नई दिल्ली। भारत के शेयर बाजार की बात हो और BSE तथा NSE का जिक्र न हो, ऐसा संभव नहीं है। एक तरफ 151 साल पुराना बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) है, जिसने भारतीय पूंजी बाजार की नींव रखी। दूसरी तरफ 34 साल पुराना नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) है, जिसने तकनीक और ट्रेडिंग वॉल्यूम के दम पर बाजार में अपना दबदबा बनाया।
अब चर्चा इसलिए और तेज हो गई है क्योंकि NSE ने अपने बहुप्रतीक्षित IPO के लिए सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है। ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर BSE और NSE में कौन ज्यादा ताकतवर है और किसकी कमाई अधिक है।
BSE और NSE की शुरुआत कब हुई?
भारत का सबसे पुराना स्टॉक एक्सचेंज BSE है। इसकी स्थापना वर्ष 1875 में हुई थी और इसे एशिया का पहला स्टॉक एक्सचेंज माना जाता है। देश में संगठित शेयर कारोबार की शुरुआत कराने में इसकी बड़ी भूमिका रही है।
वहीं NSE की स्थापना 1992 में हुई थी। इसे 1993 में सेबी से मान्यता मिली और 1994 में इसने कारोबार शुरू किया। आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग सिस्टम लाने का श्रेय काफी हद तक NSE को जाता है।
आज दोनों एक्सचेंज मिलकर भारत के लगभग पूरे संगठित इक्विटी और डेरिवेटिव्स बाजार को नियंत्रित करते हैं। यही वजह है कि इन्हें भारतीय बाजार की “डुओपॉली” कहा जाता है।
कमाई के मामले में कौन आगे?
अगर केवल आकार और राजस्व की बात करें तो NSE अभी भी BSE से काफी आगे है।
वित्त वर्ष 2025-26 में NSE ने 16,601 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया, जबकि BSE का राजस्व 4,833 करोड़ रुपये रहा। यानी NSE की आय BSE से करीब साढ़े तीन गुना अधिक रही।
शुद्ध लाभ (PAT) के मामले में भी NSE का दबदबा कायम है। NSE ने FY26 में 10,302 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया, जबकि BSE का शुद्ध लाभ 2,487 करोड़ रुपये रहा।
हालांकि दिलचस्प बात यह है कि जहां NSE के मुनाफे और राजस्व में पिछले साल के मुकाबले गिरावट दर्ज हुई, वहीं BSE ने शानदार ग्रोथ दिखाई है। BSE का राजस्व 63% और शुद्ध लाभ 88% से अधिक बढ़ा।
BSE Vs NSE: FY26 प्रदर्शन
| मापदंड | NSE | BSE |
|---|---|---|
| कुल आय | ₹16,601 करोड़ | ₹4,833 करोड़ |
| शुद्ध लाभ (PAT) | ₹10,302 करोड़ | ₹2,487 करोड़ |
| PAT मार्जिन | 62.05% | 51.40% |
| ऑपरेटिंग EBITDA | ₹11,097 करोड़ | ₹3,078 करोड़ |
| फाइनल डिविडेंड | ₹35 प्रति शेयर | ₹10 प्रति शेयर |
| औसत दैनिक ट्रेडिंग | ₹1.05 लाख करोड़ | ₹7,950 करोड़ |
| मेनबोर्ड IPO | 108 | 109 |
| SME IPO | 111 | 146 |
| लिस्टेड कंपनियां | 2,978 | 5,955 |
ट्रांजैक्शन फीस से होती है सबसे ज्यादा कमाई
दोनों एक्सचेंज की कमाई का सबसे बड़ा स्रोत ट्रांजैक्शन चार्ज होता है।
NSE ने FY26 में ट्रांजैक्शन फीस से 13,057 करोड़ रुपये कमाए, जबकि लिस्टिंग फीस से 352 करोड़ रुपये की आय हुई।
दूसरी ओर BSE ने ट्रांजैक्शन चार्ज से 3,795 करोड़ रुपये और लिस्टिंग सेवाओं से 519 करोड़ रुपये की कमाई की।
यह आंकड़े बताते हैं कि ट्रेडिंग वॉल्यूम के मामले में NSE अभी भी बाजार का निर्विवाद नेता बना हुआ है।
IPO मार्केट में किसका दबदबा?
IPO की बात करें तो दोनों एक्सचेंजों ने FY26 में 100 से ज्यादा मेनबोर्ड IPO होस्ट किए।
हालांकि SME सेगमेंट में BSE की पकड़ ज्यादा मजबूत दिखाई देती है। FY26 में BSE पर 146 SME IPO सूचीबद्ध हुए, जबकि NSE पर यह संख्या 111 रही।
इसी वजह से SME कंपनियों के लिए BSE अभी भी पसंदीदा प्लेटफॉर्म माना जाता है।
निवेशकों के लिए क्या है बड़ा संदेश?
151 साल पुराने BSE ने हाल के वर्षों में तेज ग्रोथ दिखाई है और SME सेगमेंट में अपनी स्थिति मजबूत की है। वहीं NSE अभी भी ट्रेडिंग वॉल्यूम, राजस्व और मुनाफे के मामले में बाजार का सबसे बड़ा खिलाड़ी बना हुआ है।
NSE के IPO के बाद दोनों एक्सचेंजों की तुलना और दिलचस्प हो जाएगी क्योंकि तब निवेशकों के पास दोनों कंपनियों में सीधे निवेश करने का विकल्प होगा। फिलहाल आंकड़े बताते हैं कि कमाई के मामले में NSE का पलड़ा भारी है, लेकिन ग्रोथ रेट के मामले में BSE तेजी से आगे बढ़ रहा है।
डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।


