भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन अगर राज्यों की आर्थिक स्थिति को अलग-अलग देखा जाए तो तस्वीर काफी असमान दिखाई देती है। विश्व बैंक (World Bank) की नई आय-आधारित वर्गीकरण प्रणाली के विश्लेषण से पता चलता है कि देश के पांच राज्य अब ‘Upper-Middle-Income’ यानी उच्च-मध्यम आय वर्ग में पहुंच चुके हैं, जबकि बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे बड़े राज्य अभी भी काफी पीछे हैं।
देश की औसत आर्थिक प्रगति के बावजूद राज्यों के बीच प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) का अंतर लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि एक ओर कुछ राज्य विकसित अर्थव्यवस्थाओं की बराबरी कर रहे हैं तो दूसरी ओर कई राज्यों की आय पड़ोसी देशों से भी कम बनी हुई है।
भारत अभी भी Lower-Middle-Income देश
विश्व बैंक हर वर्ष देशों को उनकी प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय आय (GNI Per Capita) के आधार पर चार श्रेणियों में बांटता है। एटलस (Atlas Method) पद्धति के अनुसार भारत की प्रति व्यक्ति आय 2,760 डॉलर है, जिसके कारण देश अभी भी Lower-Middle-Income Economy की श्रेणी में आता है।
विश्व बैंक के मौजूदा मानकों के अनुसार—
- Low Income: 1,175 डॉलर से कम
- Lower-Middle-Income: 1,176 डॉलर से 4,635 डॉलर
- Upper-Middle-Income: 4,636 डॉलर से 14,375 डॉलर
- High Income: 14,375 डॉलर से अधिक
हालांकि राष्ट्रीय औसत के भीतर राज्यों की तस्वीर पूरी तरह अलग दिखाई देती है।
ये 5 राज्य पहुंचे Upper-Middle-Income श्रेणी में
भारत के पांच राज्यों ने प्रति व्यक्ति आय के मामले में विश्व बैंक की अपर-मिडल-इनकम सीमा को पार कर लिया है।
| राज्य | प्रति व्यक्ति आय (डॉलर) |
|---|---|
| दिल्ली | 6,217 |
| कर्नाटक | 5,579 |
| तेलंगाना | 5,407 |
| तमिलनाडु | 5,329 |
| गुजरात | 4,734 |
इन राज्यों की आय अब कई उभरती वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बराबर या उससे भी अधिक हो चुकी है। मजबूत औद्योगिक विकास, आईटी सेक्टर, निर्यात, सेवा क्षेत्र और निवेश ने इन राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से आगे पहुंचाया है।
महाराष्ट्र, हरियाणा और केरल मामूली अंतर से पीछे
दिलचस्प बात यह है कि तीन बड़े राज्य Upper-Middle-Income श्रेणी में पहुंचने से बेहद मामूली अंतर से चूक गए।
| राज्य | प्रति व्यक्ति आय (डॉलर) | सीमा से अंतर |
|---|---|---|
| महाराष्ट्र | 4,628 | 8 डॉलर कम |
| हरियाणा | 4,627 | 9 डॉलर कम |
| केरल | 4,610 | 26 डॉलर कम |
यदि इन राज्यों की प्रति व्यक्ति आय में मामूली बढ़ोतरी होती है तो वे भी जल्द ही इस श्रेणी में शामिल हो सकते हैं।
बिहार, यूपी और झारखंड सबसे पीछे
देश की सबसे कमजोर आर्थिक स्थिति वाले बड़े राज्यों में बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड शामिल हैं।
| राज्य | प्रति व्यक्ति आय (डॉलर) |
|---|---|
| बिहार | 984 |
| उत्तर प्रदेश | 1,403 |
| झारखंड | 1,470 |
विश्लेषण के अनुसार इन तीनों राज्यों की प्रति व्यक्ति आय नेपाल सहित कई विकासशील देशों के स्तर से भी कम है। इसका सीधा असर रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवन स्तर पर दिखाई देता है।
