भारत और नेपाल के बीच व्यापारिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं, लेकिन हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापार से जुड़े कुछ फैसलों ने नेपाल की चिंता बढ़ा दी है। पहले नेपाली चाय के लिए भारत द्वारा गुणवत्ता मानकों (Quality Standards) की सख्ती चर्चा में रही, वहीं अब स्टील और आयरन उत्पादों पर भारत की सेफगार्ड ड्यूटी (Safeguard Duty) और BIS प्रमाणन (Bureau of Indian Standards Certification) को अनिवार्य किए जाने के बाद नेपाल के स्टील उद्योग को बड़ा झटका लगा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत के इन कदमों के कारण नेपाल को चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में लगभग 10.6 अरब नेपाली रुपये के निर्यात नुकसान का सामना करना पड़ा है। इसका असर केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योग, रोजगार और विदेशी मुद्रा आय पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
Highlights
- भारत की सेफगार्ड ड्यूटी से नेपाल को करीब 10.6 अरब नेपाली रुपये का नुकसान।
- आयरन और स्टील निर्यात से होने वाली कमाई में 68.67% की गिरावट।
- नेपाल के स्टील उद्योग और हजारों रोजगार पर संकट गहराया।
- नेपाली कंपनियों ने सरकार से भारत के साथ कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की मांग की।
- आगे और सख्त आयात नियम लागू होने की आशंका से उद्योग जगत चिंतित।
स्टील आयात पर भारत की सख्ती से नेपाल को बड़ा झटका
नेपाल के लिए भारत सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। विशेष रूप से आयरन और स्टील उत्पादों का बड़ा हिस्सा भारतीय बाजार में ही जाता है। लेकिन भारत द्वारा स्टील आयात पर सेफगार्ड ड्यूटी लागू किए जाने के बाद नेपाली निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता कमजोर पड़ गई है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में नेपाल ने भारत को आयरन और स्टील निर्यात कर 15.42 अरब नेपाली रुपये की कमाई की थी। वहीं चालू वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आंकड़ा घटकर केवल 4.83 अरब नेपाली रुपये रह गया।
इस तरह नेपाल को लगभग 10.59 अरब नेपाली रुपये की आय का नुकसान हुआ, जो करीब 68.67 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।
क्या है सेफगार्ड ड्यूटी और भारत ने इसे क्यों लागू किया?
सेफगार्ड ड्यूटी एक ऐसा सुरक्षा शुल्क है जिसे किसी देश की घरेलू इंडस्ट्री को सस्ते आयात से बचाने के लिए लगाया जाता है। भारत सरकार का कहना है कि कई देशों से बेहद कम कीमत पर स्टील आयात होने से घरेलू स्टील उत्पादकों को नुकसान हो रहा था।
इसी वजह से भारत ने चुनिंदा स्टील उत्पादों पर चरणबद्ध तरीके से सुरक्षा शुल्क लागू किया।
- पहले वर्ष 12%
- दूसरे वर्ष 11.5%
- तीसरे वर्ष 11%
इसके अलावा अप्रैल में सरकार ने तत्काल प्रभाव से 200 दिनों के लिए 12 प्रतिशत का अस्थायी सेफगार्ड शुल्क भी लागू किया था।
हालांकि स्टेनलेस स्टील सहित कुछ विशेष श्रेणी के उत्पादों को इस शुल्क से छूट दी गई है।
BIS सर्टिफिकेट की अनिवार्यता ने भी बढ़ाई मुश्किल
सेफगार्ड ड्यूटी के साथ-साथ भारत ने कई स्टील उत्पादों के लिए BIS (Bureau of Indian Standards) प्रमाणन को भी अनिवार्य बना दिया है।
नेपाल के कई छोटे और मध्यम उद्योग अभी तक इस प्रमाणन प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाए हैं। इसका सीधा असर उनके निर्यात पर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल शुल्क ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता मानकों की सख्ती ने भी नेपाल के निर्यात को प्रभावित किया है।
उद्योग और रोजगार पर गहराया संकट
नेपाल के स्टील उद्योग से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि निर्यात में आई भारी गिरावट का असर फैक्ट्रियों के उत्पादन पर पड़ रहा है।
यदि यही स्थिति जारी रही तो कई कंपनियों को उत्पादन घटाना पड़ सकता है, जिससे हजारों कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में आ सकती हैं। उद्योग संगठनों का कहना है कि विदेशी बाजार पर निर्भर कंपनियों के लिए यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।
आगे और बढ़ सकती है नेपाल की चिंता
नेपाली मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भारत भविष्य में उन स्टील उत्पादों पर और अधिक सख्ती कर सकता है जिनके निर्माण में चीनी मूल के कच्चे माल का उपयोग किया जाता है।
यदि ऐसा होता है तो नेपाल के कई स्टील उत्पादकों के लिए भारतीय बाजार तक पहुंच और मुश्किल हो सकती है। इससे नेपाल के स्टील उद्योग पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
नेपाली कंपनियों ने सरकार से की हस्तक्षेप की मांग
नेपाल के निर्यातकों और उद्योग संगठनों का कहना है कि उनका देश अभी भी Least Developed Country (LDC) यानी अल्पविकसित देशों की श्रेणी में आता है। ऐसे में भारत को नेपाल के लिए विशेष व्यापारिक रियायतें जारी रखनी चाहिए।
उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि नेपाल हर साल भारत को लगभग 1,45,932 टन आयरन और स्टील उत्पाद निर्यात करता है। सेफगार्ड ड्यूटी लागू होने के बाद इस व्यापार पर गंभीर असर पड़ा है।
इसी वजह से नेपाली कंपनियों ने अपनी सरकार से भारत के साथ उच्चस्तरीय वार्ता कर स्टील उत्पादों पर लगाई गई ड्यूटी में राहत दिलाने की मांग की है।
भारत और नेपाल के व्यापारिक रिश्तों पर क्या होगा असर?
भारत और नेपाल के बीच खुली सीमा और मजबूत आर्थिक संबंध दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण हैं। हालांकि किसी भी देश द्वारा घरेलू उद्योग की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदम पड़ोसी देशों के निर्यात पर असर डाल सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देश बातचीत के माध्यम से समाधान निकालते हैं तो व्यापारिक संतुलन बनाए रखा जा सकता है। वहीं नेपाल के लिए नए निर्यात बाजार विकसित करना और उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार करना भी समय की जरूरत बन गया है।
निष्कर्ष
भारत द्वारा स्टील आयात पर सेफगार्ड ड्यूटी और BIS प्रमाणन लागू करने से नेपाल के स्टील उद्योग को बड़ा आर्थिक झटका लगा है। निर्यात में करीब 69 प्रतिशत की गिरावट ने उद्योग, रोजगार और विदेशी मुद्रा आय पर गंभीर प्रभाव डाला है। अब नेपाली उद्योग जगत अपनी सरकार से भारत के साथ कूटनीतिक स्तर पर समाधान निकालने की मांग कर रहा है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच होने वाली व्यापारिक वार्ताएं इस मुद्दे की दिशा तय कर सकती हैं।


