HighLights
- जुलाई के लिए 22 लाख टन चीनी का घरेलू बिक्री कोटा जारी।
- अलनीनो और कमजोर मानसून से गन्ना उत्पादन पर चिंता।
- दिल्ली-NCR में चीनी ₹50 प्रति किलो तक पहुंची।
- फिलहाल चीनी निर्यात की अनुमति मिलने की संभावना कम।
नई दिल्ली: देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार ने जुलाई 2026 के लिए 22 लाख टन चीनी का मासिक घरेलू बिक्री कोटा जारी किया है। यह आवंटन पिछले साल जुलाई के बराबर रखा गया है, जबकि पिछले कुछ महीनों में सरकार ने घरेलू कोटा सीमित रखा था। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब अलनीनो, कमजोर मानसून और गन्ने की संभावित कम पैदावार को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। इन परिस्थितियों के चलते चीनी के निर्यात पर पहले से ही रोक लगी हुई है और घरेलू बाजार में कीमतों में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।
जुलाई के लिए 22 लाख टन चीनी का घरेलू कोटा
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा जारी जुलाई 2026 के रिलीज ऑर्डर के अनुसार घरेलू बाजार में बिक्री के लिए 22 लाख टन चीनी उपलब्ध कराई जाएगी। यह मात्रा पिछले वर्ष जुलाई के समान है।
हालांकि, पूरे 2025-26 चीनी सीजन (अक्टूबर से सितंबर) की बात करें तो अब तक घरेलू बाजार के लिए कुल 223 लाख टन चीनी का कोटा जारी किया जा चुका है। यह पिछले सीजन की समान अवधि के 229.5 लाख टन के मुकाबले लगभग 3 प्रतिशत कम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार घरेलू मांग और उपलब्ध स्टॉक के बीच संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है ताकि भविष्य में कीमतों में तेज उछाल से बचा जा सके।
किस राज्य को कितना चीनी कोटा मिला?
जुलाई 2026 के लिए राज्यों को निम्नानुसार चीनी आवंटित की गई है—
| राज्य | आवंटित कोटा |
|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 8.23 लाख टन |
| महाराष्ट्र | 7.18 लाख टन |
| कर्नाटक | 3.18 लाख टन |
| अन्य राज्य | 3.41 लाख टन |
ध्यान देने वाली बात यह है कि—
- उत्तर प्रदेश का कोटा पिछले वर्ष की तुलना में करीब 9% कम किया गया है।
- महाराष्ट्र को लगभग 8.5% अधिक आवंटन मिला है।
- कर्नाटक का कोटा करीब 31% बढ़ाया गया है।
- अन्य राज्यों का कुल आवंटन लगभग 12% कम रहा है।
इससे स्पष्ट है कि सरकार ने राज्यों में उत्पादन क्षमता और उपलब्ध स्टॉक को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग आवंटन किया है।
अलनीनो और कमजोर मानसून से क्यों बढ़ी चिंता?
इस वर्ष मौसम वैज्ञानिकों ने अलनीनो प्रभाव और सामान्य से कमजोर मानसून की आशंका जताई है। इसका सीधा असर गन्ने की खेती पर पड़ सकता है।
यदि पर्याप्त बारिश नहीं होती है तो—
- गन्ने की पैदावार घट सकती है।
- चीनी उत्पादन कम हो सकता है।
- चीनी मिलों के पास उपलब्ध स्टॉक सीमित रह सकता है।
- घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
यही कारण है कि सरकार फिलहाल निर्यात खोलने के बजाय घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता दे रही है।
बाजार में चीनी के दाम बढ़ने लगे
देश के कई हिस्सों में चीनी की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
प्रमुख कीमतें
- दिल्ली-NCR खुदरा कीमत: लगभग ₹50 प्रति किलो
- कुछ महीने पहले कीमत लगभग ₹46 प्रति किलो थी।
- 30 जून तक देश की औसत खुदरा कीमत: लगभग ₹47 प्रति किलो
- 30 सितंबर 2025 की औसत खुदरा कीमत: ₹46.54 प्रति किलो
वहीं थोक बाजार में भी कीमतों में मामूली बढ़ोतरी देखने को मिली है।
| अवधि | औसत थोक कीमत |
|---|---|
| 30 जून | ₹4,363.68 प्रति क्विंटल |
| सितंबर 2025 | ₹4,317.63 प्रति क्विंटल |
हालांकि अभी कीमतों में बहुत बड़ी छलांग नहीं आई है, लेकिन उत्पादन संबंधी चिंताओं के कारण बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है।
निर्यात पर फिलहाल राहत की उम्मीद नहीं
उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि जुलाई का कोटा पिछले वर्ष के बराबर रखना इस बात का संकेत है कि सरकार फिलहाल घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना चाहती है।
गन्ने की खेती का रकबा बहुत अधिक नहीं बढ़ा है और मौसम संबंधी जोखिम भी बने हुए हैं। ऐसे में अगले चीनी सीजन में भी बड़े पैमाने पर निर्यात की अनुमति मिलने की संभावना फिलहाल कम दिखाई देती है।
यदि मानसून सामान्य रहता है और उत्पादन अनुमान से बेहतर होता है, तभी सरकार भविष्य में निर्यात नीति पर पुनर्विचार कर सकती है।
किसानों और उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?
गन्ना किसानों के लिए कीमतों में बढ़ोतरी कुछ हद तक सकारात्मक संकेत हो सकती है, क्योंकि बेहतर मांग से चीनी मिलों की नकदी स्थिति मजबूत हो सकती है। दूसरी ओर, उपभोक्ताओं के लिए चीनी महंगी होने से घरेलू बजट पर असर पड़ सकता है, खासकर त्योहारी सीजन से पहले यदि कीमतों में और बढ़ोतरी होती है।
सरकार की कोशिश फिलहाल यही है कि बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहे और कीमतें अनियंत्रित न हों।
आगे क्या देखना होगा?
आने वाले महीनों में चीनी बाजार की दिशा मुख्य रूप से इन कारकों पर निर्भर करेगी—
- मानसून का प्रदर्शन
- अलनीनो का वास्तविक असर
- गन्ने की पैदावार
- चीनी मिलों का उत्पादन
- सरकार की निर्यात नीति
- घरेलू मांग और स्टॉक की स्थिति
यदि मौसम अनुकूल रहता है तो कीमतों में स्थिरता आ सकती है, लेकिन कमजोर उत्पादन की स्थिति में चीनी के दाम और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


