Healthcare Stocks | NBFC Stocks | Stock Market Investment: शेयर बाजार में निवेश को लेकर अक्सर सवाल उठता है कि लार्जकैप, मिडकैप या स्मॉलकैप में किसे चुना जाए। लेकिन व्हाइटओक कैपिटल ग्रुप के फाउंडर प्रशांत खेमका का मानना है कि निवेशकों को मार्केट कैपिटलाइजेशन के बजाय मजबूत बिजनेस मॉडल और बेहतर क्वालिटी वाली कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना है कि लंबी अवधि में वही कंपनियां बेहतर रिटर्न देती हैं, जिनकी कमाई लगातार बढ़ती है और जिनका बिजनेस टिकाऊ होता है।
हाल के दिनों में शेयर बाजार का माहौल पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक नजर आ रहा है। ऐसे समय में खेमका ने निवेशकों को जल्दबाजी में सेक्टर बदलने के बजाय मजबूत कंपनियों की पहचान कर उनमें निवेश बनाए रखने की सलाह दी है।
मार्केटकैप नहीं, कंपनी की क्वालिटी पर रखें फोकस
प्रशांत खेमका के मुताबिक, अलग-अलग समय में लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन बदलता रहता है। कई बार लार्जकैप आगे निकल जाते हैं तो कभी मिडकैप और स्मॉलकैप बेहतर रिटर्न देते हैं। इसलिए केवल मार्केटकैप देखकर निवेश करना सही रणनीति नहीं है।
उन्होंने बताया कि व्हाइटओक कैपिटल अपने पोर्टफोलियो में बार-बार मार्केटकैप के आधार पर बदलाव करने के बजाय उन कंपनियों को चुनने पर जोर देती है, जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत हो, मैनेजमेंट बेहतर हो और भविष्य में लगातार ग्रोथ की संभावना हो।
AI शेयरों में तेजी के बाद अब दिख रहा दबाव
खेमका ने कहा कि पिछले लंबे समय तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली थी। हालांकि अब इन शेयरों पर कुछ दबाव दिखाई दे रहा है और निवेशकों का उत्साह पहले जैसा नहीं रहा।
उनका मानना है कि फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि AI सेक्टर की तेजी पूरी तरह खत्म हो गई है। बाजार में इस तरह के उतार-चढ़ाव निवेश चक्र का सामान्य हिस्सा होते हैं।
AI निवेश घटने से भारत को मिला फायदा
उन्होंने बताया कि हाल के सप्ताहों में वैश्विक निवेशकों ने AI और सेमीकंडक्टर कंपनियों में निवेश कम किया है। इसका असर दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में भी देखने को मिला, जहां चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
खेमका के अनुसार, जब विदेशी निवेशकों ने AI आधारित कंपनियों से पैसा निकाला, तब भारत जैसे बाजारों को इसका फायदा मिला क्योंकि निवेश का एक हिस्सा भारतीय इक्विटी बाजार की ओर आया।
लंबी अवधि में टेक्नोलॉजी सेक्टर रहेगा मजबूत
हालांकि AI शेयरों में फिलहाल कमजोरी दिख रही है, लेकिन खेमका का मानना है कि लंबी अवधि के नजरिए से टेक्नोलॉजी सेक्टर अभी भी मजबूत बना रहेगा।
उन्होंने कहा कि दुनियाभर की कंपनियां डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और नई टेक्नोलॉजी पर निवेश जारी रखेंगी। AI का महत्व कम नहीं होगा बल्कि यह इंडस्ट्री के काम करने के तरीके को बदल देगा। ऐसे में अच्छी टेक्नोलॉजी कंपनियां भविष्य में भी ग्रोथ का बड़ा अवसर प्रदान कर सकती हैं।
उनके मुताबिक, कई मिडकैप टेक्नोलॉजी कंपनियां तेजी से बदलाव अपनाने की क्षमता रखती हैं और वे भविष्य में कुछ बड़ी कंपनियों से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
हेल्थकेयर सेक्टर में दिख रहे सबसे बेहतर अवसर
प्रशांत खेमका ने हेल्थकेयर सेक्टर को अपनी सबसे पसंदीदा थीम बताया। उनका कहना है कि इस सेक्टर में निवेश के कई विकल्प उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि फार्मा कंपनियां, हॉस्पिटल चेन और डायग्नोस्टिक कंपनियां अलग-अलग बिजनेस मॉडल पर काम करती हैं। इस विविधता की वजह से निवेशकों को ऐसी कंपनियां चुनने का मौका मिलता है जो आने वाले वर्षों में शानदार रिटर्न दे सकती हैं।
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग, मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और हेल्थ इंश्योरेंस का बढ़ता दायरा इस सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।
छोटी NBFC कंपनियों में निवेश के अच्छे मौके
खेमका ने कहा कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) में भी निवेश के आकर्षक अवसर दिखाई दे रहे हैं, खासकर उन छोटी NBFC कंपनियों में जो कम आय वाले ग्राहकों और छोटे कारोबारियों को सेवाएं देती हैं।
हाल के महीनों में अनसिक्योर्ड लोन को लेकर बढ़ती चिंताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की वजह से कई NBFC शेयरों में गिरावट आई है। इस करेक्शन के बाद कई कंपनियों की वैल्यूएशन पहले की तुलना में अधिक आकर्षक हो गई है।
उनका मानना है कि मजबूत बैलेंस शीट और बेहतर रिस्क मैनेजमेंट वाली NBFC कंपनियां लंबी अवधि में अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं।
डिफेंस और कैपिटल गुड्स सेक्टर भी पसंद
हेल्थकेयर और NBFC के अलावा खेमका ने इंडस्ट्रियल सेक्टर में भी निवेश के अवसर बताए।
उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र की डिफेंस कंपनियां, कैपिटल गुड्स निर्माता और मशीनरी बिजनेस भविष्य में अच्छी ग्रोथ दिखा सकते हैं। सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और विनिर्माण गतिविधियों में तेजी इन कंपनियों के लिए सकारात्मक कारक साबित हो सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है सीख?
प्रशांत खेमका की सलाह का सार यह है कि निवेशक केवल लार्जकैप, मिडकैप या स्मॉलकैप की बहस में न उलझें। इसके बजाय मजबूत बिजनेस मॉडल, अच्छी मैनेजमेंट क्वालिटी, टिकाऊ कमाई और लंबी अवधि की ग्रोथ क्षमता वाली कंपनियों पर ध्यान दें।
उन्होंने हेल्थकेयर, चुनिंदा छोटी NBFC, टेक्नोलॉजी और प्राइवेट डिफेंस कंपनियों को आने वाले वर्षों के लिए संभावनाओं वाले सेक्टर बताया है। हालांकि किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।


