ईरान-इजरायल युद्ध के बाद बदली रणनीति, एक महीने की ऊर्जा जरूरत पूरी करने की तैयारी
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान सप्लाई चेन पर पड़े असर ने भारत को ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को लेकर नई रणनीति अपनाने के लिए मजबूर कर दिया है। अब केंद्र सरकार कच्चे तेल (Crude Oil), एलपीजी (LPG) और एलएनजी (LNG) का बड़ा रणनीतिक भंडार (Strategic Reserve) तैयार करने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य ऐसा स्टोरेज नेटवर्क तैयार करना है, जिससे आपातकाल की स्थिति में देश की करीब एक महीने की घरेलू मांग पूरी की जा सके।
यह योजना केवल क्रूड ऑयल तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पहली बार LPG और LNG जैसी गैसों के लिए भी दीर्घकालिक रणनीतिक स्टोरेज विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
पश्चिम एशिया संकट ने दिखाई भारत की सबसे बड़ी कमजोरी
हालिया पश्चिम एशिया संकट के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रभावित होने की आशंका ने पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति को हिला दिया था। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल और गैस आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है।
संकट के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि यदि समुद्री आपूर्ति कुछ दिनों के लिए भी बाधित होती है तो भारत को ईंधन की उपलब्धता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी अनुभव के बाद सरकार अब दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा निवेश करने जा रही है।
नई रणनीति पर काम कर रही है पेट्रोलियम मंत्रालय की समिति
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए एक उच्च स्तरीय समिति गठित की है। यह समिति कई महत्वपूर्ण पहलुओं का अध्ययन कर रही है, जिनमें शामिल हैं—
- रणनीतिक स्टोरेज के लिए उपयुक्त स्थान
- जमीन के ऊपर और भूमिगत भंडारण का मॉडल
- संचालन व्यवस्था
- लागत और सुरक्षा मानक
- भविष्य की मांग के अनुरूप क्षमता
सरकार का उद्देश्य ऐसा ढांचा तैयार करना है जो किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रख सके।
फिलहाल भारत के पास कितना क्रूड रिजर्व है?
वर्तमान में भारत के पास लगभग 3.9 करोड़ बैरल (39 मिलियन बैरल) का रणनीतिक कच्चा तेल भंडार उपलब्ध है।
इससे जुड़ी प्रमुख बातें:
- लगभग 8 दिनों के आयात की जरूरत पूरी हो सकती है।
- सरकारी रणनीतिक भंडार के अलावा रिफाइनरियों और तेल कंपनियों के पास मौजूद स्टॉक मिलाकर 70 दिनों से अधिक की तेल मांग पूरी की जा सकती है।
- हालांकि चीन जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों की तुलना में भारत का रणनीतिक रिजर्व अभी काफी छोटा माना जाता है।
12 करोड़ बैरल तक बढ़ सकता है रणनीतिक भंडार
सरकार पहले से ही पूर्वी और पश्चिमी तट पर भूमिगत गुफाओं (Underground Caverns) में अतिरिक्त स्टोरेज तैयार कर रही है।
योजना के प्रमुख बिंदु:
- अगले लगभग 5 वर्षों में नई परियोजनाएं पूरी करने का लक्ष्य।
- कुल क्षमता बढ़ाकर करीब 12 करोड़ बैरल तक ले जाने की तैयारी।
- मौजूदा क्षमता से दोगुने से भी अधिक रणनीतिक भंडार तैयार होगा।
इससे भारत भविष्य में वैश्विक तेल संकट का बेहतर तरीके से सामना कर सकेगा।
LPG और LNG स्टोरेज सबसे बड़ी चुनौती
कच्चे तेल की तुलना में LPG और LNG का भंडारण कहीं अधिक जटिल माना जाता है।
LPG क्यों मुश्किल है?
