नई दिल्ली: भारतीय शेयर बाजार को लेकर विदेशी निवेशकों का रुख इस समय पहले के मुकाबले कमजोर नजर आ रहा है। बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) के फंड मैनेजर सर्वे में भारत को एशिया का सबसे कम पसंद किया जाने वाला शेयर बाजार बताया गया है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब भारतीय कंपनियों की कमाई का आउटलुक धीरे-धीरे बेहतर होने की उम्मीद जताई जा रही है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, 7 से 13 अगस्त के बीच कराए गए BofA सर्वे में 98 फंड मैनेजरों ने हिस्सा लिया। सर्वे में भारत का नेट ओवरवेट स्कोर -32% रहा। इसका मतलब है कि जितने फंड मैनेजर भारतीय शेयरों में सामान्य से ज्यादा निवेश करने की स्थिति में हैं, उनकी तुलना में कम निवेश करने वालों की संख्या काफी अधिक है।
दिलचस्प बात यह है कि पिछले महीने एशिया में सबसे कम पसंद किए जाने वाले बाजार की जगह इंडोनेशिया के पास थी। अगस्त के सर्वे में भारत ने यह स्थान ले लिया। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के बीच भारतीय बाजार की वैल्यूएशन, ग्रोथ और भविष्य की संभावनाओं को लेकर सतर्कता बढ़ी है।
भारत से निवेशक क्यों बना रहे हैं दूरी?
सर्वे में भारतीय इक्विटी को लेकर सबसे बड़ी चिंताओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में स्पष्ट भागीदारी का अभाव शामिल है। दुनिया भर में AI से जुड़ी कंपनियों और तकनीक में निवेश तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में निवेशक उन बाजारों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं, जहां AI और नई तकनीक से सीधे तौर पर जुड़ी कंपनियों की मौजूदगी मजबूत है।
भारत में IT और टेक्नोलॉजी सेक्टर जरूर बड़ा है, लेकिन AI से जुड़ी वैश्विक निवेश कहानी में भारतीय शेयर बाजार की भूमिका को लेकर निवेशकों में अभी उतना उत्साह नहीं दिख रहा है।
इसके अलावा कमजोर आर्थिक ग्रोथ की चिंता भी निवेशकों के रुख को प्रभावित कर रही है। अगर कंपनियों की आय में अपेक्षित तेजी नहीं आती है, तो ऊंची वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहे शेयरों में दबाव बढ़ सकता है।
ऊंची वैल्यूएशन भी बनी चिंता
भारतीय शेयर बाजार लंबे समय से कई दूसरे एशियाई बाजारों की तुलना में प्रीमियम वैल्यूएशन पर कारोबार करता रहा है। इसका अर्थ है कि निवेशकों को भारतीय कंपनियों के लिए बेहतर ग्रोथ की उम्मीद रहती है। लेकिन जब ग्रोथ उम्मीदों के मुताबिक नहीं होती, तो ऊंची वैल्यूएशन सवालों के घेरे में आ जाती है।
BofA के सर्वे में सुधारों की कमी और ज्यादा वैल्यूएशन को भी भारत के प्रति कमजोर निवेश भावना की प्रमुख वजहों में शामिल किया गया है।
सर्वे के मुताबिक, करीब 32% फंड मैनेजरों ने कहा कि वे भारत में कम निवेश कर रहे हैं। यह आंकड़ा बताता है कि विदेशी निवेशकों का एक बड़ा हिस्सा फिलहाल भारतीय इक्विटी को लेकर आक्रामक रुख अपनाने के बजाय सावधानी बरत रहा है।
एशिया में ताइवान और जापान सबसे पसंदीदा
जहां भारत विदेशी निवेशकों की पसंद में सबसे नीचे पहुंच गया है, वहीं ताइवान और जापान निवेशकों की सबसे पसंदीदा जगहों में बने हुए हैं।
BofA सर्वे में विभिन्न एशियाई बाजारों का नेट ओवरवेट इस प्रकार रहा:
| देश | नेट ओवरवेट (%) |
|---|---|
| ताइवान | +55 |
| जापान | +50 |
| दक्षिण कोरिया | +23 |
| मलेशिया | 0 |
| न्यूजीलैंड | 0 |
| ऑस्ट्रेलिया | -5 |
| सिंगापुर | -5 |
| थाईलैंड | -5 |
| चीन | -18 |
| फिलीपींस | -23 |
| इंडोनेशिया | -27 |
| भारत | -32 |
इस सूची से साफ है कि ताइवान और जापान को लेकर निवेशकों का भरोसा भारत की तुलना में काफी ज्यादा है। दक्षिण कोरिया भी सकारात्मक नेट ओवरवेट के साथ निवेशकों की पसंद में ऊपर है।
इंडोनेशिया की स्थिति में हुआ सुधार
भारत के लिए चिंता की एक वजह यह भी है कि इंडोनेशिया, जो पिछले सर्वे में सबसे कम पसंद किया जाने वाला बाजार था, उसकी स्थिति में सुधार हुआ है।
अगस्त के सर्वे में 27% फंड मैनेजरों ने कहा कि वे इंडोनेशिया में कम निवेश कर रहे हैं, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 32% था। यानी इंडोनेशियाई बाजार को लेकर नकारात्मक रुख में कुछ कमी आई है।
