिटी (Traceability) बढ़ सकती है। इससे ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा और किसानों को भी अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य मिल सकता है।
हालांकि, देशभर में इस तरह की व्यवस्था लागू करने के लिए पैकेजिंग, सप्लाई चेन और प्रमाणन प्रणाली में बड़े स्तर पर बदलाव की जरूरत होगी।
निष्कर्ष
हर्ष गोयनका की यह पोस्ट केवल एक सुझाव नहीं, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं के बीच सीधा संबंध बनाने की सोच को सामने लाती है। हालांकि जापान में इस प्रथा को लेकर सोशल मीडिया पर मतभेद देखने को मिले, लेकिन भारत में कृषि उत्पादों की पारदर्शिता और किसानों को पहचान दिलाने के संदर्भ में यह विचार चर्चा का विषय जरूर बन गया है।


