**नई दिल्ली: किसी भी बड़े बिजनेस साम्राज्य का अंत अचानक नहीं होता। इसकी शुरुआत अक्सर चुपचाप होती है और सबसे पहले बदलाव नजर आता है अगली पीढ़ी की सोच और व्यवहार में। आरपीजी ग्रुप के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए बताया कि आखिर किन संकेतों से समझा जा सकता है कि किसी सफल बिजनेस एम्पायर के पतन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है।
गोयनका ने अपने पोस्ट में लिखा कि जब अगली पीढ़ी मेहनत, अनुशासन और जिम्मेदारी की बजाय लग्जरी कारों, महंगी घड़ियों, इंस्टाग्राम पोस्ट और गोल्फ जैसी लाइफस्टाइल को अधिक महत्व देने लगे तथा उनमें “हक जताने” (Entitlement) की भावना आ जाए, तब यह किसी भी कारोबारी परिवार के लिए खतरे की घंटी है।
हर्ष गोयनका ने शेयर किया एक मिनट का वीडियो
When the next gen starts valuing luxury cars, expensive watches, Instagram posts and golf games over hard work and have a sense of entitlement- the countdown of the decline of the business empire has begun! pic.twitter.com/kmQxBILJmT
— Harsh Goenka (@hvgoenka) July 6, 2026 हर्ष गोयनका द्वारा साझा किया गया वीडियो करीब एक मिनट का है। इसमें एक व्यक्ति कार में बैठकर समझाता है कि किसी परिवार या बिजनेस हाउस की गिरावट की शुरुआत गरीबी से नहीं बल्कि मानसिकता में बदलाव से होती है।
वीडियो में कहा गया है कि कई परिवार आर्थिक रूप से अब भी बेहद मजबूत दिखाई देते हैं। उनके पास आलीशान घर, पैसा और समाज में प्रतिष्ठा होती है, लेकिन अंदर ही अंदर उनका पतन शुरू हो चुका होता है।
गरीबी नहीं, ‘हक जताने’ की सोच है सबसे बड़ा खतरा
वीडियो में बताया गया है कि असली खतरा तब पैदा होता है जब परिवार के युवा यह मानने लगते हैं कि उन्हें हर सुविधा बिना किसी मेहनत के मिलनी ही चाहिए।
ऐसे समय में कुछ सामान्य लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देने लगते हैं—
- बच्चे धन्यवाद कहना छोड़ देते हैं।
- खर्च करना सामान्य और स्वाभाविक लगने लगता है।
- माता-पिता और पिछली पीढ़ी के त्याग को भुला दिया जाता है।
- जिम्मेदारी उठाने से बचा जाता है।
- हर कोई केवल लाभ और अधिकार चाहता है।
- परिवार के नाम और प्रतिष्ठा को केवल सुविधा के रूप में देखा जाता है, उसकी रक्षा करने की जिम्मेदारी नहीं समझी जाती।
यही बदलाव आगे चलकर बड़े कारोबारी परिवारों के लिए गंभीर चुनौती बन जाते हैं।
बिजनेस एम्पायर का पतन अचानक नहीं होता
वीडियो में यह भी कहा गया है कि किसी बिजनेस या परिवार की गिरावट एक दिन में नहीं आती। यह धीरे-धीरे नजरिए में बदलाव से शुरू होती है।
दिवालियापन तो बाद की स्थिति होती है। उससे पहले परिवार के सदस्यों के भीतर अनुशासन, कृतज्ञता और जिम्मेदारी की भावना कमजोर पड़ने लगती है। जब मेहनत की जगह अधिकार की मानसिकता ले लेती है, तब सफलता को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है।
क्यों खतरनाक है ‘Entitlement’ यानी हक जताने की मानसिकता?
वीडियो के अनुसार, अधिकार की भावना लोगों को उस संपत्ति और सफलता का उपभोग करने के लिए प्रेरित करती है जिसे उन्होंने स्वयं बनाने में कोई योगदान नहीं दिया।
ऐसी मानसिकता के कारण अगली पीढ़ी यह मानने लगती है कि आराम, धन और सुविधाएं उनका जन्मसिद्ध अधिकार हैं। धीरे-धीरे मेहनत, संघर्ष और जोखिम उठाने की क्षमता कम होने लगती है। यही कारण है कि कई सफल बिजनेस घराने समय के साथ कमजोर पड़ जाते हैं।
मजबूत परिवार अगली पीढ़ी को क्या सिखाते हैं?
वीडियो में यह संदेश भी दिया गया कि जो परिवार पीढ़ियों तक सफल बने रहते हैं, वे केवल संपत्ति नहीं बल्कि संस्कार भी आगे बढ़ाते हैं।
ऐसे परिवार अपने बच्चों को बचपन से ही तीन महत्वपूर्ण बातें सिखाते हैं—
- कृतज्ञता (Gratitude) – हर उपलब्धि के पीछे किसी की मेहनत और त्याग को स्वीकार करना।
- संयम (Discipline) – संसाधनों का जिम्मेदारी से उपयोग करना।
- कर्तव्य (Responsibility) – परिवार, व्यवसाय और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना।
उनका मानना होता है कि विशेषाधिकार (Privilege) आराम करने का लाइसेंस नहीं, बल्कि अधिक जिम्मेदारी निभाने का अवसर है।
पारिवारिक व्यवसायों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह संदेश?
भारत में बड़ी संख्या में कंपनियां पारिवारिक व्यवसाय के रूप में संचालित होती हैं। कई प्रतिष्ठित बिजनेस हाउस पीढ़ियों से कारोबार संभाल रहे हैं। ऐसे में उत्तराधिकार (Succession Planning) और अगली पीढ़ी को सही मूल्यों के साथ तैयार करना किसी भी बिजनेस की दीर्घकालिक सफलता के लिए बेहद जरूरी माना जाता है।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि केवल पूंजी या संपत्ति किसी बिजनेस को लंबे समय तक सफल नहीं बना सकती। मजबूत नेतृत्व, जिम्मेदारी और सही कार्य संस्कृति ही किसी बिजनेस साम्राज्य को टिकाऊ बनाती है।
निष्कर्ष
हर्ष गोयनका का यह संदेश केवल उद्योगपतियों के लिए नहीं, बल्कि हर परिवार और हर व्यवसाय के लिए सीख है। उनका कहना है कि किसी भी बिजनेस एम्पायर का पतन आर्थिक संकट से पहले सोच में बदलाव से शुरू होता है। यदि अगली पीढ़ी मेहनत, अनुशासन और जिम्मेदारी को छोड़कर केवल अधिकार और विलासिता को प्राथमिकता देने लगे, तो यह भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी है।


