भारत के शेयर बाजार में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। एक समय था जब टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनने की दौड़ में रिलायंस इंडस्ट्रीज को कड़ी टक्कर देती थी। कई मौकों पर TCS ने मार्केट कैपिटलाइजेशन के मामले में रिलायंस को पीछे भी छोड़ दिया था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है।
आज स्थिति यह है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप भारत की टॉप 5 आईटी कंपनियों के संयुक्त मार्केट कैप के लगभग बराबर पहुंच गया है। यह बदलाव केवल शेयर कीमतों का नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था में बदलते सेक्टोरल ट्रेंड का भी संकेत देता है।
Highlights
- रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप करीब 18 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
- भारत की टॉप 5 आईटी कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप भी लगभग 18.12 लाख करोड़ रुपये
- AI की बढ़ती चुनौती और कमजोर डिमांड से आईटी शेयरों में भारी गिरावट
- रिलायंस का शेयर भी दबाव में रहा, लेकिन मार्केट वैल्यू में बना रहा दबदबा
- एक समय TCS अकेले रिलायंस को चुनौती देती थी, अब पांच कंपनियां मिलकर भी बराबरी पर
रिलायंस ने बनाया नया रिकॉर्ड
भारतीय शेयर बाजार में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक बार फिर अपनी मजबूत स्थिति साबित की है। हाल के कारोबारी आंकड़ों के अनुसार कंपनी का मार्केट कैप करीब 18 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
दिलचस्प बात यह है कि भारत की पांच सबसे बड़ी आईटी कंपनियां—TCS, Infosys, HCL Technologies, Tech Mahindra और Wipro—का संयुक्त मार्केट कैप लगभग 18.12 लाख करोड़ रुपये रहा। यानी अकेली रिलायंस इन पांच दिग्गज कंपनियों के बराबर खड़ी नजर आ रही है।
कभी TCS थी रिलायंस की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्वी
कुछ साल पहले तक भारतीय शेयर बाजार में सबसे मूल्यवान कंपनी बनने की लड़ाई मुख्य रूप से रिलायंस इंडस्ट्रीज और TCS के बीच होती थी।
कई अवसरों पर TCS ने रिलायंस को पीछे छोड़कर देश की सबसे बड़ी कंपनी बनने का गौरव भी हासिल किया। उस समय आईटी सेक्टर तेज ग्रोथ, बड़े विदेशी ऑर्डर और मजबूत मुनाफे के कारण निवेशकों की पहली पसंद था।
लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं। रिलायंस ने अपने कारोबार को ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल, टेलीकॉम, रिटेल, डिजिटल सेवाओं और नई ऊर्जा जैसे कई क्षेत्रों में विस्तार देकर अपनी वैल्यू लगातार मजबूत की है।
AI की वजह से आईटी सेक्टर पर बढ़ा दबाव
साल 2026 में भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों पर सबसे बड़ा दबाव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती चिंताओं का रहा।
बाजार को आशंका है कि AI आधारित ऑटोमेशन और नए टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म पारंपरिक आईटी सर्विस मॉडल को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा वैश्विक कंपनियों द्वारा आईटी खर्च में सावधानी और नए प्रोजेक्ट्स में देरी ने भी सेक्टर की ग्रोथ को प्रभावित किया है।
इसी वजह से इस साल अब तक टॉप आईटी कंपनियों के शेयरों में 36% तक की गिरावट दर्ज की गई है।
रिलायंस का शेयर भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहा
हालांकि ऐसा नहीं है कि रिलायंस के शेयरों में केवल तेजी ही देखने को मिली हो।
इस साल अब तक रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर भी 17% से अधिक गिर चुका है। इसकी प्रमुख वजह अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव रहे।
पिछले महीने कंपनी का शेयर NSE पर 52 सप्ताह के निचले स्तर 1,253.20 रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार देखने को मिला।
क्यों मजबूत बनी हुई है रिलायंस?
विशेषज्ञों का मानना है कि रिलायंस की सबसे बड़ी ताकत उसका डाइवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल है।
कंपनी केवल तेल और गैस कारोबार पर निर्भर नहीं है, बल्कि उसके पास कई मजबूत ग्रोथ इंजन हैं, जिनमें शामिल हैं—
- जियो का टेलीकॉम और डिजिटल बिजनेस
- रिलायंस रिटेल का तेजी से बढ़ता नेटवर्क
- पेट्रोकेमिकल कारोबार
- नई ऊर्जा (New Energy) परियोजनाएं
- ग्रीन हाइड्रोजन और सोलर निवेश
यही वजह है कि अलग-अलग सेक्टर में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी की कुल वैल्यू मजबूत बनी हुई है।
क्या आईटी सेक्टर की वापसी होगी?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि AI को लेकर शुरुआती डर भविष्य में कुछ हद तक कम हो सकता है। कई कंपनियां AI को खतरे के बजाय अवसर के रूप में अपना रही हैं।
फिर भी प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों का अनुमान है कि निकट भविष्य में आईटी कंपनियों की आय और ऑर्डर ग्रोथ सीमित रह सकती है। यदि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार होता है और कॉर्पोरेट टेक्नोलॉजी खर्च बढ़ता है, तभी आईटी सेक्टर में मजबूत रिकवरी देखने को मिल सकती है।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब?
रिलायंस और आईटी सेक्टर की मौजूदा स्थिति यह दिखाती है कि शेयर बाजार में केवल एक सेक्टर पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। जिन कंपनियों का कारोबार कई क्षेत्रों में फैला होता है, वे कठिन समय में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
हालांकि किसी भी शेयर में निवेश से पहले कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, वैल्यूएशन, भविष्य की संभावनाओं और अपने जोखिम प्रोफाइल का आकलन करना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी निवेश की सलाह नहीं है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


