Highlights
- मार्च 2026 तक देश में 5,499 करोड़ 1 रुपये के सिक्के चलन में रहे।
- कुल सिक्कों में 1 रुपये के सिक्के की हिस्सेदारी 38.4% रही।
- ग्रामीण बाजार, मंदिर और छोटे लेन-देन में आज भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल।
नई दिल्ली
भारत में डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) और यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल पिछले कुछ वर्षों में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच चुका है। शहरों में चाय से लेकर किराने तक का भुगतान अब मोबाइल फोन से होने लगा है। इसके बावजूद 1 रुपये का सिक्का आज भी भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत हिस्सा बना हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि संख्या के हिसाब से 1 रुपये का सिक्का देश का सबसे ज्यादा चलन में रहने वाला सिक्का है और पिछले एक दशक से इसकी बादशाहत कायम है।
हालांकि, महंगाई बढ़ने के साथ इसकी वास्तविक खरीद क्षमता लगातार घटी है। आज एक रुपये में बहुत कम सामान खरीदा जा सकता है, लेकिन छुट्टे पैसे, मंदिरों में चढ़ावे और छोटे लेन-देन में इसकी उपयोगिता आज भी बनी हुई है।
एक दशक से कायम है 1 रुपये के सिक्के का दबदबा
टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI) की रिपोर्ट और RBI की Annual Report 2025-26 के मुताबिक मार्च 2026 तक देश में लगभग 5,499 करोड़ एक रुपये के सिक्के चलन में थे। कुल सिक्कों की संख्या में इनकी हिस्सेदारी 38.4% रही।
देश में वर्तमान में 50 पैसे, 1 रुपये, 2 रुपये, 5 रुपये, 10 रुपये और 20 रुपये के सिक्के चलन में हैं। इनमें संख्या के लिहाज से 1 रुपये का सिक्का सबसे आगे है।
पिछले वर्षों में भी सबसे आगे रहा 1 रुपये का सिक्का
यह पहली बार नहीं है जब 1 रुपये का सिक्का सबसे ज्यादा संख्या में मौजूद है।
आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार—
- मार्च 2025 में कुल सिक्कों में इसकी हिस्सेदारी 39.3% थी।
- वित्त वर्ष 2014, 2015 और 2016 के अंत में यह हिस्सेदारी लगभग 42% थी।
- वित्त वर्ष 2016 में करीब 4,500 करोड़ एक रुपये के सिक्के चलन में थे।
- दस वर्षों में इसकी संख्या लगातार बढ़कर लगभग 5,500 करोड़ तक पहुंच गई।
यानी डिजिटल भुगतान के विस्तार के बावजूद 1 रुपये का सिक्का भारतीय मुद्रा प्रणाली का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है।
संख्या ज्यादा, लेकिन वैल्यू में पीछे
बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि संख्या के हिसाब से 1 रुपये के सिक्के सबसे ज्यादा हैं, लेकिन कुल मूल्य (Value) के लिहाज से तस्वीर बदल चुकी है।
19 जून 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक—
- 5 रुपये और 10 रुपये के सिक्कों की संख्या कुल सिक्कों का केवल 23.5% है।
- लेकिन कुल मूल्य में इनकी हिस्सेदारी 53.5% है।
- इन सिक्कों की कुल वैल्यू लगभग 22,209 करोड़ रुपये है।
यानी मूल्य के आधार पर अब 5 और 10 रुपये के सिक्के ज्यादा महत्वपूर्ण हो चुके हैं।
1 रुपये का सिक्का आखिर इतना लोकप्रिय क्यों है?
बैंक अधिकारियों का कहना है कि 1 रुपये का सिक्का लगातार हाथ बदलता रहता है। यही वजह है कि यह सबसे ज्यादा चलन में दिखाई देता है।
इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण हैं—
- दुकानों पर छुट्टे पैसे देने के लिए सबसे ज्यादा इस्तेमाल।
- मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे में व्यापक उपयोग।
- सब्जी, फल और छोटे कारोबारियों के बीच नकद लेन-देन।
- बस, ऑटो और स्थानीय परिवहन में छुट्टे के रूप में उपयोग।
- ₹99, ₹199 और ₹499 जैसी मनोवैज्ञानिक (Psychological Pricing) कीमतों के कारण इसकी लगातार जरूरत बनी रहती है।
ग्रामीण भारत में आज भी सबसे ज्यादा मांग
डिजिटल भुगतान ने शहरों में नकदी का उपयोग काफी कम कर दिया है, लेकिन ग्रामीण भारत में स्थिति अलग है।
आज भी गांवों और कस्बों में—
- किराना दुकानों
- हाट-बाजार
- रेहड़ी-पटरी
- बस और लोकल ट्रांसपोर्ट
- कृषि मंडियों
- धार्मिक आयोजनों
में नकद भुगतान आम बात है। ऐसे में छुट्टे पैसे के लिए 1 रुपये का सिक्का सबसे अहम भूमिका निभाता है।
आने वाले समय में क्या खत्म हो जाएगी इसकी जरूरत?
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल भुगतान का दायरा लगातार बढ़ेगा, लेकिन भारत जैसे विशाल और विविध अर्थव्यवस्था वाले देश में छोटे नकद लेन-देन पूरी तरह खत्म नहीं होंगे।
जब तक छोटे व्यापार, ग्रामीण बाजार और नकद आधारित लेन-देन मौजूद हैं, तब तक 1 रुपये का सिक्का भी भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा।
1 रुपये के सिक्के की स्थिति (RBI डेटा)
| वर्ष | कुल सिक्कों में हिस्सेदारी | अनुमानित संख्या (करोड़) |
|---|---|---|
| 2024 | 40.0% | 5,299 |
| 2025 | 39.3% | 5,387 |
| 2026 | 38.4% | 5,499 |
स्रोत: RBI Annual Report 2025-26
निष्कर्ष
डिजिटल इंडिया की सफलता के बावजूद 1 रुपये का सिक्का अपनी उपयोगिता नहीं खो पाया है। भले ही इसकी खरीद क्षमता पहले जैसी नहीं रही हो, लेकिन संख्या के हिसाब से यह आज भी देश का सबसे लोकप्रिय सिक्का है। ग्रामीण बाजारों, मंदिरों, छोटे कारोबार और रोजमर्रा के नकद लेन-देन में इसकी भूमिका अब भी बेहद अहम है। यही वजह है कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते दौर में भी 1 रुपये का सिक्का भारतीय अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए हुए है।


