भारत और ब्रिटेन के बीच लंबे समय से चर्चा में रहा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक समझौते से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई मजबूती मिलेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत से ब्रिटेन जाने वाले लगभग 99 फीसदी उत्पादों पर आयात शुल्क (टैरिफ) समाप्त हो जाएगा, जिससे भारतीय उत्पाद ब्रिटिश बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer के बीच हुई बैठक में इस समझौते को लागू करने की तारीख पर अंतिम सहमति बनी। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे भारत और ब्रिटेन के आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय बताया है।
भारतीय निर्यातकों को मिलेगा बड़ा फायदा
FTA लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में पहले से कहीं बेहतर अवसर मिलेंगे। अभी तक कई भारतीय उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगता था, जिसके कारण उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होती थी। अब यह बाधा काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
किन सेक्टर्स को होगा सबसे ज्यादा लाभ?
प्रोसेस्ड फूड
- ब्रिटेन में लगने वाला 70% तक का शुल्क समाप्त होगा।
- भारतीय खाद्य उत्पाद अधिक सस्ते और प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
मरीन प्रोडक्ट्स (सी-फूड)
- 21.5% तक का आयात शुल्क खत्म होगा।
- समुद्री उत्पादों के निर्यात में तेजी आने की उम्मीद।
इंजीनियरिंग और ऑटो कंपोनेंट्स
- लगभग 18% तक की शुल्क राहत।
- ऑटो पार्ट्स और मशीनरी निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
जूते और चमड़े के उत्पाद
- 16% तक का टैरिफ समाप्त।
- भारतीय लेदर उद्योग को बड़ा फायदा।
कपड़ा और गारमेंट्स
- 12% तक की ड्यूटी खत्म।
- भारतीय टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट उद्योग को नई गति मिलेगी।
केमिकल और फार्मास्यूटिकल्स
- 8% तक का शुल्क हटेगा।
- भारतीय दवा कंपनियों के लिए ब्रिटिश बाजार में अवसर बढ़ेंगे।
सर्विस सेक्टर को भी मिलेगा लाभ
FTA केवल वस्तुओं तक सीमित नहीं है। इसके तहत आईटी, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं, कंसल्टेंसी और अन्य पेशेवर सेवाओं सहित करीब 137 उप-क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों और पेशेवरों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
भारत की आईटी कंपनियां और सेवा प्रदाता ब्रिटेन में अपने कारोबार का विस्तार अधिक आसानी से कर सकेंगे। इससे सेवा निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।
ब्रिटेन में काम कर रहे भारतीयों को बड़ी राहत
इस समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट भी है।
अब ब्रिटेन में अस्थायी रूप से कार्यरत भारतीय पेशेवरों को दोहरे सामाजिक सुरक्षा अंशदान (Double Social Security Contribution) से राहत मिलेगी। यानी उन्हें भारत और ब्रिटेन दोनों जगह एक साथ सामाजिक सुरक्षा योगदान नहीं देना पड़ेगा।
किसे मिलेगा फायदा?
- 75,000 से अधिक भारतीय पेशेवर
- 900 से ज्यादा भारतीय कंपनियां
- ब्रिटेन में अस्थायी नियुक्ति पर गए कर्मचारी
सरकार ने इस राहत की अवधि को 3 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया है, जिससे भारतीय कर्मचारियों और कंपनियों की लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी।
MSME और स्टार्टअप्स के लिए सुनहरा अवसर
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार यह समझौता केवल बड़े उद्योगों के लिए नहीं बल्कि MSME, स्टार्टअप, किसानों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों के लिए भी लाभदायक होगा।
ब्रिटेन जैसे विकसित बाजार तक आसान पहुंच मिलने से:
- निर्यात बढ़ेगा
- रोजगार के अवसर पैदा होंगे
- विदेशी निवेश आकर्षित होगा
- भारतीय ब्रांड्स की वैश्विक पहचान मजबूत होगी
कैसे हुआ यह समझौता?
भारत और ब्रिटेन के बीच इस समझौते तक पहुंचने में कई वर्षों की बातचीत लगी।
FTA की टाइमलाइन
- लगभग 14 दौर की वार्ताएं हुईं
- 6 मई 2025 को ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया गया
- 24 जुलाई 2025 को दोनों देशों ने आधिकारिक हस्ताक्षर किए
- 10 फरवरी 2026 को सोशल सिक्योरिटी कन्वेंशन पर हस्ताक्षर हुए
- 15 जुलाई 2026 से समझौता प्रभावी होगा
कपड़ा उद्योग को मिलेगी नई उड़ान
अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के चेयरमैन Dr. A. Sakthivel ने इस समझौते को भारतीय परिधान उद्योग के लिए “वाटरशेड मोमेंट” बताया है।
उनके अनुसार ब्रिटेन में भारतीय कपड़ों पर लगने वाले टैरिफ पूरी तरह समाप्त होने से भारतीय निर्यातकों को बड़ा प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। इससे ब्रिटेन में भारतीय परिधानों की मांग और निर्यात दोनों बढ़ सकते हैं।
भारत को क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?
इस FTA का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि भारतीय उत्पादों को दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक के बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी। कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, फार्मा, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और आईटी जैसे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ने से भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत के “विकसित भारत 2047” लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।