पिछले 30 वर्षों में बदली आर्थिक तस्वीर
करीब तीन दशक पहले भारत का कोई भी बड़ा राज्य आज के विश्व बैंक मानकों के अनुसार Upper-Middle-Income श्रेणी के आसपास भी नहीं था। लेकिन आर्थिक उदारीकरण, औद्योगिकीकरण, आईटी क्रांति और तेज शहरीकरण ने कई राज्यों की तस्वीर बदल दी।
आज दिल्ली, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य दक्षिण अफ्रीका, फिजी और मंगोलिया जैसी अर्थव्यवस्थाओं के बराबर पहुंच चुके हैं। वहीं कर्नाटक और तेलंगाना प्रति व्यक्ति आय के मामले में इंडोनेशिया और वियतनाम जैसी अर्थव्यवस्थाओं को भी पीछे छोड़ चुके हैं।
राज्यों के बीच बढ़ी आय की असमानता
हालांकि आर्थिक विकास हुआ है, लेकिन सभी राज्यों को इसका समान लाभ नहीं मिला।
विश्लेषण के मुताबिक—
- राज्यों के बीच Gini Coefficient 1994-95 के 0.230 से बढ़कर 2025-26 में 0.261 हो गया।
- 90वें और 10वें प्रतिशतक वाले राज्यों के बीच आय का अंतर 2.38 गुना से बढ़कर 3.73 गुना हो गया।
इसका अर्थ है कि अमीर और गरीब राज्यों के बीच आर्थिक दूरी पहले की तुलना में और अधिक बढ़ गई है।
मध्यम आय वाले राज्यों ने दिखाई सबसे तेज रफ्तार
पिछले 30 वर्षों में सबसे तेज विकास उन राज्यों ने किया जो पहले मध्यम आय वर्ग में थे।
- मध्यम आय वाले राज्यों की आय 36.7 गुना बढ़ी।
- उच्च आय वाले राज्यों में यह वृद्धि 28.3 गुना रही।
- सबसे गरीब राज्यों में आय 26.6 गुना बढ़ी।
कर्नाटक, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने इस दौरान उद्योग, आईटी, सेवा क्षेत्र और निवेश के दम पर तेज प्रगति दर्ज की।
ओडिशा और असम ने बदली अपनी तस्वीर
तीन दशक पहले उत्तर प्रदेश और ओडिशा की प्रति व्यक्ति आय लगभग बराबर थी। आज ओडिशा की आय यूपी से करीब 75% अधिक हो चुकी है।
इसी तरह कभी झारखंड और असम लगभग समान स्तर पर थे, लेकिन अब असम की प्रति व्यक्ति आय झारखंड से लगभग 48% ज्यादा हो गई है। यह दिखाता है कि सही नीतियों, निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास से अपेक्षाकृत कमजोर राज्य भी तेज आर्थिक प्रगति कर सकते हैं।
पंजाब की स्थिति भी बदली
एक समय पंजाब देश का सबसे समृद्ध बड़ा राज्य माना जाता था। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार पंजाब की प्रति व्यक्ति आय राजस्थान के करीब पहुंच गई है और कई अन्य राज्यों ने भी उसे पीछे छोड़ दिया है। यह संकेत देता है कि आर्थिक प्रतिस्पर्धा में लगातार सुधार और नए निवेश की आवश्यकता हर राज्य के लिए महत्वपूर्ण है।
आगे की राह
भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है, लेकिन राज्यों के बीच बढ़ती आय असमानता नीति निर्माताओं के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। यदि बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में उद्योग, कौशल विकास, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और रोजगार सृजन पर तेज़ी से काम किया जाए तो राष्ट्रीय विकास और अधिक संतुलित हो सकता है। आने वाले वर्षों में भारत के Upper-Middle-Income देश बनने की राह काफी हद तक इन पिछड़े राज्यों की आर्थिक प्रगति पर भी निर्भर करेगी।


