नई दिल्ली: भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्रा सिर्फ कूटनीतिक दौरा नहीं होगी, बल्कि इसका प्रमुख उद्देश्य भारत के व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाई देना भी है। सरकार का फोकस क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने, मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) को आधुनिक बनाने और नए निवेश के अवसर तैयार करने पर है।
यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भूमिका मजबूत करने और निर्यात बढ़ाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है। माना जा रहा है कि इन तीन देशों के साथ होने वाली वार्ताएं भविष्य के व्यापारिक समझौतों की दिशा तय कर सकती हैं।
तीन देशों का दौरा, व्यापार रहेगा सबसे बड़ा एजेंडा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8-9 जुलाई को इंडोनेशिया, 10 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया और 11 जुलाई को न्यूजीलैंड की यात्रा करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे के दौरान द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, सप्लाई चेन, ऊर्जा सहयोग और आर्थिक साझेदारी प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
इंडोनेशिया के साथ आसियान (ASEAN) सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा होगी, जबकि ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को अंतिम रूप देने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ेगी। न्यूजीलैंड यात्रा का उद्देश्य भी व्यापार और निवेश संबंधों को नई गति देना है।
40 साल बाद न्यूजीलैंड जाएंगे भारतीय प्रधानमंत्री
इस दौरे का सबसे खास पहलू यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले लगभग 40 वर्षों में न्यूजीलैंड की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे। इसे दोनों देशों के संबंधों में एक ऐतिहासिक अवसर माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से कृषि, डेयरी, शिक्षा, पर्यटन, डिजिटल तकनीक और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ सकता है।
ASEAN-India व्यापार समझौते को मिलेगा नया स्वरूप
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत और ASEAN देशों के बीच लागू ASEAN-India Trade in Goods Agreement (AITIGA) की व्यापक समीक्षा की जा रही है। इस समझौते को मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप अपडेट करने पर काम चल रहा है।
मंत्रालय का मानना है कि वर्तमान समझौता काफी पुराना हो चुका है और यह भारत तथा ASEAN की बदलती अर्थव्यवस्थाओं की आवश्यकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करता। इसलिए इसे अधिक आधुनिक, सरल और व्यापार-अनुकूल बनाया जाएगा।
व्यापार को और उदार बनाने की तैयारी
विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्व) रुद्रेंद्र टंडन ने कहा कि AITIGA एक बहुपक्षीय समझौता है, इसलिए इसमें ASEAN के सभी सदस्य देशों की सहमति आवश्यक होगी।
उन्होंने बताया कि समीक्षा का मुख्य उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच व्यापार को और अधिक उदार बनाना है। इसके तहत टैरिफ संरचना, बाजार पहुंच, व्यापार प्रक्रियाओं और अन्य आर्थिक प्रावधानों की समीक्षा की जा रही है ताकि व्यापारिक गतिविधियां आसान और तेज हो सकें।
सभी ASEAN देशों के साथ जारी है बातचीत
सरकार के अनुसार, यह प्रक्रिया लगातार चलने वाली है और इसमें ASEAN के सभी प्रमुख देशों के साथ नियमित बातचीत हो रही है। भारत केवल बहुपक्षीय स्तर पर ही नहीं बल्कि द्विपक्षीय स्तर पर भी अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह समीक्षा सफल रहती है तो भारतीय निर्यातकों को दक्षिण-पूर्व एशिया के बड़े बाजारों तक अधिक प्रतिस्पर्धी पहुंच मिल सकती है।
ऑस्ट्रेलिया के साथ CECA को अंतिम रूप देने की तैयारी
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वर्ष 2022 में Economic Cooperation and Trade Agreement (ECTA) लागू हुआ था। अब दोनों देश इससे आगे बढ़ते हुए व्यापक Comprehensive Economic Cooperation Agreement (CECA) को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव (ओशिनिया) विश्वेश नेगी ने बताया कि दोनों देशों की वार्ता सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और वाणिज्य मंत्रालय इसके विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से काम कर रहा है।
उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष एक संतुलित और व्यापक व्यापार समझौते पर सहमति बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं तथा मुख्य वार्ताकारों के बीच जल्द ही बातचीत का अगला दौर आयोजित होगा।
भारत को क्या होगा फायदा?
यदि ASEAN और ऑस्ट्रेलिया के साथ प्रस्तावित व्यापारिक समझौते सफलतापूर्वक आगे बढ़ते हैं तो भारत को कई महत्वपूर्ण लाभ मिल सकते हैं।
- भारतीय निर्यात को नए बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी।
- विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
- मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी।
- कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, आईटी, फार्मा और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को नए अवसर मिलेंगे।
- भारत की इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में आर्थिक उपस्थिति और मजबूत होगी।
वैश्विक व्यापार रणनीति का अहम हिस्सा
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत वर्तमान समय में केवल मुक्त व्यापार समझौते करने पर ही नहीं बल्कि ऐसे समझौतों को आधुनिक और अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दे रहा है। बदलते वैश्विक व्यापार माहौल, भू-राजनीतिक चुनौतियों और नई सप्लाई चेन रणनीतियों को देखते हुए सरकार क्षेत्रीय साझेदारियों को मजबूत करना चाहती है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह तीन देशों की यात्रा भारत की इसी व्यापक आर्थिक और रणनीतिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दौरा केवल राजनयिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भारत की व्यापारिक कूटनीति को नई दिशा देने वाला मिशन साबित हो सकता है। ASEAN व्यापार समझौते के आधुनिकीकरण, ऑस्ट्रेलिया के साथ CECA को अंतिम रूप देने और न्यूजीलैंड के साथ संबंधों को नई ऊर्जा मिलने से भारत के लिए वैश्विक व्यापार, निवेश और निर्यात के नए अवसर खुल सकते हैं। यदि ये पहल सफल रहती हैं तो आने वाले वर्षों में भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक आर्थिक भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत हो सकती है।


