मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका के नए हमलों के बाद वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से उछली हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 2.5% बढ़कर 76 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया, जिससे तेल पर निर्भर भारतीय कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। सबसे ज्यादा दबाव ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs), एयरलाइंस, टायर और पेंट सेक्टर के शेयरों पर रहा, जबकि तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों को इसका फायदा मिला।
कच्चे तेल की महंगाई से क्यों बढ़ी बाजार की चिंता?
भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा होता है, तो कई कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। यदि कंपनियां बढ़ी हुई लागत ग्राहकों पर नहीं डाल पातीं, तो उनके मुनाफे पर सीधा असर पड़ता है। यही वजह है कि निवेशकों ने तेल पर निर्भर कंपनियों के शेयरों में बिकवाली शुरू कर दी।
इन शेयरों में आई बड़ी गिरावट
कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सबसे ज्यादा असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर पड़ा।
- BPCL के शेयर 4% से ज्यादा टूटकर करीब 299 रुपये तक पहुंच गए।
- HPCL में लगभग 4% की गिरावट दर्ज की गई।
- IOC (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन) के शेयर 3% से ज्यादा फिसल गए।
- IndiGo के शेयर 2% से अधिक टूट गए क्योंकि एविएशन सेक्टर की सबसे बड़ी लागत एविएशन फ्यूल होती है।
- Asian Paints के शेयर करीब 1.5% नीचे आ गए।
- Apollo Tyres में करीब 2% की गिरावट रही।
- CEAT, JK Tyre & Industries और SpiceJet के शेयरों में भी 1-2% तक कमजोरी दर्ज की गई।
- Kansai Nerolac Paints के शेयर भी दबाव में रहे, जबकि Berger Paints में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
ONGC और Oil India को मिला फायदा
जहां तेल की ऊंची कीमतें रिफाइनिंग और मार्केटिंग कंपनियों के लिए चिंता बढ़ाती हैं, वहीं तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों के लिए यह सकारात्मक खबर होती है।
इसी वजह से:
- ONGC के शेयरों में लगभग 1% की तेजी दर्ज की गई।
- Oil India के शेयर भी करीब 1% चढ़े।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इन कंपनियों की आय और मुनाफे में सुधार देखने को मिल सकता है।
क्या बाजार में गिरावट और बढ़ सकती है?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और बढ़ता है तथा ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल या उससे ऊपर पहुंचता है, तो भारतीय बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है। विशेष रूप से ऑयल मार्केटिंग कंपनियां, एयरलाइंस, पेंट और टायर कंपनियां अधिक प्रभावित हो सकती हैं। वहीं, यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और तेल की कीमतें नरम पड़ती हैं, तो इन सेक्टरों में रिकवरी देखने को मिल सकती है।
फिलहाल निवेशकों की नजर मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या प्रमाणित निवेश सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


