नई दिल्ली: टाटा समूह की बात होती है तो सबसे पहले जेआरडी टाटा, रतन टाटा या एन. चंद्रशेखरन जैसे बड़े नाम याद आते हैं। लेकिन इसी समूह में एक ऐसा शख्स भी था जिसने बिना सुर्खियों में आए टाटा के दो सबसे सफल ब्रांड—Titan और Tanishq—की मजबूत नींव रखी। उनका नाम था ज़र्क्सेस (जर्क्सेस) देसाई।
देसाई सिर्फ एक कॉर्पोरेट अधिकारी नहीं थे, बल्कि दूरदर्शी रणनीतिकार थे। उन्होंने ऐसे समय में घड़ी और ज्वेलरी कारोबार में कदम रखा, जब भारत में इन दोनों क्षेत्रों पर पारंपरिक कंपनियों और असंगठित बाजार का दबदबा था। आज टाइटन कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹3.7 लाख करोड़ के आसपास पहुंच चुका है और तनिष्क देश का सबसे बड़ा संगठित ज्वेलरी ब्रांड बन चुका है। इस सफलता की नींव ज़र्क्सेस देसाई की सोच और धैर्य ने रखी थी।
Highlights
- टाइटन और तनिष्क के संस्थापक विज़नरी थे ज़र्क्सेस देसाई।
- JRD Tata के भरोसे से 9 साल बाद शुरू हुई Titan Watches।
- पहले ताज होटल्स के विस्तार में निभाई थी अहम भूमिका।
- भारत में क्वार्ट्ज घड़ियों की शुरुआत कर बदल दिया पूरा बाजार।
- तनिष्क ने देश के ज्वेलरी कारोबार की तस्वीर बदल दी।
ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई, फिर टाटा ग्रुप में एंट्री
1937 में एक प्रतिष्ठित पारसी परिवार में जन्मे ज़र्क्सेस देसाई ने इंग्लैंड की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से Politics, Philosophy and Economics (PPE) की पढ़ाई की। इसके बाद 1961 में उन्होंने Tata Administrative Services (TAS) जॉइन किया।
यहीं से उनका सफर टाटा समूह के साथ शुरू हुआ।
ताज होटल्स को नई पहचान दिलाने में निभाई बड़ी भूमिका

करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने ताज होटल्स के पूर्व चेयरमैन अजीत केरकर के साथ काम किया। उस समय ताज होटल्स का नेटवर्क सीमित था, लेकिन देसाई ने इसके विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
गोवा के Fort Aguada से लेकर उदयपुर के प्रतिष्ठित Lake Palace Hotel तक कई लग्जरी प्रॉपर्टी विकसित करने में उनका अहम योगदान माना जाता है। यही वजह रही कि ताज होटल्स धीरे-धीरे देश की सबसे प्रतिष्ठित लग्जरी होटल चेन बन गई।
होटल इंडस्ट्री छोड़ लिया बड़ा फैसला
जब उनका करियर शानदार दौर में था, तब उन्होंने अचानक होटल बिजनेस छोड़ने का फैसला किया।
उनका मानना था कि वह सिर्फ अमीर लोगों के लिए होटल बनाते-बनाते थक चुके हैं।
इसके बाद वह CIDCO से जुड़े और प्रसिद्ध आर्किटेक्ट चार्ल्स कोरिया के साथ मिलकर नवी मुंबई के विकास की परियोजनाओं में योगदान दिया।
जब भारत में घड़ी खरीदना भी आसान नहीं था
1980 के दशक में भारत में घड़ी खरीदना आज जितना आसान नहीं था।
उस दौर में HMT की घड़ियों के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था। विदेशी घड़ियां केवल तस्करी या विदेश से लाने वालों के जरिए उपलब्ध होती थीं।
यहीं से ज़र्क्सेस देसाई ने एक बड़ा अवसर देखा।
उन्होंने तय किया कि टाटा समूह भारत को विश्वस्तरीय घड़ी ब्रांड देगा।
9 साल तक संघर्ष चलता रहा
आज टाइटन की सफलता जितनी आसान दिखती है, उसकी शुरुआत उतनी ही कठिन थी।
लाइसेंस राज, सरकारी मंजूरियां, नियम-कानून और कई तरह की बाधाओं के कारण यह परियोजना लगातार अटकती रही।
