भारत में खरीफ सीजन की खेती काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है। लेकिन इस बार El Nino (अल नीनो) के प्रभाव के कारण सामान्य से कम बारिश होने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून कमजोर रहता है तो धान जैसी अधिक पानी वाली फसलों की खेती करने वाले किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती करने और खेतों में नमी बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं।
अगर किसान समय रहते अपनी खेती की रणनीति बदल लेते हैं तो कम बारिश के बावजूद अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं।
Highlights
- कमजोर मानसून के बीच कम पानी वाली फसलों की खेती की सलाह।
- दलहन, तिलहन, मिलेट्स और मक्का हो सकते हैं बेहतर विकल्प।
- मल्चिंग और बीज उपचार से सूखे का असर किया जा सकता है कम।
- सही फसल चयन से किसानों की आय पर नहीं पड़ेगा बड़ा असर।
El Nino क्या है और किसानों के लिए क्यों है चिंता?
El Nino एक जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर के सतही पानी का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है। इसका असर दुनिया के कई देशों के मौसम पर पड़ता है। भारत में इसका सबसे बड़ा प्रभाव मानसून पर देखने को मिलता है।
जब El Nino सक्रिय होता है तो देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होती है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई, सिंचाई और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए किसानों को मौसम के अनुसार फसल का चुनाव करना बेहद जरूरी हो जाता है।
कम पानी में तैयार होने वाली तिलहन फसलें
कम बारिश की स्थिति में तिल (Sesame) सबसे अच्छी तिलहन फसलों में से एक मानी जाती है। इसकी खेती उन क्षेत्रों में आसानी से की जा सकती है जहां पानी अधिक समय तक नहीं रुकता।
तिल की खेती के लिए केवल 2 से 3 सिंचाई पर्याप्त होती हैं। यदि बीच-बीच में हल्की बारिश हो जाए तो सिंचाई की जरूरत और भी कम हो जाती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खेत में जलभराव न होने दें। इसके लिए खेत की मेड़ों को उचित ढलान दें ताकि अतिरिक्त वर्षा का पानी आसानी से बाहर निकल जाए।
इसके अलावा किसान अरहर और मूंग जैसी दलहनी फसलों की खेती भी कर सकते हैं। ये फसलें अपेक्षाकृत कम पानी में अच्छी पैदावार देती हैं और मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती हैं।
मिलेट्स की खेती बनेगी फायदे का सौदा
कम बारिश वाले क्षेत्रों के लिए मिलेट्स (मोटे अनाज) सबसे सुरक्षित विकल्प माने जाते हैं।
इनमें प्रमुख फसलें हैं—
- ज्वार
- बाजरा
- रागी
इन फसलों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। कई बार केवल एक सिंचाई और सामान्य वर्षा के सहारे भी अच्छी उपज मिल जाती है।
सरकार भी पिछले कुछ वर्षों से मिलेट्स को बढ़ावा दे रही है क्योंकि ये पोषण से भरपूर होने के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक सहनशील हैं।
मक्का की खेती भी रहेगा बेहतर विकल्प
मक्का भी खरीफ मौसम की ऐसी फसल है जिसे सीमित पानी में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है।
मक्का की फसल लगभग 60 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है।
इसके लिए सामान्यतः 2 से 3 सिंचाई पर्याप्त मानी जाती है। यदि मानसून के दौरान हल्की-फुल्की बारिश होती रहती है तो सिंचाई की आवश्यकता और कम हो सकती है।
मक्का की खेती के लिए खेत की बहुत अधिक विशेष तैयारी भी नहीं करनी पड़ती, जिससे लागत भी अपेक्षाकृत कम रहती है।
सूखे से बचाव के लिए अपनाएं ये 2 जरूरी तरीके
कम बारिश की स्थिति में केवल सही फसल चुनना ही काफी नहीं है। खेत में नमी बनाए रखने और पौधों की शुरुआती वृद्धि मजबूत करने के लिए कुछ वैज्ञानिक उपाय भी जरूरी हैं।
1. मल्चिंग तकनीक अपनाएं
मल्चिंग में फसल के आसपास सूखी घास, पत्तियां या जैविक अवशेष बिछाए जाते हैं।
इससे कई फायदे मिलते हैं—
- मिट्टी में लंबे समय तक नमी बनी रहती है।
- पानी का वाष्पीकरण कम होता है।
- खरपतवार की समस्या घटती है।
- सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है।
- पौधों की जड़ों को अधिक सुरक्षा मिलती है।
2. बीज उपचार जरूर करें
बुवाई से पहले बीजों का उपचार करने से पौधों की अंकुरण क्षमता बेहतर होती है।
बीज उपचार के फायदे—
- सूखे की स्थिति में पौधों की सहनशीलता बढ़ती है।
- बीमारियों का खतरा कम होता है।
- पौधों की शुरुआती वृद्धि मजबूत होती है।
- उत्पादन में सुधार देखने को मिलता है।
खेत की तैयारी कैसे करें?
कम बारिश के अनुमान को देखते हुए किसान निम्नलिखित तैयारियां पहले से कर सकते हैं—
- खेत की अच्छी जुताई करें।
- वर्षा जल संरक्षण की व्यवस्था करें।
- खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें।
- मौसम के अनुसार प्रमाणित बीजों का चयन करें।
- कृषि विभाग की सलाह के अनुसार बुवाई करें।
- सिंचाई के लिए उपलब्ध पानी का संतुलित उपयोग करें।
कृषि विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम के दौर में किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ मौसम आधारित कृषि प्रबंधन अपनाना होगा। यदि कम बारिश का अनुमान है तो अधिक पानी वाली फसलों के बजाय कम पानी में तैयार होने वाली फसलें चुनना जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।
साथ ही मल्चिंग, बीज उपचार, जल संरक्षण और संतुलित पोषण प्रबंधन जैसी तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी फसल को सूखे के प्रभाव से काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं।
निष्कर्ष
El Nino के कारण यदि मानसून कमजोर रहता है तो किसानों के लिए समय रहते सही निर्णय लेना बेहद जरूरी होगा। दलहन, तिलहन, मिलेट्स और मक्का जैसी कम पानी वाली फसलों का चयन करके उत्पादन का जोखिम कम किया जा सकता है। इसके साथ ही मल्चिंग और बीज उपचार जैसी वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर कम वर्षा की स्थिति में भी अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है। मौसम की नियमित जानकारी लेते रहें और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार खेती करें।


