Japan Economy: एक तरफ जापान का शेयर बाजार नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया है, तो दूसरी ओर देश की करेंसी येन (Yen) लगातार कमजोर होती जा रही है। जून तिमाही में जापान का प्रमुख शेयर सूचकांक निक्केई 225 (Nikkei 225) इतिहास की सबसे बड़ी तिमाही तेजी दर्ज करते हुए 37% उछल गया। वहीं दूसरी तरफ डॉलर के मुकाबले येन 40 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर जापान की अर्थव्यवस्था में यह विरोधाभासी स्थिति क्यों बन रही है।
जून तिमाही में शेयर बाजार ने बनाया नया इतिहास
जापान के शेयर बाजार के लिए अप्रैल-जून तिमाही बेहद शानदार रही। निक्केई 225 इंडेक्स इस दौरान करीब 37% चढ़ गया, जो 1965 से रिकॉर्ड रखे जाने के बाद किसी भी तिमाही की सबसे बड़ी तेजी मानी जा रही है।
मंगलवार के कारोबार में भी बाजार की तेजी जारी रही।
- निक्केई 225 0.86% बढ़कर 70,062.32 पर बंद हुआ।
- टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स 0.73% की बढ़त के साथ 4,010.88 अंक पर पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशकों की मजबूत खरीदारी और टेक्नोलॉजी कंपनियों में बढ़ती दिलचस्पी ने इस तेजी को नई रफ्तार दी है।
अमेरिकी बाजार की तेजी का मिला फायदा
जापानी बाजार को सबसे बड़ा समर्थन अमेरिका से मिला। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने की खबर के बाद वैश्विक निवेशकों की चिंता कम हुई, जिससे अमेरिकी शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली।
सोमवार को टेक्नोलॉजी शेयरों से भरपूर NASDAQ इंडेक्स करीब 2.04% चढ़ गया। इसका सकारात्मक असर अगले ही दिन जापान के बाजार पर भी दिखाई दिया और निवेशकों ने टेक शेयरों में जमकर खरीदारी की।
इंडस्ट्रियल आउटपुट में भी हुआ सुधार
जापान की अर्थव्यवस्था के लिए एक और अच्छी खबर यह रही कि मई महीने में औद्योगिक उत्पादन (Industrial Output) अप्रैल के मुकाबले 0.5% बढ़ा।
हालांकि यह वृद्धि बहुत बड़ी नहीं मानी जा रही, लेकिन लगातार कमजोर मांग के बीच इसे सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिला।
फिर भी क्यों टूट रही है जापानी करेंसी?
जहां शेयर बाजार रिकॉर्ड बना रहा है, वहीं जापान की राष्ट्रीय मुद्रा येन लगातार दबाव में बनी हुई है।
मंगलवार के शुरुआती कारोबार में डॉलर के मुकाबले येन 162.19 प्रति डॉलर तक पहुंच गई, जो करीब 40 वर्षों का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है।
येन में गिरावट की प्रमुख वजहें हैं—
- जापान में लंबे समय तक बेहद कम ब्याज दरें।
- अमेरिका और जापान के बीच ब्याज दरों का बड़ा अंतर।
- निवेशकों का बेहतर रिटर्न के लिए डॉलर आधारित परिसंपत्तियों की ओर रुख।
- विदेशी पूंजी का अमेरिका की ओर प्रवाह।
इसी कारण डॉलर मजबूत और येन कमजोर होती जा रही है।
सरकार ने दिया हस्तक्षेप का संकेत
येन की लगातार गिरावट को देखते हुए जापानी सरकार और केंद्रीय बैंक पर दबाव बढ़ गया है।
सरकार का कहना है कि यदि करेंसी में अत्यधिक उतार-चढ़ाव जारी रहता है तो बाजार में हस्तक्षेप सहित सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। इससे पहले भी जापान कई बार विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप कर चुका है ताकि येन को और कमजोर होने से रोका जा सके।
शेयर बाजार बढ़ रहा है, फिर भी अर्थव्यवस्था क्यों चिंता में?
आमतौर पर मजबूत शेयर बाजार को अच्छी अर्थव्यवस्था का संकेत माना जाता है, लेकिन जापान की स्थिति थोड़ी अलग है।
कमजोर येन की वजह से जापान की बड़ी निर्यातक कंपनियों को फायदा मिल रहा है क्योंकि विदेशों में उनकी कमाई डॉलर में होती है। यही कारण है कि निवेशक इन कंपनियों के शेयर खरीद रहे हैं और बाजार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है।
लेकिन दूसरी ओर कमजोर करेंसी के कारण तेल, गैस, खाद्य पदार्थ और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं। इससे आम लोगों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है और घरेलू खपत प्रभावित हो सकती है।
आगे निवेशकों को किन बातों पर नजर रखनी होगी?
आने वाले महीनों में जापान के बाजार की दिशा कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी।
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों का फैसला।
- जापान के केंद्रीय बैंक (BOJ) की मौद्रिक नीति।
- येन की आगे की चाल।
- वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम।
- विदेशी निवेशकों की खरीदारी का रुझान।
यदि येन में स्थिरता आती है और वैश्विक माहौल सकारात्मक बना रहता है तो जापानी शेयर बाजार में तेजी जारी रह सकती है। हालांकि करेंसी में लगातार कमजोरी जापान की अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनी रहेगी।


