नई दिल्ली: संभावित अल नीनो और कमजोर मॉनसून की आशंकाओं के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। देश के सरकारी गोदामों में चावल और गेहूं का भंडार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इससे न केवल देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि जरूरत पड़ने पर सरकार कीमतों को नियंत्रित करने और निर्यात बढ़ाने में भी सक्षम रहेगी।
केंद्र सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, किसानों से बड़े पैमाने पर खरीद और रिकॉर्ड उत्पादन के चलते खाद्यान्न भंडार पिछले कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। ऐसे समय में जब मौसम वैज्ञानिक अल नीनो के प्रभाव से बारिश कम होने की आशंका जता रहे हैं, यह मजबूत स्टॉक देश के लिए सुरक्षा कवच साबित हो सकता है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा चावल और गेहूं का भंडार
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 1 जून 2026 तक सरकारी गोदामों में चावल का कुल स्टॉक 68.43 मिलियन मीट्रिक टन (करीब 6.84 करोड़ टन) दर्ज किया गया। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक है और अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। इस आंकड़े में धान का स्टॉक भी शामिल है।
वहीं गेहूं का भंडार 53.41 मिलियन टन यानी लगभग 5.34 करोड़ टन तक पहुंच गया है। यह पिछले पांच वर्षों का सबसे ऊंचा स्तर है और 2021 के बाद पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में गेहूं सरकारी गोदामों में उपलब्ध है।
सरकार के लक्ष्य से कहीं ज्यादा है भंडारण
खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत सरकार हर साल न्यूनतम बफर स्टॉक का लक्ष्य निर्धारित करती है। आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई के लिए चावल का निर्धारित लक्ष्य 1.35 करोड़ टन था, जबकि वास्तविक स्टॉक 6.84 करोड़ टन से अधिक पहुंच गया है। यानी लक्ष्य से कई गुना ज्यादा भंडार मौजूद है।
इसी तरह गेहूं के लिए सरकार का लक्ष्य 2.76 करोड़ टन था, जबकि वास्तविक स्टॉक 5.34 करोड़ टन दर्ज किया गया। यह निर्धारित लक्ष्य से काफी ज्यादा है और सरकार को भविष्य में बाजार हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त विकल्प उपलब्ध कराता है।
अल नीनो के बावजूद खाद्य सुरक्षा पर नहीं पड़ेगा असर
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो की स्थिति बनने पर भारत में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने का खतरा रहता है। हालांकि मौजूदा रिकॉर्ड भंडार के कारण देश को तत्काल किसी खाद्यान्न संकट की आशंका नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चावल का विशाल भंडार भारत को वैश्विक बाजार में निर्यात बढ़ाने का अवसर देगा। वहीं गेहूं का मजबूत स्टॉक घरेलू बाजार में कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद करेगा। यदि किसी समय गेहूं या आटे की कीमतों में तेजी आती है तो सरकार खुले बाजार बिक्री योजना (OMSS) के तहत अतिरिक्त स्टॉक जारी कर सकती है।
रिकॉर्ड उत्पादन ने बढ़ाई सरकार की ताकत
खाद्यान्न भंडार में बढ़ोतरी के पीछे रिकॉर्ड उत्पादन भी बड़ी वजह है। फसल वर्ष 2025-26 में देश में चावल और गेहूं दोनों का उत्पादन नई ऊंचाई पर पहुंचा है।
सरकारी अनुमानों के अनुसार, इस अवधि में चावल का उत्पादन लगभग 15.4 करोड़ टन और गेहूं का उत्पादन करीब 12 करोड़ टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है। बेहतर पैदावार और किसानों से बढ़ी सरकारी खरीद ने खाद्यान्न भंडारण को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है।
महंगाई नियंत्रण में भी मिलेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि रिकॉर्ड स्टॉक का सबसे बड़ा फायदा खाद्य महंगाई को नियंत्रित करने में मिलेगा। यदि मौसम संबंधी किसी वजह से उत्पादन प्रभावित भी होता है तो सरकार के पास पर्याप्त भंडार उपलब्ध रहेगा। इससे बाजार में सप्लाई बनाए रखने और कीमतों में अनावश्यक उछाल को रोकने में मदद मिलेगी।
भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। ऐसे में मजबूत भंडार न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारत की स्थिति को मजबूत बनाए रखेगा।
(डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध सरकारी आंकड़ों और सार्वजनिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। खाद्यान्न उत्पादन और भंडारण से जुड़े आंकड़े समय-समय पर अपडेट हो सकते हैं।)