- दबाव (High Pressure) में तरल रूप में रखना पड़ता है।
- विशेष स्टोरेज टैंक की जरूरत होती है।
- सुरक्षा मानक बेहद सख्त होते हैं।
LNG क्यों और चुनौतीपूर्ण है?
- लगभग -162 डिग्री सेल्सियस तापमान पर स्टोर करना पड़ता है।
- अत्याधुनिक क्रायोजेनिक टैंक की आवश्यकता होती है।
- निर्माण और रखरखाव दोनों महंगे होते हैं।
LPG का रणनीतिक रिजर्व अभी बेहद सीमित
तक्षशिला इंस्टीट्यूशन के अनुसार,
- भारत की दीर्घकालिक LPG स्टोरेज क्षमता करीब 1.4 लाख टन है।
- इससे केवल लगभग दो दिन की घरेलू खपत पूरी हो सकती है।
- अतिरिक्त स्टॉक रिफाइनरियों और आयात टर्मिनलों पर मौजूद रहता है, लेकिन वह रणनीतिक रिजर्व नहीं माना जाता।
सरकार ने सरकारी तेल कंपनियों को आपातकालीन उपयोग के लिए LPG स्टॉक बढ़ाने के निर्देश भी दिए हैं।
LNG के लिए भी बन रही नई नीति
भारत के पास अभी तक LNG का कोई औपचारिक रणनीतिक रिजर्व नहीं है।
सरकार की प्रस्तावित नीति के अनुसार:
- LNG टर्मिनल ऑपरेटरों को सामान्य जरूरत से 10% अतिरिक्त स्टोरेज रखना होगा।
- राष्ट्रीय आपातकाल की स्थिति में सरकार इस गैस का उपयोग कर सकेगी।
- पेट्रोनेट LNG जैसी कंपनियां नए स्टोरेज टैंक विकसित कर रही हैं।
ईरान संकट के दौरान उठाने पड़े थे आपात कदम
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया संकट के दौरान भारत को कई एहतियाती कदम उठाने पड़े थे।
इनमें शामिल थे—
- डीजल और LPG सप्लाई का प्रबंधन
- गैस उपलब्धता पर निगरानी
- जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से वैकल्पिक सहयोग
- ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त समन्वय
इसी अनुभव ने रणनीतिक भंडारण की जरूरत को और मजबूत कर दिया।
जापान के साथ भी बढ़ सकता है सहयोग
रिपोर्टों के मुताबिक भारत और जापान भविष्य में LNG स्टॉक और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार कर रहे हैं।
यदि यह सहयोग आगे बढ़ता है तो दोनों देश आपातकालीन परिस्थितियों में एक-दूसरे की ऊर्जा आपूर्ति को समर्थन देने की व्यवस्था विकसित कर सकते हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है और अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85% से अधिक आयात करता है। ऐसे में यदि वैश्विक संकट, युद्ध या समुद्री मार्ग बाधित होते हैं तो उसका सीधा असर घरेलू अर्थव्यवस्था, महंगाई और उद्योगों पर पड़ सकता है।
रणनीतिक रिजर्व बढ़ने से:
- ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।
- वैश्विक सप्लाई शॉक का असर कम होगा।
- ईंधन की कीमतों में अचानक उछाल से राहत मिल सकती है।
- उद्योगों और परिवहन क्षेत्र को निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
- राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता दोनों को मजबूती मिलेगी।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया में हालिया तनाव ने भारत को यह एहसास करा दिया है कि केवल आयात पर निर्भर रहना भविष्य में बड़ा जोखिम बन सकता है। यही वजह है कि अब सरकार क्रूड ऑयल के साथ-साथ LPG और LNG का भी बड़ा रणनीतिक भंडार तैयार करने की दिशा में काम कर रही है। यदि यह योजना तय समय पर पूरी होती है तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी और किसी भी वैश्विक संकट के दौरान देश की ईंधन आपूर्ति पर असर काफी हद तक सीमित किया जा सकेगा।


