नई दिल्ली: आज भारत में 10 मिनट में किराना डिलीवर करने वाली कंपनियां करोड़ों ग्राहकों की पहली पसंद बन चुकी हैं। लेकिन जिस बिजनेस मॉडल ने क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) की पूरी तस्वीर बदल दी, उसी मॉडल पर शुरुआत में बिगबास्केट (BigBasket) के फाउंडर हरि मेनन को भरोसा नहीं था। करीब 15 साल तक कंपनी की कमान संभालने के बाद CEO पद छोड़ते समय उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें नहीं लगता था कि लोग 10 मिनट में राशन की डिलीवरी जैसी सुविधा को अपनाएंगे।
हालांकि, समय के साथ ग्राहकों की बदलती जरूरतों ने उनकी सोच बदल दी और आज भारत का क्विक कॉमर्स सेक्टर अरबों डॉलर का उद्योग बन चुका है।
100 लोगों से पूछते तो ज्यादातर कहते- जरूरत नहीं
हरि मेनन ने लिंक्डइन पर अपनी विदाई पोस्ट में लिखा कि अगर शुरुआती दिनों में 100 लोगों से पूछा जाता कि क्या उन्हें 10 मिनट में किराना चाहिए, तो अधिकांश लोग इसका जवाब ‘नहीं’ देते। लेकिन जब ग्राहकों को यह सुविधा वास्तव में मिलने लगी, तो उन्होंने इसे तेजी से अपनाया।
उनके मुताबिक कई बार ग्राहक अपनी जरूरत को तब तक नहीं समझ पाते, जब तक उन्हें बेहतर अनुभव नहीं मिल जाता। यही वजह रही कि क्विक कॉमर्स बहुत कम समय में भारतीय शहरों की लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन गया।
2011 में हुई थी बिगबास्केट की शुरुआत
बिगबास्केट की स्थापना वर्ष 2011 में हुई थी। कंपनी ने शुरुआत ऑनलाइन ग्रॉसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म के रूप में की थी। बाद में बदलती बाजार की जरूरतों को देखते हुए इसने क्विक कॉमर्स मॉडल अपनाया।
आज कंपनी देश के 60 से अधिक शहरों में काम कर रही है और उसके पास 900 से ज्यादा डार्क स्टोर हैं। वर्ष 2021 में टाटा ग्रुप ने बिगबास्केट का अधिग्रहण किया था, जिसके बाद कंपनी के विस्तार को नई गति मिली।
तेजी से बढ़ रहा है बाजार, लेकिन मुनाफा अभी भी चुनौती
हरि मेनन का मानना है कि क्विक कॉमर्स की सबसे बड़ी चुनौती तेज ग्रोथ नहीं बल्कि मुनाफा कमाना है। उन्होंने कहा कि इस सेक्टर में निवेश लगातार आ रहा है और कई बड़ी कंपनियां अरबों डॉलर के वैल्यूएशन तक पहुंच चुकी हैं, लेकिन मजबूत बिजनेस मॉडल बनाना अब भी आसान नहीं है।
उनका कहना है कि केवल ऑर्डर बढ़ाने से कारोबार सफल नहीं हो जाता। असली सफलता तब मिलेगी जब हर ऑर्डर से पर्याप्त कमाई भी हो।
प्रॉफिट के लिए तीन चीजें जरूरी
हरि मेनन के अनुसार क्विक कॉमर्स कंपनियों को लाभ कमाने के लिए तीन अहम बातों पर एक साथ काम करना होगा—
- औसत ऑर्डर वैल्यू (Average Order Value)
- ग्रॉस मार्जिन (Gross Margin)
- ऑर्डर डेंसिटी (Order Density)
अगर इन तीनों में संतुलन नहीं बनता है तो लंबे समय तक बिजनेस टिकाऊ नहीं रह सकता।
₹350-400 के ऑर्डर से नहीं बनेगी बात
एक उद्योग सम्मेलन में हरि मेनन ने कहा था कि यदि किसी कंपनी की औसत ऑर्डर वैल्यू केवल ₹350-400 के आसपास रहती है तो वह लंबे समय में अच्छा मुनाफा नहीं कमा सकती।
उनका कहना है कि किसी भी बिजनेस का लक्ष्य केवल ब्रेक-ईवन तक पहुंचना नहीं होना चाहिए, बल्कि मजबूत EBITDA कमाना होना चाहिए। तभी कंपनी निवेशकों और शेयरधारकों के लिए वास्तविक मूल्य बना सकती है।
डीमार्ट का दिया उदाहरण
हरि मेनन ने पारंपरिक रिटेल मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि समान पैमाने पर काम करने वाली कंपनियां कहीं बेहतर मुनाफा कमाती हैं। उन्होंने बताया कि डीमार्ट करीब 8% EBITDA हासिल करती है, जबकि क्विक कॉमर्स कंपनियों के लिए यह स्तर अभी चुनौती बना हुआ है।
उनके अनुसार केवल तेज ग्रोथ या अधिक ऑर्डर किसी कंपनी को सफल नहीं बनाते, बल्कि मजबूत वित्तीय प्रदर्शन ज्यादा महत्वपूर्ण होता है।
लगातार डिस्काउंट देना नहीं है समाधान
हरि मेनन ने चेतावनी दी कि लगातार भारी छूट देकर ग्राहकों को जोड़ना टिकाऊ रणनीति नहीं है।
उन्होंने कहा कि डिस्काउंट के जरिए कंपनियां कुछ समय तक ऑर्डर बढ़ा सकती हैं और फिक्स्ड कॉस्ट निकाल सकती हैं, लेकिन वेरिएबल कॉस्ट की भरपाई इस तरीके से नहीं हो सकती। ऐसे में लंबे समय तक घाटे में कारोबार चलाना संभव नहीं होगा।
आने वाले समय में हो सकता है कंसोलिडेशन
हरि मेनन का मानना है कि भारतीय क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री में आने वाले वर्षों में कंपनियों का मर्जर और कंसोलिडेशन देखने को मिल सकता है।
उनके मुताबिक अब बाजार की ग्रोथ पहले जैसी तेज नहीं रही है और निवेशक भी सोच-समझकर पूंजी लगा रहे हैं। ऐसे माहौल में केवल वही कंपनियां टिक पाएंगी जिनका बिजनेस मॉडल मजबूत होगा और जो लगातार लाभ कमाने की क्षमता रखती हों।
बदलती आदतों ने बदली पूरी इंडस्ट्री
भारत में ऑनलाइन खरीदारी की आदत तेजी से बदल रही है। पहले जहां लोग एक-दो दिन की डिलीवरी का इंतजार करते थे, वहीं अब कुछ ही मिनटों में सामान मिलने की उम्मीद करते हैं। यही बदलाव क्विक कॉमर्स सेक्टर की सबसे बड़ी ताकत बन गया है।
हालांकि हरि मेनन का मानना है कि आने वाले समय में केवल तेज डिलीवरी ही पर्याप्त नहीं होगी। टिकाऊ बिजनेस मॉडल, बेहतर मार्जिन और संतुलित लागत ही इस उद्योग के भविष्य का फैसला करेंगे।


