नई दिल्ली। भारत ने घरेलू स्टील उद्योग को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए चीन, जापान और रूस से आयात होने वाले सस्ते हॉट-रोल्ड स्टील के खिलाफ एंटी-डंपिंग जांच शुरू कर दी है। घरेलू कंपनियों का आरोप है कि इन देशों से बेहद कम कीमत पर स्टील भारत में भेजा जा रहा है, जिससे स्थानीय उद्योग को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) ने इस संबंध में आधिकारिक जांच शुरू करने की अधिसूचना जारी की है। जांच यह पता लगाएगी कि क्या इन देशों से होने वाला आयात वास्तव में डंपिंग की श्रेणी में आता है और क्या इससे भारतीय उद्योग को नुकसान पहुंचा है।
घरेलू कंपनियों की शिकायत पर हुई कार्रवाई
इस जांच की मांग देश की प्रमुख स्टील कंपनियों JSW Steel, JSW Vijayanagar Metallics Limited और Jindal Steel Odisha ने की थी। कंपनियों का कहना है कि चीन, जापान और रूस से आने वाला स्टील भारतीय बाजार में लागत से भी कम कीमत पर बेचा जा रहा है।
इन कंपनियों के अनुसार, सस्ते आयात के कारण घरेलू उत्पादकों की बिक्री, मुनाफा और बाजार हिस्सेदारी पर सीधा असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भारतीय स्टील उद्योग को और अधिक नुकसान हो सकता है।
किन उत्पादों की होगी जांच?
DGTR की अधिसूचना के मुताबिक जांच में 25 मिलीमीटर तक की मोटाई वाले अलॉय और नॉन-अलॉय हॉट-रोल्ड फ्लैट स्टील प्रोडक्ट्स को शामिल किया गया है। अब जांच के दौरान आयात की कीमत, घरेलू कीमतों, उत्पादन लागत और उद्योग को हुए संभावित नुकसान का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
यदि जांच में डंपिंग के आरोप सही पाए जाते हैं तो सरकार संबंधित देशों से आयातित स्टील पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगा सकती है। इसका उद्देश्य विदेशी उत्पादों पर प्रतिबंध लगाना नहीं बल्कि निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना होता है।
चीन बना सबसे बड़ा स्टील सप्लायर
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल महीने में चीन ने भारत को लगभग 2.32 लाख मीट्रिक टन फिनिश्ड स्टील का निर्यात किया। इसके साथ ही वह भारत को स्टील निर्यात करने वाला सबसे बड़ा देश बन गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी हॉट-रोल्ड स्टील भारतीय बाजार में स्थानीय उत्पादों की तुलना में प्रति टन 11 से 37 डॉलर तक सस्ता उपलब्ध है। यही वजह है कि कई खरीदार कम कीमत के कारण आयातित स्टील को प्राथमिकता दे रहे हैं।
एंटी-डंपिंग ड्यूटी क्या होती है?
एंटी-डंपिंग ड्यूटी वह अतिरिक्त शुल्क है जिसे सरकार तब लगाती है जब कोई विदेशी कंपनी अपने उत्पाद को दूसरे देश में असामान्य रूप से कम कीमत पर बेचती है और इससे घरेलू उद्योग प्रभावित होता है।
इसका उद्देश्य आयात पर रोक लगाना नहीं बल्कि घरेलू उद्योग को अनुचित मूल्य प्रतिस्पर्धा से बचाना और बाजार में समान अवसर उपलब्ध कराना होता है।
भारतीय स्टील उद्योग पर क्या होगा असर?
यदि जांच में डंपिंग के आरोप सही साबित होते हैं और सरकार एंटी-डंपिंग शुल्क लागू करती है, तो घरेलू स्टील कंपनियों को राहत मिल सकती है। इससे भारतीय निर्माताओं की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी और स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगने से ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में स्टील की लागत कुछ बढ़ सकती है। इसलिए सरकार जांच के निष्कर्षों के आधार पर उद्योग और उपभोक्ताओं दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला करेगी.
निष्कर्ष
चीन के साथ जापान और रूस से होने वाले सस्ते स्टील आयात पर शुरू हुई एंटी-डंपिंग जांच भारत की व्यापार नीति का अहम कदम माना जा रहा है। जांच के नतीजे तय करेंगे कि क्या इन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। यदि ऐसा होता है तो भारतीय स्टील उद्योग को प्रतिस्पर्धा में राहत मिल सकती है, जबकि आयात आधारित उद्योगों पर इसका असर भी देखने को मिल सकता है।


