HighLights
- दुनिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज 1602 में एम्स्टर्डम में शुरू हुआ।
- डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) के शेयरों से शुरू हुई थी आधुनिक शेयर बाजार की कहानी।
- आज यह यूरोनेक्स्ट का हिस्सा है, जिसकी मार्केट वैल्यू करीब ₹1.5 लाख करोड़ है।
नई दिल्ली। भारत का बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है। इसकी स्थापना 1875 में हुई थी और यह दुनिया का 10वां सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे पहला और सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज कौन-सा है? इसकी शुरुआत करीब 424 साल पहले हुई थी और इसकी कहानी आधुनिक शेयर बाजार की नींव मानी जाती है।
आज जिस तरह दुनिया भर के निवेशक शेयर बाजार में कंपनियों के शेयर खरीदते और बेचते हैं, उसकी शुरुआत 17वीं सदी में नीदरलैंड से हुई थी। यही वजह है कि एम्स्टर्डम स्टॉक एक्सचेंज को आधुनिक पूंजी बाजार का जन्मस्थान भी कहा जाता है।
1602 में हुई थी दुनिया के पहले स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत
दुनिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज एम्स्टर्डम स्टॉक एक्सचेंज (Amsterdam Stock Exchange) है। इसकी स्थापना वर्ष 1602 में हुई थी, जब डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) ने पहली बार आम निवेशकों के लिए अपने शेयर जारी किए।
उस दौर में यह दुनिया की पहली ऐसी कंपनी थी जिसने लोगों से पूंजी जुटाने के लिए शेयर बेचे। इसके बाद निवेशकों को इन शेयरों की खरीद-बिक्री के लिए एक संगठित बाजार की जरूरत पड़ी और इसी आवश्यकता ने दुनिया के पहले स्टॉक एक्सचेंज को जन्म दिया।
डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने लिखी शेयर बाजार की नई कहानी
VOC यानी Vereenigde Oostindische Compagnie उस समय दुनिया की सबसे शक्तिशाली व्यापारिक कंपनियों में शामिल थी। कंपनी एशिया के देशों, खासकर भारत, इंडोनेशिया, श्रीलंका और मसाला व्यापार वाले क्षेत्रों में कारोबार करती थी।
भारत के साथ भी डच ईस्ट इंडिया कंपनी का गहरा व्यापारिक संबंध था। कंपनी ने भारत के कई बंदरगाहों पर व्यापारिक केंद्र स्थापित किए थे। इसी वजह से दुनिया के पहले शेयर बाजार का भारत से भी ऐतिहासिक जुड़ाव माना जाता है।
पहले सिर्फ इसी कंपनी के शेयरों का होता था कारोबार
एम्स्टर्डम स्टॉक एक्सचेंज के शुरुआती वर्षों में केवल डच ईस्ट इंडिया कंपनी के शेयर और बॉन्ड का ही कारोबार होता था। धीरे-धीरे अन्य कंपनियां भी इस बाजार से जुड़ने लगीं और यह दुनिया का पहला नियमित सिक्योरिटीज ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म बन गया।
उस दौर में शेयर कागज के प्रमाणपत्र (Paper Shares) के रूप में जारी किए जाते थे, जिन्हें निवेशक एक-दूसरे को बेच सकते थे।
1611 में बनी पहली स्टॉक एक्सचेंज बिल्डिंग
एम्स्टर्डम नगर परिषद ने वर्ष 1611 में प्रसिद्ध वास्तुकार हेंड्रिक डी कीजर को एक विशेष इमारत तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी, जहां शेयरों का आधिकारिक कारोबार हो सके।
यह इमारत एम्स्टर्डम के Rokin इलाके में बनाई गई थी और इसे दुनिया का पहला समर्पित स्टॉक एक्सचेंज भवन माना जाता है। बाद में 1835 में जमीन धंसने के कारण इस भवन को गिरा दिया गया और उसकी जगह नया एक्सचेंज बनाया गया।
कॉफी हाउसों में भी होती थी शेयरों की खरीद-बिक्री
हालांकि एक्सचेंज की इमारत मौजूद थी, लेकिन उस समय निवेशक अक्सर कॉफी हाउस, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर बैठकर भी शेयरों और बॉन्ड की खरीद-बिक्री करते थे। उस दौर के कॉफी हाउस निवेशकों और व्यापारियों के मिलने-जुलने के प्रमुख केंद्र बन गए थे।
इन्हीं अनौपचारिक बैठकों ने बाद में संगठित शेयर बाजार की संस्कृति को मजबूत किया।
2000 में बना यूरोप का सबसे बड़ा एक्सचेंज
22 सितंबर 2000 को एम्स्टर्डम स्टॉक एक्सचेंज का ब्रसेल्स स्टॉक एक्सचेंज और पेरिस स्टॉक एक्सचेंज के साथ विलय कर यूरोनेक्स्ट (Euronext) की स्थापना की गई।
बाद में इसमें कई अन्य यूरोपीय एक्सचेंज भी शामिल हुए। आज यूरोनेक्स्ट यूरोप के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज समूहों में गिना जाता है और इसका रजिस्टर्ड ऑफिस भी नीदरलैंड में स्थित है।
आज कितनी है यूरोनेक्स्ट की हैसियत?
आज एम्स्टर्डम स्टॉक एक्सचेंज, यूरोनेक्स्ट समूह का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यूरोनेक्स्ट स्वयं एक सूचीबद्ध (Listed) कंपनी है और इसका बाजार पूंजीकरण (Market Capitalisation) भारतीय मुद्रा में लगभग ₹1.5 लाख करोड़ के आसपास है। वहीं इसके प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य कई ट्रिलियन यूरो में है।
भारत का BSE क्यों है खास?
भारत का बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) वर्ष 1875 में स्थापित हुआ था। यह एशिया का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज है और आज भी दुनिया के प्रमुख पूंजी बाजारों में इसकी गिनती होती है। BSE ने भारत में निवेश संस्कृति को विकसित करने और पूंजी जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
निष्कर्ष
दुनिया के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत करीब चार शताब्दी पहले हुई थी, लेकिन उसी मॉडल ने आज के आधुनिक वैश्विक शेयर बाजार की नींव रखी। डच ईस्ट इंडिया कंपनी से शुरू हुआ यह सफर आज अरबों-खरबों डॉलर के वैश्विक पूंजी बाजार में बदल चुका है। भारत का भी इस इतिहास से गहरा जुड़ाव रहा है क्योंकि डच ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापारिक नेटवर्क भारतीय तटों तक फैला हुआ था।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे निवेश सलाह न मानें। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। निवेश से पहले किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य लें।


