Dream Job: पहाड़ों पर रहकर वीडियो बनाने की इस अनोखी नौकरी के लिए 3,500 से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया था। चुने गए 23 वर्षीय ली सिचेन को 30 दिनों के काम के बदले करीब 8.5 लाख रुपये मिले। जानिए कैसे मिली यह नौकरी और क्या था उनका असली काम।
शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर पहाड़ों के बीच रहकर काम करना बहुत से लोगों का सपना होता है। लेकिन अगर इसी सपने के लिए आपको मोटी सैलरी भी मिले, तो नौकरी और भी खास हो जाती है। चीन में एक युवक को कुछ ऐसा ही मौका मिला, जहां उसे सिर्फ 30 दिनों तक पहाड़ों के बीच रहकर वीडियो बनाने के बदले करीब 8.5 लाख रुपये दिए गए।
यह कोई सामान्य ट्रैवल जॉब नहीं थी। युवक को पहाड़ों पर बदलते मौसम, बादलों, धुंध, सूर्योदय और खूबसूरत प्राकृतिक नजारों को कैमरे में कैद करना था। इस अनोखी नौकरी के लिए हजारों लोगों ने आवेदन किया, लेकिन आखिरकार एक 23 वर्षीय ब्लॉगर को चुना गया।
30 दिन की नौकरी, 8.5 लाख रुपये की सैलरी
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के हेनान प्रांत में मौजूद लाओजुन माउंटेन सीनिक एरिया ने 8 जुलाई को एक अनोखी नौकरी का ऐलान किया था। इस पद को “क्लाउडस्केप ऑब्जर्वर” नाम दिया गया।
चुने गए व्यक्ति को 16 जुलाई से 15 अगस्त तक लाओजुन माउंटेन पर रहकर काम करना था। उसकी जिम्मेदारी पहाड़ों के ऊपर बनने वाले बादलों, धुंध, प्राकृतिक दृश्यों और दूसरी खास गतिविधियों के वीडियो बनाना और उन्हें नियमित रूप से ऑनलाइन शेयर करना था।
इस 30 दिन की नौकरी के लिए 60,000 चीनी युआन, यानी भारतीय मुद्रा में करीब 8.5 लाख रुपये, वेतन तय किया गया था। इसके अलावा नौकरी के दौरान रहने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई थी।
3,500 से ज्यादा लोगों ने किया आवेदन
नौकरी की घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा शुरू हो गई। इसे कई लोगों ने “ड्रीम जॉब” तक कहा। सिर्फ एक सप्ताह के भीतर इस पद के लिए 3,500 से ज्यादा आवेदन पहुंच गए।
आवेदन प्रक्रिया में उम्मीदवारों से तय हैशटैग के साथ अपने वीडियो जमा करने को कहा गया था। इन वीडियो की क्वालिटी और दर्शकों की प्रतिक्रिया के आधार पर उम्मीदवारों का मूल्यांकन किया गया।
आखिरकार हेनान के रहने वाले 23 वर्षीय ब्लॉगर ली सिचेन को चुना गया। सोशल मीडिया पर वह xiaozao नाम से कंटेंट बनाते हैं। इस तरह वह लाओजुन माउंटेन के पहले “क्लाउडस्केप ऑब्जर्वर” बन गए।
खास बात यह थी कि इस नौकरी के लिए पेशेवर फोटोग्राफरों ने भी आवेदन किया था। इसके बावजूद ली सिचेन अपने वीडियो और दर्शकों से मिले अच्छे रिस्पॉन्स के दम पर चयनित होने में सफल रहे।
सुबह 5 बजे शुरू होता था काम
पहली नजर में यह नौकरी बेहद आरामदायक लग सकती है। आखिर कौन नहीं चाहेगा कि वह रोज पहाड़ों के खूबसूरत नजारों के बीच काम करे? लेकिन ली सिचेन के लिए यह काम उतना आसान नहीं था।
उनका दिन सुबह करीब 5 बजे शुरू होता था। सूरज निकलने से पहले ही वह शूटिंग शुरू कर देते थे। दिनभर उन्हें पहाड़ के अलग-अलग हिस्सों में जाकर फुटेज जुटानी होती थी और काम सूरज डूबने के बाद तक चलता था।
उनका लक्ष्य सिर्फ खूबसूरत तस्वीरें लेना नहीं था। उन्हें दिन के अलग-अलग समय और अलग-अलग मौसम में पहाड़ों के बदलते रूप को रिकॉर्ड करना था।
वीडियो बनाने के दौरान सीखी कई नई तकनीकें
ली सिचेन ने इस दौरान लाओजुन माउंटेन के लिए बादलों, धुंध, पहाड़ों के नजारों और लाइट शो से जुड़े वीडियो बनाए।
इस नौकरी ने उन्हें नई तकनीकें सीखने का मौका भी दिया। उन्होंने वीडियो शूटिंग, एडिटिंग, कलर ग्रेडिंग और ड्रोन ऑपरेशन जैसी स्किल्स पर काम किया।
