Pakistan Economy: 80 साल बाद भी IMF के कर्ज पर निर्भर पाकिस्तान, जानिए क्यों बार-बार खड़ा हो जाता है आर्थिक संकट
पाकिस्तान को बने करीब 80 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन आज भी उसकी अर्थव्यवस्था गहरे आर्थिक संकटों से जूझ रही है। देश की हालत यह है कि उसे अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए बार-बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF का दरवाजा खटखटाना पड़ता है।
कई दशकों में पाकिस्तान को आर्थिक सुधारों और कर्ज के रूप में अरबों डॉलर की मदद मिल चुकी है, लेकिन इसके बावजूद देश भुगतान संकट, विदेशी मुद्रा की कमी और बढ़ते कर्ज जैसी समस्याओं से बाहर नहीं निकल पाया है।
फिलहाल पाकिस्तान करीब 7 अरब डॉलर के IMF कार्यक्रम के तहत है। वहीं, देश पर सरकारी कर्ज उसकी कुल अर्थव्यवस्था यानी GDP का लगभग 70 फीसदी तक पहुंच चुका है।
सरकार की कमाई का बड़ा हिस्सा जा रहा कर्ज चुकाने में
पाकिस्तान की सबसे बड़ी आर्थिक चुनौतियों में से एक बढ़ता हुआ कर्ज है। सरकार की आय का बड़ा हिस्सा पुराने कर्ज और उसके ब्याज को चुकाने में खर्च हो जाता है।
इसके अलावा, देश का टैक्स सिस्टम कमजोर है, निर्यात सीमित है और ऊर्जा क्षेत्र भी लंबे समय से संकट में है। इन समस्याओं के कारण पाकिस्तान को अपनी अर्थव्यवस्था चलाने के लिए विदेशी सहायता और कर्ज पर निर्भर रहना पड़ता है।
आईएमएफ के कार्यक्रम से पाकिस्तान को 2023 में डिफॉल्ट के करीब पहुंचने के बाद विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने और आर्थिक स्थिरता लाने में मदद मिली, लेकिन बुनियादी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।
पाकिस्तान 25 बार जा चुका है IMF के पास
आईएमएफ के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान 1950 में इस संस्था का सदस्य बना था। इसके बाद से वह करीब 25 बार IMF के साथ अलग-अलग आर्थिक समझौते कर चुका है।
हालांकि हर समझौता बेलआउट पैकेज नहीं था, लेकिन बार-बार IMF की मदद लेने की स्थिति यह दिखाती है कि पाकिस्तान लंबे समय से विदेशी मुद्रा संकट और आर्थिक असंतुलन से जूझ रहा है।
सितंबर 2024 में IMF ने पाकिस्तान के लिए करीब 7 अरब डॉलर के विस्तारित कोष सुविधा कार्यक्रम को मंजूरी दी थी। इससे पहले 2023 में पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की स्टैंडबाय व्यवस्था भी मिली थी।
IMF से मिली अरबों डॉलर की मदद
मई 2026 में IMF ने पाकिस्तान के मौजूदा आर्थिक कार्यक्रम की समीक्षा पूरी की। इसके बाद करीब 1.1 अरब डॉलर की नई किस्त जारी करने को मंजूरी दी गई।
IMF के मुताबिक, विस्तारित कोष सुविधा और लचीलापन एवं स्थिरता सुविधा को मिलाकर पाकिस्तान को अब तक करीब 4.8 अरब डॉलर जारी किए जा चुके हैं।
हालांकि, इस मदद से पाकिस्तान को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन देश की पुरानी आर्थिक कमजोरियां अब भी खत्म नहीं हुई हैं।
विदेशी मुद्रा संकट पाकिस्तान की सबसे बड़ी परेशानी
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी समस्या विदेशी मुद्रा की कमी है। जब आयात खर्च, विदेशी कर्ज की किस्त और दूसरी देनदारियां बढ़ जाती हैं, तो देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ जाता है।
ऐसी स्थिति में पाकिस्तान को दूसरे देशों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से आर्थिक सहायता लेनी पड़ती है।
2023 में पाकिस्तान डिफॉल्ट के बेहद करीब पहुंच गया था। इसके बाद IMF के नए कार्यक्रम ने उसे कुछ समय के लिए राहत दी।
धीमी रफ्तार से बढ़ रही पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था
आईएमएफ के अनुमान के मुताबिक, 2026 में पाकिस्तान की वास्तविक GDP ग्रोथ करीब 3.6 फीसदी रहने का अनुमान है।
वहीं, महंगाई दर लगभग 7.2 फीसदी रह सकती है। साल 2025 में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का आकार करीब 407.8 अरब डॉलर रहने का अनुमान लगाया गया था।
हालांकि IMF ने यह भी चेतावनी दी है कि वैश्विक तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के सामने जोखिम अभी खत्म नहीं हुए हैं।
रक्षा खर्च बढ़ा, विकास पर खर्च सीमित
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति खराब होने के बावजूद देश ने रक्षा बजट में बढ़ोतरी की है।
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पाकिस्तान सरकार ने रक्षा क्षेत्र के लिए करीब 3 लाख करोड़ रुपये का बजट रखा है, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग 18 फीसदी ज्यादा है।
वहीं, विकास कार्यों के लिए संघीय बजट करीब 1 लाख करोड़ रुपये रखा गया है।
आलोचकों का कहना है कि जब देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है, तब विकास, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
80 साल बाद भी कर्ज के सहारे पाकिस्तान
आजादी के 80 साल बाद पाकिस्तान के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वह बार-बार आर्थिक संकट में क्यों फंस जाता है।
कम टैक्स आय, कमजोर निर्यात, बढ़ता कर्ज, ऊर्जा संकट और सरकारी खर्च का असंतुलन पाकिस्तान की आर्थिक समस्याओं की मुख्य वजहें हैं।
IMF की मदद से पाकिस्तान को समय-समय पर राहत जरूर मिलती रही है, लेकिन जब तक वह अपनी मूल आर्थिक कमजोरियों को दूर नहीं करता, तब तक कर्ज के इस चक्र से निकलना मुश्किल नजर आता है।


