Highlights
- 80 वर्षीय महिला की प्रीमियम सीट बदलकर 28वीं पंक्ति में कर दी गई।
- अतिरिक्त शुल्क देने के बावजूद मिली मिडिल सीट, यात्रा में हुई भारी परेशानी।
- कर्नाटक राज्य उपभोक्ता आयोग ने IndiGo पर ₹55,000 का मुआवजा लगाया।
- आयोग ने कहा- वरिष्ठ नागरिक की स्वास्थ्य स्थिति की अनदेखी करना सेवा में कमी है।
नई दिल्ली: देश की प्रमुख एयरलाइन IndiGo को एक 80 वर्षीय महिला यात्री के साथ हुई लापरवाही भारी पड़ गई। अतिरिक्त पैसे देकर फर्स्ट रो (Front Row) की प्रीमियम सीट बुक कराने के बावजूद एयरलाइन ने बोर्डिंग से पहले उनकी सीट बदलकर 28वीं पंक्ति में कर दी। महिला की दो बड़ी सर्जरी हो चुकी थीं और उन्होंने व्हीलचेयर सुविधा भी बुक कराई थी। इस मामले में अब कर्नाटक राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एयरलाइन को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए ₹55,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया है।
प्रीमियम सीट के लिए अतिरिक्त पैसे दिए, फिर भी बदली सीट
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह मामला दिसंबर 2023 का है। कर्नाटक निवासी अंसू ए. अमीन ने बेंगलुरु से अहमदाबाद की उड़ान के लिए IndiGo की टिकट बुक कराई थी।
80 वर्षीय महिला की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उन्होंने पहली पंक्ति की सीट (1B) चुनने के लिए अतिरिक्त शुल्क का भुगतान किया। साथ ही एयरपोर्ट पर व्हीलचेयर सेवा भी बुक कराई। टिकट और सीट चयन सहित उन्होंने करीब ₹13,906 खर्च किए थे।
लेकिन जब वह एयरपोर्ट पहुंचीं तो उन्हें बताया गया कि उनकी 1B सीट हटाकर 28B कर दी गई है।
एयरलाइन स्टाफ ने नहीं दिया कोई विकल्प
महिला ने एयरलाइन स्टाफ से सीट बदलने का कारण पूछा, लेकिन उन्हें बताया गया कि अब उनके पास 28B सीट पर यात्रा करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
जरूरी यात्रा होने के कारण उन्हें मजबूरी में 28वीं पंक्ति की मिडिल सीट पर बैठकर सफर करना पड़ा। कम लेग स्पेस के कारण उनकी टांगों में काफी दर्द हुआ और पूरी यात्रा उनके लिए बेहद असुविधाजनक रही।
लीगल नोटिस के बाद पहुंचा मामला उपभोक्ता आयोग
यात्रा पूरी होने के बाद महिला ने IndiGo को ₹80,000 मुआवजे की मांग करते हुए लीगल नोटिस भेजा। जब एयरलाइन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
सुनवाई के दौरान IndiGo ने स्वीकार किया कि महिला ने फ्रंट रो की सीट बुक कराई थी। कंपनी ने सफाई दी कि उसी दिन फ्लाइट में ऑडिट टीम मौजूद थी, जिसके लिए पहली पंक्ति की सीटें आरक्षित करनी पड़ीं। इसलिए महिला की सीट बदलनी पड़ी।
एयरलाइन ने यह भी दलील दी कि महिला ने बिना विरोध किए यात्रा पूरी की थी, इसलिए इसे सेवा में कमी नहीं माना जाना चाहिए।
पहले मिला ₹8,000, फिर राज्य आयोग ने बढ़ाया मुआवजा
जिला उपभोक्ता आयोग ने शुरुआती फैसले में महिला को ₹8,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया था। हालांकि महिला ने इसे अपर्याप्त बताते हुए कर्नाटक राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में अपील की।
राज्य आयोग की बेंच ने अपने 18 जून के फैसले में कहा कि एयरलाइन ने वरिष्ठ नागरिक की उम्र, स्वास्थ्य और मेडिकल स्थिति को पूरी तरह नजरअंदाज किया। अतिरिक्त शुल्क लेने के बाद भी प्रीमियम सीट उपलब्ध नहीं कराना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी है।
आयोग ने मुआवजे की राशि बढ़ाकर ₹50,000 कर दी और मुकदमे के खर्च के लिए ₹5,000 अतिरिक्त देने का आदेश दिया। इस तरह IndiGo को कुल ₹55,000 का भुगतान करना होगा।
क्या है इस फैसले का महत्व?
यह फैसला उन सभी यात्रियों के लिए अहम माना जा रहा है जो अतिरिक्त शुल्क देकर सीट चयन जैसी प्रीमियम सेवाएं खरीदते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि एयरलाइन यदि किसी यात्री से विशेष सुविधा के लिए अतिरिक्त पैसा लेती है, तो बिना उचित कारण और पर्याप्त विकल्प दिए उसे बदल नहीं सकती। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं वाले यात्रियों के मामले में एयरलाइंस को अतिरिक्त संवेदनशीलता बरतनी होगी।


