नई दिल्ली: देशभर में E20 पेट्रोल लागू करने के बाद अब केंद्र सरकार इथेनॉल ब्लेंडिंग को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रही है। सरकार E25 पेट्रोल लॉन्च करने की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रही है। हालांकि, इस दिशा में कोई जल्दबाजी नहीं होगी। पहले मौजूदा E20 पेट्रोल के इंजन, माइलेज और वाहन के पार्ट्स पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत आकलन किया जाएगा। उद्योग जगत से भी लगातार राय ली जा रही है।
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, E25 पेट्रोल में 75 फीसदी पेट्रोल और 25 फीसदी इथेनॉल का मिश्रण होगा। सरकार का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देना है। लेकिन अधिक इथेनॉल मिश्रण से वाहनों की परफॉर्मेंस और माइलेज पर असर को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
E20 के असर का पहले होगा मूल्यांकन
सरकारी सूत्रों के अनुसार, E25 को मंजूरी देने से पहले केंद्र सरकार यह जांच रही है कि मौजूदा E20 ब्लेंड का गाड़ियों के इंजन, फ्यूल सिस्टम और अन्य पार्ट्स पर क्या प्रभाव पड़ा है। अधिकारियों का कहना है कि उद्योग से मिले सुझावों को ध्यान में रखते हुए ही आगे का फैसला लिया जाएगा।
एक सरकारी अधिकारी के मुताबिक, “हमें इस दिशा में सोच-समझकर आगे बढ़ना होगा। इंडस्ट्री भी यही सलाह दे रही है।”
रिफाइनर तैयार, सरकार की मंजूरी का इंतजार
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल रिफाइनरियां E25 पेट्रोल की आपूर्ति के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पहले ही तैयार कर चुकी हैं। अब उन्हें केवल सरकार की औपचारिक मंजूरी का इंतजार है।
एक पीएसयू रिफाइनर के अधिकारी ने बताया कि जैसे ही सरकार से अनुमति मिलेगी, E25 पेट्रोल की आपूर्ति शुरू की जा सकती है।
E20 का लक्ष्य समय से पहले पूरा
भारत ने इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम के तहत E20 पेट्रोल की उपलब्धता का लक्ष्य 2030 की तय समयसीमा से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया है। इसके बाद सरकार अब इथेनॉल ब्लेंडिंग को और बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
सरकार पहले ही कर चुकी है तैयारी
सरकार ने मई में E22, E25, E27 और E30 पेट्रोल के लिए नए भारतीय मानकों को अधिसूचित किया था। इसके अलावा हाल ही में अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधनों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में भी राहत दी गई है।
हालांकि, अभी तक E25 पेट्रोल के व्यावसायिक लॉन्च की कोई समयसीमा तय नहीं की गई है।
E20 को लेकर क्यों हो रहा है विवाद?
E25 की चर्चा ऐसे समय हो रही है जब E20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज है। हाल ही में अदालत में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने E20 को एक तरह का “प्रयोग” बताया था और कहा था कि इसके दीर्घकालिक प्रभाव अगले साल तक और स्पष्ट होंगे।
वहीं, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने E20 को लेकर फैल रही अफवाहों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि E20 से इंजन खराब होने या फ्यूल में कीड़े आने जैसी बातें वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं और लोगों को अफवाहों के बजाय प्रमाणित जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
E25 के लिए वाहनों में बदलाव पड़ सकता है
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का मानना है कि E25 जैसे अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के व्यापक इस्तेमाल के लिए वाहन कंपनियों को इंजन और फ्यूल सिस्टम में कुछ तकनीकी बदलाव करने पड़ सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इनमें शामिल हो सकते हैं:
- इंजन की नई ट्यूनिंग
- फ्यूल सिस्टम के पार्ट्स की अतिरिक्त टेस्टिंग
- अधिक इथेनॉल के अनुरूप मटेरियल की जांच
- इंजन मैनेजमेंट सिस्टम में आवश्यक बदलाव
माइलेज पर कितना असर पड़ सकता है?
ग्रेन इथेनॉल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सीके जैन के मुताबिक, E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से सामान्य परिस्थितियों में माइलेज में लगभग 3% से 7% तक कमी आ सकती है। हालांकि, आधुनिक E20-अनुकूल इंजन बेहतर कंबशन और उन्नत इंजन मैनेजमेंट सिस्टम की मदद से इस प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि इथेनॉल की ऑक्टेन रेटिंग अधिक होने से दहन प्रक्रिया बेहतर होती है, जिससे कार्बन मोनोऑक्साइड और कुछ अन्य हानिकारक हाइड्रोकार्बन उत्सर्जन में कमी आ सकती है।
E25 क्यों है सरकार के लिए अहम?
सरकार का मानना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ने से कई फायदे हो सकते हैं—
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी।
- विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- गन्ना और अनाज उत्पादक किसानों को अतिरिक्त बाजार मिलेगा।
- उत्सर्जन घटाने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
हालांकि, सरकार फिलहाल E25 को लागू करने से पहले तकनीकी, आर्थिक और ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े सभी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन कर रही है। ऐसे में E25 पेट्रोल का व्यावसायिक लॉन्च अभी सरकार की अंतिम मंजूरी और व्यापक परीक्षणों पर निर्भर करेगा।


