भारत में कई शहर अपनी किसी खास कृषि उपज के लिए देशभर में पहचान रखते हैं। महाराष्ट्र का जळगांव जहां Banana Capital of India के नाम से मशहूर है, वहीं क्या आप जानते हैं कि कटहल (Jackfruit) की भी एक राजधानी मानी जाती है? यह शहर अपनी विशाल कटहल मंडियों, खास स्वाद और बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण देशभर में प्रसिद्ध है।
अगर आप भी जानना चाहते हैं कि भारत का Jackfruit Capital कौन-सा शहर है, तो आइए जानते हैं इस अनोखे फल और उसकी राजधानी के बारे में।
Highlights
- भारत में कटहल की अनौपचारिक राजधानी है पनरुति (Panruti), तमिलनाडु।
- पनरुति, कुड्डालोर (Cuddalore) जिले में स्थित है।
- कटहल दुनिया का सबसे बड़ा पेड़ पर लगने वाला फल माना जाता है।
- तमिलनाडु और केरल में कटहल को राज्य फल का दर्जा प्राप्त है।
भारत का Jackfruit Capital कौन-सा है?

भारत में कटहल (Jackfruit) की कोई आधिकारिक राजधानी घोषित नहीं की गई है, लेकिन तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले का पनरुति (Panruti) देशभर में “Jackfruit Capital of India” के नाम से प्रसिद्ध है।
पनरुति में बड़े पैमाने पर कटहल की खेती होती है। यहां का उत्पादन, गुणवत्ता और देशभर में होने वाली सप्लाई इसे एक अलग पहचान दिलाते हैं। फल पकने के मौसम में यहां की मंडियां विशाल कटहलों से भर जाती हैं और ट्रकों के जरिए इन्हें देश के अलग-अलग राज्यों तक भेजा जाता है।
क्यों खास है पनरुति?

पनरुति की पहचान सिर्फ कटहल तक सीमित नहीं है। यहां की जलवायु, मिट्टी और खेती की पारंपरिक तकनीकें कटहल उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती हैं।
इसके पीछे कई कारण हैं—
- गर्म और आर्द्र जलवायु
- उपजाऊ दोमट मिट्टी
- लंबे समय से कटहल की खेती की परंपरा
- बड़े व्यापारिक बाजार
- देशभर में सप्लाई की मजबूत व्यवस्था
इन्हीं वजहों से पनरुति के कटहल स्वाद, सुगंध और आकार के लिए अलग पहचान रखते हैं।
कटहल आखिर इतना खास क्यों है?

कटहल दुनिया का सबसे बड़ा पेड़ पर लगने वाला फल माना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Artocarpus heterophyllus है। यह दक्षिण एशिया का मूल पौधा है और भारत में सदियों से उगाया जा रहा है।
कटहल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका उपयोग अलग-अलग अवस्थाओं में किया जाता है।
- कच्चा कटहल सब्जी बनाने में इस्तेमाल होता है।
- अचार और विभिन्न व्यंजन तैयार किए जाते हैं।
- पकने पर इसका मीठा फल सीधे खाया जाता है।
- इसके बीज भी उबालकर या भूनकर खाए जाते हैं।
उत्तर भारत में ‘लेढ़ा’ के नाम से प्रसिद्ध

पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में छोटे कच्चे कटहल को ‘लेढ़ा’ कहा जाता है।
बरसात के मौसम में इसकी सब्जी काफी लोकप्रिय होती है। कई लोग इसे शाकाहारी मटन भी कहते हैं क्योंकि इसकी बनावट और स्वाद काफी अलग होता है।
दक्षिण भारत में कटहल से बनते हैं कई व्यंजन
दक्षिण भारत में कटहल केवल फल नहीं बल्कि स्थानीय खानपान का अहम हिस्सा है।
यहां कटहल से तैयार किए जाते हैं—
- कटहल चिप्स
- करी
- हलवा
- मिठाइयां
- आइसक्रीम
- स्मूदी
- जैम
- प्रोसेस्ड स्नैक्स
केरल और तमिलनाडु में कटहल आधारित फूड इंडस्ट्री तेजी से विकसित हो रही है।
किन राज्यों में होती है सबसे ज्यादा खेती?

भारत में कटहल की खेती कई राज्यों में होती है।
प्रमुख उत्पादक राज्य हैं—
- तमिलनाडु
- केरल
- कर्नाटक
- महाराष्ट्र
- असम
- पश्चिम बंगाल
- त्रिपुरा
- बिहार
- झारखंड
- उत्तर प्रदेश
हालांकि, व्यावसायिक पहचान और बड़े व्यापारिक नेटवर्क के कारण पनरुति को सबसे अधिक प्रसिद्धि मिली है।
कटहल को मिला है राज्य फल का दर्जा

कटहल केवल भारत में ही नहीं बल्कि कई देशों में बेहद महत्वपूर्ण फल माना जाता है।
- बांग्लादेश का राष्ट्रीय फल है।
- श्रीलंका का भी राष्ट्रीय फल माना जाता है।
- भारत के केरल और तमिलनाडु में इसे राज्य फल का दर्जा प्राप्त है।
सेहत के लिए भी फायदेमंद
कटहल पोषण से भरपूर फल है। इसमें कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं।
इसमें मौजूद हैं—
- विटामिन C
- विटामिन A
- पोटैशियम
- फाइबर
- एंटीऑक्सीडेंट
- कैल्शियम
- मैग्नीशियम
इसी वजह से इसे इम्यूनिटी बढ़ाने, पाचन बेहतर रखने और ऊर्जा देने वाला फल माना जाता है।
बढ़ रही है अंतरराष्ट्रीय मांग
हाल के वर्षों में कटहल की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ी है। खासकर Plant-based Meat के विकल्प के रूप में कच्चे कटहल का उपयोग अमेरिका, यूरोप और कई एशियाई देशों में बढ़ा है।
भारत से भी कटहल और उससे बने प्रोसेस्ड उत्पादों का निर्यात लगातार बढ़ रहा है, जिससे किसानों को बेहतर आय के अवसर मिल रहे हैं।
निष्कर्ष
जिस तरह महाराष्ट्र का जळगांव भारत का Banana Capital कहलाता है, उसी तरह तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले का पनरुति अपनी विशाल खेती, व्यापार और सांस्कृतिक पहचान के कारण भारत का Jackfruit Capital माना जाता है। कटहल केवल स्वादिष्ट फल ही नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कृषि उत्पाद भी बन चुका है। आने वाले वर्षों में प्रोसेसिंग और निर्यात बढ़ने के साथ इसकी आर्थिक अहमियत और बढ़ने की उम्मीद है।