करीब 9 साल तक इस प्रोजेक्ट पर संघर्ष चलता रहा।
एक समय ऐसा भी आया जब टीम ने लगभग उम्मीद छोड़ दी थी।
JRD Tata ने नहीं टूटने दिया हौसला
यही वह समय था जब जेआरडी टाटा ने ज़र्क्सेस देसाई पर पूरा भरोसा दिखाया।
उन्होंने साफ कहा कि इस परियोजना को किसी भी हालत में बंद नहीं किया जाएगा।
यही भरोसा बाद में भारतीय कॉर्पोरेट इतिहास की सबसे बड़ी सफलताओं में बदल गया।
1984 में लॉन्च हुई Titan Watches
आखिरकार 1984 में Tamil Nadu Industrial Development Corporation (TIDCO) के साथ संयुक्त उपक्रम के जरिए Titan Watches की शुरुआत हुई।
उस समय देसाई ने एक बड़ा जोखिम लिया।
उन्होंने मैकेनिकल घड़ियों की जगह केवल Quartz Watches पर दांव लगाया।
यह फैसला उस दौर में काफी साहसिक माना गया क्योंकि भारतीय ग्राहक पारंपरिक घड़ियों के आदी थे।
होसुर में तैयार की नई वर्कफोर्स
देसाई ने तमिलनाडु के होसुर में फैक्ट्री स्थापित की।
उन्होंने स्थानीय युवाओं और विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण देकर कुशल कर्मचारी तैयार किए।
इस मॉडल ने न केवल रोजगार बढ़ाया बल्कि कंपनी को गुणवत्ता और लागत दोनों में प्रतिस्पर्धी बनाया।
मोजार्ट की धुन बनी Titan की पहचान
1987 में जब टाइटन ने अपने प्रसिद्ध विज्ञापन के साथ बाजार में कदम रखा तो उसकी पहचान बनी मोजार्ट की धुन।
कुछ ही वर्षों में टाइटन भारतीय घड़ी बाजार के 50 प्रतिशत से अधिक हिस्से पर कब्जा करने में सफल रही।
आज भी उसका संगीत सुनते ही लोगों को Titan याद आ जाता है।
फिर आया Tanishq का आइडिया
घड़ियों में सफलता मिलने के बाद ज़र्क्सेस देसाई ने भारत के असंगठित ज्वेलरी बाजार को चुना।
यह निर्णय भी आसान नहीं था।
उस समय भारतीय ग्राहक स्थानीय ज्वेलर्स पर ज्यादा भरोसा करते थे।
फिर भी उन्होंने Tanishq लॉन्च किया।
शुरुआत में हुआ भारी नुकसान
तनिष्क की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं रही।
कंपनी को शुरुआती वर्षों में नुकसान उठाना पड़ा।
लेकिन देसाई ने रणनीति बदली।
उन्होंने शुद्धता की जांच, पारदर्शी बिलिंग, आधुनिक डिजाइन और ग्राहक विश्वास को सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाया।
यही मॉडल आगे चलकर टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
आज तनिष्क देश का सबसे बड़ा संगठित ज्वेलरी ब्रांड है और टाइटन के कुल कारोबार का लगभग 85% राजस्व ज्वेलरी व्यवसाय से आता है।
आज भी जिंदा है उनकी विरासत
ज़र्क्सेस देसाई का निधन 27 जून 2016 को हुआ।
हालांकि वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन टाइटन, तनिष्क और टाटा समूह की कई सफल परियोजनाओं में उनकी सोच आज भी दिखाई देती है।
उन्होंने साबित किया कि किसी कंपनी की सबसे बड़ी ताकत केवल उसका ब्रांड नहीं बल्कि उसके पीछे काम करने वाले दूरदर्शी लोग होते हैं।
निष्कर्ष
ज़र्क्सेस देसाई उन गिने-चुने कॉर्पोरेट नेताओं में शामिल हैं जिन्होंने बिना प्रचार के भारत के सबसे सफल ब्रांड्स तैयार किए। ताज होटल्स के विस्तार से लेकर टाइटन और तनिष्क की स्थापना तक, उन्होंने हर चुनौती को अवसर में बदला। यदि जेआरडी टाटा का भरोसा और देसाई की दूरदृष्टि न होती, तो शायद भारत को टाइटन और तनिष्क जैसे वैश्विक स्तर के ब्रांड इतनी जल्दी नहीं मिलते।


