नई दिल्ली। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी लगातार अपडेट का इंतजार कर रहे हैं। आयोग की बैठकों का दौर जारी है और विभिन्न कर्मचारी संगठनों की ओर से वेतन संरचना, भत्तों और फिटमेंट फैक्टर को लेकर अपनी-अपनी मांगें रखी जा रही हैं।
इसी बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) को लेकर हो रही है। क्योंकि यही वह गणितीय फार्मूला है, जिसके आधार पर वर्तमान बेसिक पे को संशोधित कर नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। यदि 8वें वेतन आयोग में 2.10 फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश होती है, तो सबसे ऊंचे वेतन स्तर यानी लेवल-18 के कर्मचारियों का बेसिक वेतन बढ़कर 5.25 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सरकार ने अभी तक फिटमेंट फैक्टर पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। 2.10 का आंकड़ा केवल विभिन्न कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों के अनुमानों पर आधारित है।
क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर एक गणितीय गुणांक (Mathematical Multiplier) होता है, जिसका उपयोग पुराने वेतनमान को नए वेतनमान में बदलने के लिए किया जाता है। जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, कर्मचारियों की मौजूदा बेसिक सैलरी को तय फिटमेंट फैक्टर से गुणा करके नया बेसिक पे निकाला जाता है।
यानी,
नई बेसिक सैलरी = वर्तमान बेसिक सैलरी × फिटमेंट फैक्टर
उदाहरण के तौर पर यदि किसी कर्मचारी की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹56,100 है और फिटमेंट फैक्टर 2.10 तय होता है, तो नई बेसिक सैलरी होगी—
₹56,100 × 2.10 = ₹1,17,810
यही कारण है कि फिटमेंट फैक्टर कर्मचारियों की सैलरी तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पिछले वेतन आयोगों में कितना रहा फिटमेंट फैक्टर?
भारत में हर वेतन आयोग के दौरान फिटमेंट फैक्टर अलग-अलग रहा है।
| वेतन आयोग | फिटमेंट फैक्टर |
|---|---|
| छठा वेतन आयोग | 1.86 |
| सातवां वेतन आयोग | 2.57 |
| आठवां वेतन आयोग | अभी तय नहीं |
यानी 8वें वेतन आयोग में कितना फिटमेंट फैक्टर होगा, इसका अंतिम फैसला सरकार आयोग की सिफारिशों के बाद ही करेगी।
8वें वेतन आयोग में 2.10 फिटमेंट फैक्टर की चर्चा क्यों?
कुछ कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार इस बार वित्तीय भार को देखते हुए 2.10 के आसपास फिटमेंट फैक्टर रख सकती है।
यदि ऐसा होता है तो सभी कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में उसी अनुपात में वृद्धि होगी। हालांकि कर्मचारी संगठन इससे अधिक फिटमेंट फैक्टर की मांग भी कर रहे हैं।
वर्तमान में लेवल-1 से लेवल-18 तक की बेसिक सैलरी
| पे लेवल | वर्तमान बेसिक पे (₹) |
|---|---|
| लेवल-1 | 18,000 |
| लेवल-2 | 19,900 |
| लेवल-3 | 21,700 |
| लेवल-4 | 25,500 |
| लेवल-5 | 29,200 |
| लेवल-6 | 35,400 |
| लेवल-7 | 44,900 |
| लेवल-8 | 47,600 |
| लेवल-9 | 53,100 |
| लेवल-10 | 56,100 |
| लेवल-11 | 67,700 |
| लेवल-12 | 78,800 |
| लेवल-13 | 1,18,500 |
| लेवल-13A | 1,31,100 |
| लेवल-14 | 1,44,200 |
| लेवल-15 | 1,82,200 |
| लेवल-16 | 2,05,400 |
| लेवल-17 | 2,25,000 |
| लेवल-18 | 2,50,000 |
2.10 फिटमेंट फैक्टर होने पर संभावित नई बेसिक सैलरी
| पे लेवल | संभावित बेसिक पे (₹) |
|---|---|
| लेवल-1 | 37,800 |
| लेवल-2 | 41,790 |
| लेवल-3 | 45,570 |
| लेवल-4 | 53,550 |
| लेवल-5 | 61,320 |
| लेवल-6 | 74,340 |
| लेवल-7 | 94,290 |
| लेवल-8 | 99,960 |
| लेवल-9 | 1,11,510 |
| लेवल-10 | 1,17,810 |
| लेवल-11 | 1,42,170 |
| लेवल-12 | 1,65,480 |
| लेवल-13 | 2,48,850 |
| लेवल-13A | 2,75,310 |
| लेवल-14 | 3,02,820 |
| लेवल-15 | 3,82,620 |
| लेवल-16 | 4,31,340 |
| लेवल-17 | 4,72,500 |
| लेवल-18 | 5,25,000 |
क्या सिर्फ बेसिक सैलरी ही बढ़ेगी?
नहीं। सरकारी कर्मचारियों के वेतन में केवल बेसिक पे ही शामिल नहीं होता। बेसिक सैलरी बढ़ने के बाद कई अन्य भत्तों पर भी असर पड़ता है, जैसे—
- महंगाई भत्ता (DA)
- मकान किराया भत्ता (HRA)
- यात्रा भत्ता (TA)
- पेंशन
- ग्रेच्युटी
- लीव एनकैशमेंट
इसलिए फिटमेंट फैक्टर बढ़ने का कुल वेतन और रिटायरमेंट बेनिफिट्स पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है।
कब लागू हो सकता है 8वां वेतन आयोग?
फिलहाल आयोग विभिन्न राज्यों में कर्मचारियों और संगठनों से सुझाव ले रहा है। इसके बाद अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपेगा। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही नया वेतन ढांचा लागू होगा। इसलिए फिलहाल किसी भी संभावित फिटमेंट फैक्टर या नई सैलरी को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए।
निष्कर्ष
फिटमेंट फैक्टर 8वें वेतन आयोग का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है क्योंकि इसी के आधार पर लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नई बेसिक सैलरी तय होगी। यदि 2.10 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है तो लेवल-18 के कर्मचारियों का बेसिक वेतन 5.25 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि यह केवल संभावित गणना है। अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही सामने आएगा।


