हाल के दिनों में मेटल शेयरों में आई जोरदार रिकवरी ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञ और GoIndiaStocks.com के फाउंडर राकेश अरोड़ा का मानना है कि यह तेजी लंबी नहीं चल सकती। उनके अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही (Q1FY27) के मजबूत नतीजों की उम्मीद पहले ही शेयरों की कीमतों में शामिल हो चुकी है। ऐसे में यदि नतीजों के बाद मेटल शेयरों में और तेजी आती है, तो उसे नई खरीदारी का मौका नहीं बल्कि मुनाफावसूली (Profit Booking) का अवसर माना जाना चाहिए।
Q1 नतीजों से पहले दिख सकती है सीमित तेजी
राकेश अरोड़ा का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में कई मेटल शेयर 20-30% तक गिर चुके थे। इसी वजह से जून तिमाही के बेहतर नतीजों की उम्मीद में इनमें रिकवरी देखने को मिल रही है। हालांकि, उनका मानना है कि यह तेजी केवल सीमित समय के लिए हो सकती है और शेयरों का अपने पुराने उच्च स्तर (All-Time High) तक पहुंचना फिलहाल मुश्किल नजर आता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले महीनों में यदि अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी कीमतों में नरमी आती है तो कंपनियों की आय (Earnings) के अनुमान भी कम किए जा सकते हैं, जिससे मेटल शेयरों पर दबाव बढ़ सकता है।
एल्युमिनियम कंपनियों पर सबसे ज्यादा चिंता
राकेश अरोड़ा का सबसे नकारात्मक नजरिया एल्युमिनियम सेक्टर को लेकर है। उनका कहना है कि अधिकांश ब्रोकरेज अभी भी एल्युमिनियम की कीमत करीब 3,200 डॉलर प्रति टन मानकर अनुमान लगा रहे हैं, जबकि उन्हें लगता है कि वास्तविक स्थिति इससे अलग हो सकती है।
उनके अनुसार, मिडिल ईस्ट और इंडोनेशिया से नई सप्लाई बाजार में आने वाली है, जिससे वैश्विक स्तर पर एल्युमिनियम की उपलब्धता बढ़ेगी। यदि ऐसा होता है तो कीमतें घटकर 2,600 डॉलर प्रति टन तक आ सकती हैं। इससे एल्युमिनियम कंपनियों के मुनाफे पर दबाव आएगा और उनके शेयरों में कमजोरी देखने को मिल सकती है।
स्टील सेक्टर पर भी नहीं हैं ज्यादा बुलिश
स्टील कंपनियों के जून तिमाही के नतीजे अच्छे रहने की संभावना जरूर है, लेकिन राकेश अरोड़ा को इस सेक्टर में भी लंबी अवधि की तेजी की उम्मीद नहीं है।
उनका कहना है कि:
- चीन से स्टील का निर्यात लगातार बढ़ रहा है।
- भारत की कंपनियां तेजी से उत्पादन क्षमता बढ़ा रही हैं।
- सप्लाई बढ़ने से स्टील की कीमतों और कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
हालांकि, उनका यह भी मानना है कि वैल्यूएशन के लिहाज से स्टील कंपनियां फिलहाल एल्युमिनियम कंपनियों की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ती दिखाई देती हैं।
Vedanta Iron & Steel को लेकर क्या है राय?
हाल ही में Vedanta समूह के डीमर्जर के बाद बने Vedanta Iron & Steel कारोबार पर भी राकेश अरोड़ा ने अपनी राय दी।
उनका कहना है कि आयरन और स्टील बिजनेस के विस्तार से मिलने वाले संभावित फायदे को बाजार पहले ही शेयर की कीमतों में शामिल कर चुका है। इसलिए यहां से बहुत बड़ी तेजी की संभावना फिलहाल सीमित नजर आती है।
हालांकि, उन्होंने समूह के ऑयल एंड गैस बिजनेस में कुछ वैल्यू जरूर देखी है, लेकिन रेगुलेटरी जोखिमों के कारण इसे अभी भी हाई-रिस्क निवेश माना है। उनके अनुसार यह निवेशकों के लिए Value Trap भी साबित हो सकता है।
कॉपर सेक्टर पर भी जताई चिंता
राकेश अरोड़ा का मानना है कि लंबी अवधि में इलेक्ट्रिक व्हीकल, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के कारण कॉपर की जरूरत बनी रहेगी। लेकिन फिलहाल कॉपर कंपनियों के शेयर उन्हें महंगे नजर आते हैं।
उन्होंने कहा कि बाजार अभी रिसाइकल्ड कॉपर की बढ़ती सप्लाई को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहा है। यदि रिसाइकल्ड कॉपर की उपलब्धता बढ़ती रही तो इससे अंतरराष्ट्रीय कॉपर कीमतों पर दबाव बन सकता है, जिसका असर कॉपर कंपनियों की कमाई पर भी पड़ेगा।
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
राकेश अरोड़ा की सलाह है कि यदि मजबूत जून तिमाही नतीजों के बाद मेटल शेयरों में तेजी आती है तो निवेशकों को नई खरीदारी करने के बजाय अपने मुनाफे को सुरक्षित करने पर विचार करना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात भी कही। यदि आने वाले समय में अमेरिकी डॉलर लगातार कमजोर होता है, तो इससे वैश्विक कमोडिटी बाजार को सहारा मिल सकता है। ऐसी स्थिति में बेस मेटल्स का आउटलुक बेहतर हो सकता है और उनका मौजूदा नकारात्मक नजरिया बदल भी सकता है।
निष्कर्ष
फिलहाल मेटल सेक्टर में मजबूत तिमाही नतीजों की उम्मीद जरूर बनी हुई है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश सकारात्मक खबरें पहले ही शेयरों की कीमतों में शामिल हो चुकी हैं। एल्युमिनियम, स्टील और कॉपर जैसे प्रमुख मेटल सेगमेंट में बढ़ती वैश्विक सप्लाई और संभावित कीमतों में गिरावट आने वाले महीनों में शेयरों पर दबाव बना सकती है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में नई खरीदारी करने के बजाय जोखिम और वैल्यूएशन दोनों का सावधानीपूर्वक आकलन करना चाहिए।
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