इसके उलट भारत का नेट ओवरवेट स्कोर -32% तक पहुंच गया। यही वजह है कि एशिया के प्रमुख बाजारों में भारत को इस सर्वे में सबसे कम पसंद किया गया।
भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन भी दे रहा है संकेत
विदेशी निवेशकों की यह चिंता भारतीय बाजार में हाल की कमजोरी के बीच सामने आई है। घरेलू शेयर बाजार पिछले कुछ कारोबारी सत्रों से दबाव में है।
निफ्टी 50 में लगातार गिरावट और सेंसेक्स में कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। हालांकि, निफ्टी अपने हालिया निचले स्तर से कुछ रिकवरी कर चुका है, लेकिन पूरे साल के प्रदर्शन की बात करें तो भारतीय बाजार एशिया के प्रमुख बाजारों में कमजोर प्रदर्शन करने वालों में शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार, निफ्टी 50 मार्च में बने हालिया निचले स्तर से लगभग 8% ऊपर है। इसके बावजूद सालाना आधार पर इसका प्रदर्शन एशिया के प्रमुख शेयर बाजारों की तुलना में कमजोर बना हुआ है।
यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कंपनियों की कमाई का आउटलुक बेहतर होने की उम्मीद है। यानी एक तरफ कंपनियों के फंडामेंटल में सुधार की संभावना है, लेकिन दूसरी तरफ विदेशी निवेशक ऊंची वैल्यूएशन और ग्रोथ से जुड़े जोखिमों को देखते हुए फिलहाल ज्यादा सतर्क हैं।
क्या भारतीय बाजार के लिए यह बड़ा खतरा है?
सर्वे के आंकड़े निश्चित रूप से भारतीय शेयर बाजार के लिए चिंता का संकेत देते हैं, लेकिन इन्हें बाजार के भविष्य का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। फंड मैनेजरों का रुख समय के साथ बदल सकता है और बाजार में किसी भी सकारात्मक ट्रिगर के आने पर विदेशी निवेश फिर बढ़ सकता है।
भारत की अर्थव्यवस्था का आकार, घरेलू खपत, बैंकिंग सेक्टर में सुधार और कई कंपनियों की आय में संभावित बढ़ोतरी लंबे समय में बाजार के लिए सकारात्मक कारक बने रह सकते हैं।
हालांकि, मौजूदा समय में निवेशकों की प्राथमिकता केवल मजबूत आर्थिक विकास तक सीमित नहीं है। वे यह भी देख रहे हैं कि किसी बाजार में AI, टेक्नोलॉजी, उत्पादकता और नई अर्थव्यवस्था से जुड़ी कंपनियों का कितना बड़ा योगदान है।
यही वजह है कि भारतीय बाजार के लिए आगे सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि कंपनियों की कमाई में कितनी तेजी आती है और क्या मौजूदा वैल्यूएशन उस ग्रोथ को उचित ठहरा पाती है।
निवेशकों के लिए क्या है इसका मतलब?
विदेशी निवेशकों का सतर्क रुख यह संकेत देता है कि भारतीय शेयर बाजार में निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। खासकर उन शेयरों में दबाव देखने को मिल सकता है, जिनकी वैल्यूएशन बहुत ज्यादा है लेकिन कमाई की ग्रोथ उम्मीद के मुताबिक नहीं है।
वहीं, मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर कैश फ्लो और स्थिर कमाई वाली कंपनियां बाजार में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं।
इसलिए केवल विदेशी निवेशकों के मौजूदा सर्वे को देखकर बाजार में जल्दबाजी में फैसला लेना उचित नहीं होगा। निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल, वैल्यूएशन, आय वृद्धि और बाजार की व्यापक स्थिति को ध्यान में रखकर ही निवेश संबंधी निर्णय लेना चाहिए।
निष्कर्ष
BofA का यह सर्वे भारतीय शेयर बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जरूर है। भारत फिलहाल एशिया में विदेशी फंड मैनेजरों की सबसे कम पसंदीदा इक्विटी मार्केट बन गया है, जबकि ताइवान और जापान शीर्ष पसंद बने हुए हैं।
AI में सीमित स्पष्ट भागीदारी, कमजोर ग्रोथ की आशंका, ऊंची वैल्यूएशन और सुधारों की गति को लेकर सवाल भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ा रहे हैं। हालांकि, अगर आने वाले समय में कंपनियों की कमाई मजबूत होती है और आर्थिक विकास की रफ्तार निवेशकों की उम्मीदों के अनुरूप रहती है, तो विदेशी निवेशकों का रुख फिर बदल सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल समाचार और बाजार संबंधी जानकारी देने के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश का फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।