हालांकि, उनके सामने एक बड़ी चुनौती लगातार बनी हुई थी। आवेदन के समय उनके वीडियो को दर्शकों ने पसंद किया था। इसलिए नौकरी मिलने के बाद भी उन पर ऐसा कंटेंट तैयार करने का दबाव था, जिसे लोग ऑनलाइन पसंद करें और शेयर करें।
मौसम ने भी बढ़ाई मुश्किल
पहाड़ों पर वीडियो बनाने वाले ली सिचेन के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मौसम था।
बादलों और धुंध को अपने हिसाब से नियंत्रित नहीं किया जा सकता। कई बार ऐसा होता था कि जिस खास नजारे को कैमरे में रिकॉर्ड करने की उम्मीद होती, खराब मौसम के कारण वह संभव ही नहीं हो पाता।
ली ने खराब मौसम में काम करने के अनुभव को काफी तकलीफदेह बताया। इसके बावजूद उन्होंने पूरे 30 दिनों तक शूटिंग जारी रखी।
अपना काम पूरा करने के बाद ली ने कहा कि समय बहुत तेजी से बीत गया। इस दौरान उन्होंने सिर्फ टूरिस्ट साइट के लिए वीडियो नहीं बनाए, बल्कि अपने व्लॉग भी शेयर किए। इनमें पहाड़ पर उनकी रोजमर्रा की जिंदगी, काम करने का अनुभव और मुश्किलों की झलक दिखाई गई।
आखिर लाओजुन माउंटेन को बाहरी क्रिएटर की जरूरत क्यों पड़ी?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लाओजुन माउंटेन में पहले से ही एक फुल-टाइम वीडियो टीम मौजूद है। फिर बाहर से किसी क्रिएटर को एक महीने के लिए नियुक्त करने की जरूरत क्यों पड़ी?
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, लाओजुन माउंटेन के एक प्रतिनिधि, जिनका सरनेम झांग है, ने बताया कि उनका मकसद पहाड़ और उसके नजारों को एक नए नजरिए से दिखाना था।
उन्होंने क्लाउडस्केप ऑब्जर्वर को साइट की नियमित टीम के लिए एक तरह की “तीसरी आंख” बताया। उनके मुताबिक, बाहर से आया क्रिएटर ऐसी चीजों को अलग तरीके से देख सकता है, जिन्हें वहां की नियमित टीम शायद सामान्य नजर से देखती हो।
यानी इस प्रयोग का मकसद सिर्फ वीडियो बनाना नहीं, बल्कि एक बाहरी कंटेंट क्रिएटर के नजरिए से पर्यटक स्थल को पेश करना था।
आगे फिर मिल सकती है ऐसी नौकरी
लाओजुन माउंटेन के प्रतिनिधि ने संकेत दिया कि अगर यह प्रयोग सफल रहा तो भविष्य में क्लाउडस्केप ऑब्जर्वर जैसे पद के लिए दोबारा नियुक्ति की जा सकती है।
लाओजुन माउंटेन चीन के हेनान प्रांत के लुआनचुआन काउंटी में स्थित है। यह इलाका अपने खूबसूरत “बादलों के समुद्र” यानी Sea of Clouds के नजारों के लिए जाना जाता है।
यह चीन के प्रमुख ताओवादी पहाड़ों में भी शामिल है और इसका इतिहास 2,000 साल से अधिक पुराना बताया जाता है। इसका संबंध प्राचीन चीनी दार्शनिक लाओ ज़ू से भी जोड़ा जाता है, जिन्हें पारंपरिक रूप से ताओवाद का संस्थापक माना जाता है।
क्या है इस नौकरी की कमाई का सीक्रेट?
ली सिचेन की कहानी सिर्फ 8.5 लाख रुपये की सैलरी की वजह से खास नहीं है। इसका असली सबक यह है कि कंटेंट क्रिएशन और डिजिटल स्किल्स आज नौकरी के नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
इस नौकरी में युवक को सिर्फ पहाड़ पर रहना नहीं था। उसे लगातार ऐसा विजुअल कंटेंट तैयार करना था जो पर्यटकों और ऑनलाइन दर्शकों का ध्यान खींच सके। यानी उसकी कमाई के पीछे वीडियो क्रिएशन, स्टोरीटेलिंग, सोशल मीडिया और ऑडियंस एंगेजमेंट जैसी स्किल्स अहम थीं।
ली सिचेन ने अपने आवेदन के वीडियो से ही यह साबित किया कि वह दर्शकों को आकर्षित करने वाला कंटेंट बना सकते हैं। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी और हजारों उम्मीदवारों के बीच उन्हें यह अनोखी नौकरी मिल गई।
इस तरह 30 दिनों की यह नौकरी उनके लिए सिर्फ 8.5 लाख रुपये की कमाई का जरिया नहीं रही, बल्कि सोशल मीडिया पर अपनी पहचान मजबूत करने और नई डिजिटल स्किल्स सीखने का भी मौका बन गई।


